छोटे शहरों में हर मोहल्ले में एक ठलुआ क्लब होता है, जो अथाई या तख्तो पर जुटता है | इस क्लब के सदस्य मलूकादास के चेले होते हैं और “अजगर करे ना चाकरी …..कहावत को चरितार्थ करते हुए कोई काम करना अपनी तौहीन समझते हैं | पर इनके पास पूरे महल्ले को सलाह देने का ठेका होता है वो भी एकदम मुफ्त |  इनमे एक और खास गुण होता है भले ही अजगर की तरह शरीर हिले ना हिले पर इनके दिमाग और जुबान बिना किसी रोक टोक के शताब्दी की गति से दौड़ते रहते हैं और इन्ही के बल पर मोहल्ले का चलता फिरता अखबार बन जाते हैं |
इनकी नजर तो इतनी पैनी होती है कि कोई भी खबर इनकी नजरों से चूक ही नहीं सकती| किसकी बहु को कौन सा महीना चल रहा है ये इनकी नजरें तुरंत तौल लेती हैं| और तो और यदि कोई महिला या कन्या इनके सामने से गुजरे तो ये नजरों से ही उसे गंतव्य तक छोड़ दें | ये अपनी सूंघने की शक्ति में तो कुत्ते को भी पछाड दें कुछ होने से पहले ही सूंघ लेते हैं यानि  किसकी बेटी का किस से टांका भिड़ा है और कब तक भाग जायेगी ये सूंघ कर ही बता देते हैं |

अर्चना चतुर्वेदी की चुटकी - मोहल्ले के ठलुए 3

दूसरों का फटा ढूँढ कर उसमें टांग घुसेड़ने की अपनी जिम्मेद्दारी ये हैं पूरी मुस्तैदी से निभाते हैं और उस पर जोर शोर से चर्चा बुराई भी करते हैं – फलाने के माँ बाप अकेले पड़े हैं, बेटे बहु बाहर हैं उन्हें सेवा करनी चाहिए ये ज्ञान बरसाएंगे पर ये बिलकुल भूल जायेंगे कि इनकी बूढ़ी माँ भी अकेली और बीमार है, उसे भी सेवा की जरुरत है| माँ भी समझ चुकी है कि बेटा इतनी बड़ी समाज सुधार के कार्य में व्यस्त है तो ये बात याद भी कैसे रखेगा यानि अपने घर का बड़ा फटा भी नहीं दीखता पर दूसरे के सुराग को सुरंग कैसे बनाया जाये बखूबी जानते हैं | असल में तो यही वो ‘लोग’ हैं जिनके बारे में बोल बोल कर हम सबको डराया जाता था | ये वही लोग हैं जिनसे कोई भला आदमी भूत से भी ज्यादा डरता है |लोग क्या कहेंगे ? वाले लोग यही हैं जिन्हें कहने के अलावा कोई काम नहीं होता | इधर आपने कुछ किया और उधर इन लोगों ने कह डाला … 
कोई कहाँ जा रहा है ,क्या कर रहा है कित्ता कमा रहा है हर बात से इन्हें मतलब होता है और तो हर एक के लिए राय मशवरा देने के मामले में पूरे रायचंद होते हैं | हर एक विषय पर लंबी लंबी बहस कर सकते हैं क्योंकि इनके पास तो वक्त ही वक्त है | मेरी राय में तो इन ठलुओ को सरकारी ऐसेट घोषित कर देना चाहिए और इनके हुनर का इस्तेमाल जासूसों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाना चाहिए | और तो और इनके इस हुनर का इस्तेमाल देश की बाह्य और आंतरिक सुरक्षा में बखूबी किया जा सकता है|

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