संघर्ष
जीवन की हर राह पर कांटे होंते हैं
शायद कई राहों पे अँधेरा भी अड़ेगा
भले हमारे पैरों में छाले दिखने लगें
हमको अनवरत लड़ते रहना पड़ेगा
रुकना नहीं हम सबको कभी हार से
डरना नहीं हमको समय के प्रहार से
लक्ष्य को सामने रख आगे बढ़ते रहो
अपना उद्देश्य मत छुपाओ संसार से
माथे पर आये हुए स्वेद के कुछ कण
बनाते जीवन में सफलता की सीढियाँ
जो असफल हो कर भी नहीं घबराते हैं
वही लिख पाते सफलता की कहानियाँ
हौंसलों से अपने सपनों को साकार करो
किसी भी भय भाव पर डटके प्रहार करें
सिर्फ सोचने से ही ना मिलेगी सफलता
हम कठिनाईयों पर जबरदस्त वार करें
सफ़र पर निकलो दृढ़ संकल्प को लेकर
अमावस की रात में भी नहीं डगमगायें
निडर होकर खेते रहें अपनी यह नौका
चाहे जीवन भर कितने भी तूफान आयें
अपने आत्म विश्वास को सदा ऊँचा रखो
मुस्कुराते हुए हर मुश्किल पे प्रहार करो
हिम्मत न हारो कभी विचलित नहीं हो
असफलता की चुनौती को स्वीकार करो
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दर्पण में प्रतिबिंब
दर्पण में दिखता मानव को प्रतिबिंब
इसमें परिलक्षित होते जीवन के पल
हर पल की यादों का साक्षी होता यह
दर्पण सच्चाई को सदा देता है संबल
समय के साथ चेहरे बदलते रहते हैं
सब करें दर्पण में सुंदरता की तलाश
प्रतिबिंब लिखे नित एक नव अध्याय
मन के अंदर रहती नई सुबह की आस
हर सुबह दर्पण में दिखे यौवन भाव
प्रतिबिंब रचाता है पहचान का खेल
दर्पण दिखाता है भूत भविष्य के क्षण
करा देता हम सबके व्यक्तित्व से मेल
दर्पण में झलकते बदलते दृष्टिकोण
परिलक्षित होता बदलता परिप्रेक्ष्य
प्रतिबिंब में दिखती जीवन पथ यात्रा
दर्पण में दिखे यादें संजोने का उद्देश्य
दर्पण में झलके अस्तित्व की तलाश
उसमें परछाईं हमारे साथ चलती है
जज्बातों के अक्स नैनों में आते नज़र
उम्मीदें जिंदगी के आईने में पलती हैं
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मेरा वतन
स्वतंत्रता दिवस पर वतन हुआ था स्वतंत्र
उसकी नींव में था वीर सैनिकों का संघर्ष
नया सूरज लेकर था आया देश में प्रजातंत्र
हमने इसी दिन स्वप्न में देखा नया उत्कर्ष
मुखरित हो मानवता बस ये वरदान मिले
भेदभाव को छोड़ समरसता का भाव बहे
नये भारत का हो अभ्युदय विश्व पटल पर
हरेक मानव के मन में बंधुत्व अनुराग रहे
नदियों की लहरें सुना रहीं हैं संगीत नया
इसी गणतंत्र के खातिर दे दिया बलिदान
विहंगों के कंठों से फूट रहे स्वतंत्रता गीत
जन गण मन पर हम सबको है अभिमान
पूरी दुनिया समझ चुकी है हमारी ताकत
ऑपरेशन सिंदूर विश्व ने देखा है ध्यान से
पराक्रम के शोले उड़ गये नील गगन तक
समझौता नहीं होगा तिरंगे के सम्मान से
वीर शहीदों का लहू ना होने दें विस्मृत
जाति धर्म भुला एकताका दीप जलायें
मिलके हम सभी नवयुग की रचना करें
वतन को विश्व गुरु की राह पर ले जायें
- कृष्ण कुमार गुप्ता, पुणे महाराष्ट्र
+918080781726
