हर्फ-ए-रोशनाई की, अब कसम उठा लो तुम
इश्क़ के फसाने को, मिटने से बचा लो तुम
साज़ दिल का है खामोश , महफ़िलें हैं बेरंग सी
शम्आ रह गई तन्हा, सोज-ए-शब संभालो तुम
साकी के कदम दोनों, डगमगा रहे हैं अब
ज़हर से भरा ये जाम, लब से अब हटा लो तुम
देख कर सबा हमको, रूठ जाए ना हमसे
उसकी मेज़बानी में, गीत कोई गा लो तुम
साँस साँस उम्मीदें, चश्म-ए-नम की सौग़ातें
हैं कहाँ छुपी खुशियाँ , राज़ खोल डालो तुम
कौंधती है जब बिजली लहरें सब लरजती हैं
तूफाँ में कोई आ कर, राह तो निकालो तुम
नक़्श आसमानों में, मुमकिन ही नहीं ‘नीलम’
जो फ़लक से ऊँची हो, वो सदा लगा लो तुम


पुरवाई एवं तेजिन्दर जी का हार्दिक धन्यवाद!
– नीलम वर्मा