बात 1990 की है जब नॉटिंघम में मैं मेडिकल प्रैक्टिक्स मैनेजमेंट का काम कर रही थी।   हमलोगों को एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस, जो कॉन्फ्रेंस प्लस होलीडे कम्पनी द्वारा आयोजित की गई थी, उसमें इज़राइल जाने का अवसर मिला। कॉन्फ्रेंस येरूशलम के पास एक शहर में थी। अतः हमने कॉन्फ्रेंस के तीन दिन पहले निजी तौर जेरूसलेम  घूमने का प्रोग्राम बनाया। 

 मैं और डॉ. वर्मा येरूशलम  के गुरियान एयरपोर्ट पहुँचे, जो येरूशलम  से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर है। ठहरने की व्यवस्था होलीडे कम्पनी द्वारा शैरेटन होटल में की गई थी, जो कि जेरूसलेम शहर के बिल्कुल बीचोबीच स्थित था। हमें एयरपोर्ट पर लेने एक गाइड अपनी टैक्सी से आया था। गाइड को लेकर हमें बहुत तसल्ली थी क्योंकि हमें हिब्रू भाषा बोलनी नहीं आती थी। इंग्लैंड की होलीडे कम्पनी द्वारा उसे  सूचित किया गया था कि एक डॉक्टर एवं उनकी पत्नी को लेकर होटल तक छोड़ना है। बाकी के डॉक्टर्स तीन दिन बाद वहाँ पहुँचेंगे। जब हम एयरपोर्ट पहुँचे तो हमने अपने दोनों सूटकेस इकट्ठे किए और उस गाइड को ढूंढने लगे, लेकिन हमें वहाँ कोई हमारा इंतज़ार करता हुआ नहीं दिखाई दिया। एयरपोर्ट पर बहुत सिक्योरिटी थी और एयरपोर्ट खाली पड़ा था। हमने रिसेप्शन पर जाकर पूछा कि क्या कोई हमें लेने आया हुआ है। उन्होंने अनाउंसमेंट किया और साथ ही हमने कॉन्फ्रेंस आयोजकों को फोन पर सम्पर्क करना चाहा।
उन दिनों मोबाइल फोन नहीं होते थे। टेलिफ़ोन करने के लिए इज़राइल के सिक्कों की जरूरत थी। रिसेप्शनिस्ट ने हमें पाउंड के बदले कुछ इज़राइल के सिक्के दे दिए। फिर हम टेलिफ़ोन बूथ में पैसे डालकर आयोजकों से फोन पर सम्पर्क करने की कोशिश करने लगे। किसी ने कोई जवाब नहीं दिया तब हम एयरपोर्ट पर ही बैठकर गाइड का इंतज़ार करने लगे। हमें लगा की शायद उसे आने में देरी हो गई। वहीं दूसरे सिरे पर एक आदमी दूसरी तरफ मुह फेरे हुए बैठा नज़र आया।
मैंने संकोचवश उस व्यक्ति के पास जाकर धीरे से पूछा, “एक्सक्यूज़ मी, डू यू स्पीक इंग्लिश…? तो उसने जवाब दिया, “येस येस…” वह गर्दन हिलाते हुए जवाब दिया। तो मैंने कहा, “हमें कोई एयरपोर्ट  पर लेने आने वाला था और हम उसी का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन यहाँ कोई भी दिखाई नहीं दे रहा।” मैंने उसे कहा कि हमलोग इंग्लैंड से आए हैं, यह सुनकर उस आदमी की आँखों में चमक आ गई और प्रसन्न होकर बोलो कि “मैं ही गाइड हूँ और मैं इंग्लैंड से आने वाले अंग्रेज डॉक्टर की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।” तबतक डॉ. वर्मा आ गए और उन्होंने गाइड को बताया हमलोग ही हैं, जो इंग्लैंड से आए हुए हैं। यह सुनकर वह आश्चर्यचकित होकर हमें देखने लगा क्योंकि वह तो एक अंग्रेज डॉक्टर के इंतज़ार में था।  
येरूशलम के शेरेटन होटल में हम पहुँचे तथा हमने उन्हें बताया कि कल हम जेरूसलेम शहर घूमना चाहेंगे। हमारे लिए एक टैक्सी दिनभर के लिए इंतजाम कर दो। वह शुक्रवार का दिन था। रिसेप्शन पर हमें बताया गया कि तुमलोग अपना आज का दिन पुराने येरुशलम में बिताओ क्योंकि कल बहुत कुछ बंद रहेगा। हमने कहा हम तो यहाँ केवल तीन दिन के लिए हैं। रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि कल शनिवार को सुबह की गर्म चाय या नाश्ता खाने को नहीं मिलेगा। हमें यह जानकर अत्यंत आश्चर्य हुआ।
यहूदी धर्म के अनुसार “साबथ” (शनिवार) को  कुछ भी गर्म नहीं करते। हमने कहा कि क्या आप सुबह की बेड टी हमारे लिए कमरे में भिजवा सकते हो, तो उसने कहा, “नहीं..! कल कोई भी चीज़ गर्म नहीं होगी, कल नाश्ते में डाइनिंग हॉल में डबल रोटी, मक्खन, कॉर्न फ्लेक्स, कई प्रकार के केक, ऑरेंज जूस और ठंढा दूध होगा। इसके बाद हमारे सूटकेसज़ उन्होंने कमरे में भिजवा दिए तथा रिसेप्शन रूम में ही हमारे लिए चाय तथा खाने का प्रबंध करवा दिया। हमने जल्दी से चाय पी और फिर पुराना येरूशलम घूमने चल दिए।
रिसेप्शन वाले ने मुस्कुराते हुए बताया कि आज होटल के बाहर टैक्सी मिल जाएगी, लेकिन कल नहीं मिलेगी। हमने पूछा ऐसा क्यों ? तो उसने कहा, “आप लोग पहले आज घूम आइए और फिर लौटने के बाद कल के बारे में बात करेंगे।” फिर उसने हमें तसल्ली दी कि कल के लिए कुछ न कुछ इंतजाम हो जाएगा। फिर बाहर आकर हमने टैक्सी ली। टैक्सी वाले ने कहा कि हम तीन घंटे बाद आपको वापस लेने यहीं आ जाएँगे। हमने कहा कि हमें चार घंटे कम से कम चाहिए। पुराने येरूशलम के लिए सबसे पहले पुराना दरवाजा आता है, जैसे कि आगरा का फ़तेहपुर सीकरी। चारों तरफ किलानुमा भारी मजबूत दीवारें थीं।
सड़क के दोनों तरफ बाज़ार लगा हुआ था। वहाँ छोटी-छोटी दुकानें बहुत सुंदर लग रही थीं। वहाँ नक्काशी की हुई वस्तुएँ बिक रही थीं, जैसे कि भारत के पुरानी दिल्ली में सड़क पर बैठकर फेरीवाले चीज़ें बेचते हैं। हमें वहाँ ऐसा लगा कि जैसे अल्लादीन के चिराग की कहानियों में होता है। कालीन पर बैठकर उड़ जाने वाली कहानियाँ याद आने लगीं। किले के बाहर सड़क के दोनों तरफ ताड़ के पेड़ लगे हुए थे। पुराने येरूशलम में कई दरवाज़े थे। टैक्सी वाले ने हमें एक दरवाज़े से बाज़ार तक छोड़ दिया।
टैक्सी से बाहर आते ही देखकर ऐसा लगा की हम किसी पवित्र ऐतिहासिक बाज़ार में पहुँच गए। टैक्सी वाले ने बताया कि कल यहाँ इस यहूदी शहर में शनिवार के दिन कोई भी टैक्सी नहीं चलाएगा और यहूदी लोग अपना मुहल्ला भी बंद कर देते हैं। उसने कहा कि आज जुमे का दिन है तो तुमलोग बाज़ार घूमने के बाद साढ़े छह बजे ‘वेलिंग वॉल’ देखने के लिए अवश्य पहुँच जाना। वह यहूदियों का एक पूजा स्थल है। हमने खुले हुए बाज़ार में से लकड़ी की नक्काशी वाला शतरंज का एक बॉक्स खरीदा और साथ ही सीप से जड़ा हुआ एक खूबसूरत तोहफ़ा इस प्रसिद्ध शहर की निशानी के तौर पर लिया।
दुकानदारों की कद-काठी लम्बी थी, उन्होंने दाढ़ी रख रखी थी और उनका पहनावा पारम्परिक अरबियों का था। उनका कुर्ता लम्बा, ढीला और पूरी आस्तीन का था। उन्होंने गोल टोपी पहन रखी थी। वे मुझे रबिन्द्र नाथ टैगोर के काबुली वाले की याद दिला रहे थे। मेरे मन में बहुत जिज्ञासा हो रही थी कि उनसे उनके बारे में और बातें करूँ। लेकिन भाषा की वजह से कठिनाई आ रही थी। वे हिन्दी या अंग्रेजी नहीं समझ पाते थे और मैं उनकी अरबी भाषा या हिब्रू नहीं जानती थी।
डॉ. वर्मा ने तोहफों की खरीदारी के पैसे जेब से निकाल कर दिए तथा हमेशा की तरह दुकानदारों के साथ फोटो खींची। दुकानदार डॉ. वर्मा को अरबी समझकर उनसे अरबी भाषा में बात करने लगे। उन्होंने कहा कि मैं इंडी (इंडियन) हूँ। मैं हिन्दी और उर्दू बोलता हूँ। दुकानदारों ने मुस्कराकर शुक्रिया अदा किया और शाबाश कहा। अब हम ‘वेलिंग वॉल’ की तरफ चलने लगे थे। रास्ते में हम कॉफी पीने के लिए रुके। मैंने ‘एस्प्रेसो कॉफी’ का ऑर्डर दिया तथा डॉ. वर्मा ने कैपेचिनो। जब मेरी कॉफ़ी आई तो उसे देखकर मैं उदास हो गई क्योंकि वह एक छोटे से कप में बिना दूध के कॉफ़ी बनी हुई थी और डॉ. वर्मा के प्याले दूध के झाग वाली स्वादिष्ट कॉफ़ी थी। वे मेरे मन की बात समझ गए और उन्होंने अपने जैसी कॉफ़ी कैपेचिनो का ऑर्डर कर दिया। अतः उन्होंने दो प्याले दो तरह की कॉफ़ी के पिए।
अब लगभग साढ़े छह बजने वाले थे।  ‘वेलिंग वॉल’ पर पूजा करने के लिए लोग इकट्ठे हो रहे थे। परिवारों को एकसाथ आता देख दृश्य बड़ा ही मनमोहक लग रहा था। पिता अपने बेटे का हाथ पकड़े हुए, काले लम्बे कोट एवं काले ऊँचे हैट पहने हुए चले जा रहे थे। वह जुमे का दिन था और ‘वेलिंग वॉल’ से जुड़ी हुई गोल्डेन मस्जिद से अज़ान की आवाज़ आने लगी। ‘वेलिंग वॉल पर लोग हिल-हिलकर प्रार्थना कर थे तथा ‘वेलिंग वॉल’ में अपने जेब से पर्चा निकालकर दीवार में रख रहे थे।
कुछ यहूदी आदमियों ने अपने सिर पर छोटी सी गोल टोपी पहन रखी थी। अधिकतर महिलाओं ने काले रंग के कपड़े पहने हुए थे। अबतक शाम के पौने सात बज चुके थे और दाईं तरफ के चर्च की घंटियाँ बजने लगी थीं। हम दोनों पति-पत्नी उस दृश्य के हर एकपल को जीना चाहते थे। उस दिन पूर्णिमा की रात थी। चाँद अपने पूरे भव्य स्वरूप में चाँदनी में नहाया हुआ दिख रहा था। वह आलौकिक दृश्य हमदोनों को सम्मोहित कर रहा था और हमें यह अनुभूति हो रही थी कि सभी धर्म एक समान हैं। मैं आँखें बंद किए हुए कुछ देर तक वहीं खड़ी उस पल को जीती रही। 
इज़राइल में यहूदी, फिलिस्तीन एवं इसाई धर्म के लोग रहते हैं। तीनों ही धर्मों की यह पवित्र नगरी है। विश्व का यह ऐतिहासिक, जीवंत एवं उत्तेजक शहर है। यहाँ के लोग नियम पूर्वक अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं। इन धर्म संबंधी वार्तालाप करते हुए हमदोनों उसी टैक्सी से अपने होटल वापस पहुँचे। अगले दिन के प्रोग्राम के बारे में हमने इस टैक्सी वाले से बात की थी। हमें समझ नहीं आ रहा था कि वह यहूदी है, फिलिस्तीनी है या फिर क्रिश्चन…? हमारे पूछने पर उसने बताया कि कल वह टैक्सी नहीं चलाएगा क्योंकि कल का दिन आराम का दिन है। तब हम समझ गए….। होटल में हमारे रिसेप्शन पर सुबह वाला आदमी ही खड़ा मिला। आते ही उसने कहा कि आप लोग अपने कमरे में जाइए, मैं आपसे फोन पर बात करूँगा। कमरे में पहुँचने के तुरंत बाद ही उसका फोन आ गया। उसने पूछा कि आपलोग कल कहाँ घूमने जाना चाहते हैं ? तो हमने बताया कि हमलोग ‘बेथलिहेम’ (जीसस क्राइस्ट का जन्म स्थल) जाना चाहेंगे, साथ ही हम नज़रथ, गाज़ा, सिटी ऑफ़ डेविड एवं डेड सी देखना चाहेंगे।
उसने पूछा क्या आप क्रिश्चन हैं ? फिर उसने कहा कि ये सभी चीजें तो इज़राइल के संग्रहालय में देखी जा सकती हैं। हमने कहा कि हम दो दिन और यहाँ रुकेंगे, इसीलिए ये स्थान हम स्वयं जाकर अपनी आँखों से देखना चाहेंगे। तब उसने कहा कि कल शनिवार होने के कारण यहाँ सब कुछ बंद रहेगा। जिन स्थानों का ज़िक्र आपने किया है, वे सभी कल खुले रहेंगे और आप देख सकेंगे क्योंकि वे सभी स्थान फिलिस्तीनी क्षेत्र में आते हैं। उसने हमें यह भी कहा कि कल वापस लौटने से पहले गर्म खाना भी उसी क्षेत्र से खाकर आना, क्योंकि इस शेरेटन होटल में कल गर्म खाना नहीं मिलेगा।
वह बड़े गोपनीय तरीके से अपनी बात कह रहा था, लेकिन हमें उसकी बातें विश्वसनीय लगी। डॉ. वर्मा ने कहा मुझे मालूम है कि कल यहाँ टैक्सी नहीं मिलेगी लेकिन आप हमारे लिए इन दर्शनीय स्थलों को देखने की कुछ व्यवस्था कर दीजिए। उसने कहा कि कल सुबह छह बजे एक प्राइवेट कार आपको लेने के लिए आएगी। आप छह बजे रेस्टोरेंट में नाश्ता करने के बाद ऊपर रिसेप्शन में आ जाना। रेस्टोरेंट सुबह छह बजे से पहले नहीं खुलता। उसने कहा कि ड्राइवर का नाम मुनीर होगा। वह एक फिलिस्तीनी है और वह होटल के अंदर नहीं आ सकेगा। 
अगली सुबह हम नाश्ता करने के बाद रिसेप्शन में आ गए और बाहर देखने लगे कि कार आ गई क्या..? तभी एक लंबे, आकर्षक एवं पढ़े-लिखे स्मार्ट नौजवान ने आकर इंग्लिश में पूछा कि क्या आप ही डॉक्टर वर्मा हैं…? फिर वह हमें अपनी एक सफ़ेद बड़ी मर्सडीज़ की तरफ ले गया और दरवाज़ा खोलकर बिठाया। कार अंदर हल्के नारंगी रंग के कवर से ढकी हुई थी। कार बहुत सुंदर थी। हमने अपने पासपोर्ट अपने हैंड बैग में रखे हुए थे। जो बातें हमने उस रिसेप्शन वाले व्यक्ति को फोन पर बताई थी, मुनीर ने उन्हीं बातों को दुहराया और कहा कि हम यहाँ-यहाँ क्रम से घूमने चलेंगे। उसने पूछा कि क्या तुमलोग क्रिश्चन हो या अरब हो…? मैंने कहा नहीं…! हमलोग भारत के रहने वाले हैं और हिन्दू हैं। तब उसने सहसा पूछा कि आपका पासपोर्ट तो ब्रिटिश है…? तब डॉ. वर्मा ने बताया कि हमलोग इंग्लैंड में रहते हैं। कार शुरू करने से पहले उसने हमसे पूछा कि आप सबसे पहले बर्थ प्लेस ऑफ़ क्राइस्ट क्यों देखना चाहते हैं..? तो हमने उसे बताया कि हम ये सब चीजें केवल टूरिस्ट की नज़र से देखना चाहते हैं। थोड़ा सशंकित मन से मैंने उसे यह भी बताया कि हमारे करीबन बीस साथी आज शाम को इंग्लैंड से यहाँ पहुँच जाएँगे। हम आज शाम को वापस लौटकर अपने अन्य साथी डॉक्टरों को मिलेंगे। बातचीत के दौरान मैंने मुनीर से पूछा कि आप इतनी अच्छी इंग्लिश कैसे जानते हो..?
तब मुनीर ने अमेरिकन एक्सेंट में बताया कि मैं कैलिफोर्निया से पढ़कर आया हूँ। मैं इम्पोर्टेंट लोगों को इज़राइल घुमाता हूँ। उसने कहा कि विदेशों में हमारे देश के बारे में लोग बहुत कम जानते हैं। मैं इस काम को करते हुए गौरवान्वित महसूस करता हूँ। हमें घुमाने ले जाते वक्त उसने कहा कि सबसे पहले मैं आपलोगों को होली लैंड (चर्च ऑफ़ नेटिविटी) लेकर चलूँगा। यह एक पुराना चर्च है। यह ‘बेथलिहेम’ में स्थित है, जो जीसस का जन्म स्थान है। बातों-बातों में हमलोग एक बड़े से गेट के पास पहुँच गए। उसने कहा कि मैं इस गेट के इस तरफ रुकूँगा और जब आपलोग चर्च देखकर वापस आओगे तब मैं आपको चर्च की दूसरी तरफ खड़ा मिलूँगा। अब हमने देखा कि गेट के उस तरफ कुछ बच्चे खेल रहे हैं। उनके वाह्य आवरण को देखकर प्रतीत होता था कि वे अत्यंत गरीब हैं। हमने बड़े अचरज से मुनीर से पूछा कि क्या यह येरूशलम ही है…? तब उसने कहा कि हाँ, यह येरुसलम ही है और यह फिलिस्तीन का इलाका है, जहाँ गेट के उस तरफ सिर्फ फिलिस्तीनी रहते हैं, जिन्हें गेट के इस तरफ आना वर्जित है। अब आपलोग गेट के उसतरफ चले जाओ, वहाँ से एक गाइड आपको चर्च दिखाने ले जाएगा। जैसे ही मुनीर ने अपनी बात पूरी की, तभी एक नीले रंग की धारी वाला सूट पहने हुए, चमकदार पौलिश्ड जूते एवं टाई पहने हुए एक आदमी ने हमें कहा कि आप मेरे साथ आइए। बिना कुछ कहे वह हमारे कदम से चाल मिलाता हुआ हमारे आगे चल रहा था। मैंने उससे उसका नाम पूछा, तब उसने अपना क्रिश्चन नाम बताया और कहा कि हम पीछे के दरवाजे से चर्च में जाएँगे क्योंकि आगे बहुत से यात्रियों की भीड़ है। वे सभी अमेरिका, रूस, अफ्रीका और यूरोप के विभिन्न देशों से तीर्थ यात्रा पर आए हुए हैं। वे लोग सामने के दरवाजे से ही चर्च में जाएँगे।
हमने देखा कि कुछ यात्री अपनी भाषा में भक्ति पूर्वक भाव विभोर होकर झूमते हुए प्रार्थना के भजन गा रहे थे। चारों तरफ शांति का वातावरण था। केवल उनके भजनों की ही आवाज़ आ रही थी। गाइड हमें पीछे के छोटे से दरवाजे से सीढ़ियों से नीचे ले गया। वहाँ जाकर हमने देखा कि कमरे में मोमबत्तियाँ जल रही थी और हम उस चाँदी के सितारे के सामने खड़े थे। मैंने सबसे पहले हाथ जोड़े और फिर झुककर सितारे को अपने हथेली से छुआ। उसे छूते ही मेरा रोम-रोम पुलकित हो उठा। हमदोनों ने झुककर वहाँ प्रणाम किया। यह आलौकिक क्षण हमें भावुक कर रहा था। हमें पता ही नहीं चला कि हम कबतक वहाँ खड़े रहें और सितारे को निहारते रहें। फिर गाइड ने हमें कहा कि अब हमें चलना चाहिए। आते वक्त वह हमें सामने के दरवाजे से चर्च दिखाता हुआ लाया। हमलोग अब भी उसी दिव्य ज्योति की आलोक में थे। बाहर आते ही हमने चर्च की दूसरी तरफ देखा कि मुनीर अपनी कार के पास खड़ा हुआ मुस्कुरा रहा है। मुनीर ने उस वक्त सफेद ट्राउज़र एवं पीले-नारंगी रंग की जर्सी पहनी हुई थी। कार का दरवाज़ा खोलते हुए उसने कहा कि आपलोगों को यहाँ चर्च में अच्छा लगा होगा। उसने कहा कि अब हम आगे चलकर रेस्टोरेंट में गर्म खाना खाएँगे। मैंने उससे कहा कि मैं क्रूसी फिक्शन, नज़रथ, गाज़ा और डेड सी देखना चाहूँगी। डॉ. वर्मा जेरूसलेम के अपने इस ट्रिप से बेहद संतुष्ट थे और धीरे से बोले  क्या तुम सिटी ऑफ़ डेविड और माउन्ट ऑफ़ ऑलिव्स नहीं देखोगी…? यह सुनकर मुनीर ने कहा मैं आपको ये सभी जगह बाहर से दिखाता चलूँगा। डॉ. वर्मा ने अचानक ही मुझसे पूछा कि तुम गाज़ा क्यों जाना चाहती हो..? वहाँ तो हमेशा लड़ाइयाँ होती रहती हैं। मेरे बदले उत्तर मुनीर ने दिया कि आपलोग एक फिलिस्तीनी के साथ हैं और आपको डरने की ज़रूरत नहीं है। लंच के बाद वह हमें सभी दर्शनीय स्थान दिखता हुआ डेड सी पर ले गया। मैंने इस जगह के बारे में सुना था कि यहाँ समंदर में कमर के बल लेटकर तरते हुए, किताब पढ़ सकते हैं। उसी का अनुभव करने के लिए मैं समंदर में तैरने के लिए उतरी। किताब पढ़कर देखने के बाद काले रंग का मड अपने हाथों पर लगाया और कुछ समय बाद उसे धोने पर मेरी त्वचा सुंदर और नर्म हो गई। वेस्ट बैंक वाला यह समंदर अपने-आप में अद्भुत है। ऐसा पूरी दुनिया में कहीं भी नहीं है। इसीलिए इसे ‘फ्लोटिंग सी’ भी कहते हैं। इस जगह का विवरण बाइबल में भी आया है। अब मुनीर ने हमें कहा कि यदि आप चाहें तो मैं  आपको कॉस्मेटिक फैक्ट्री में ले जा सकता हूँ, जो यहाँ पास में ही है। हमने उससे कहा कि बेशक हम वहाँ चलेंगे, लेकिन केवल देखने के लिए।  कॉस्मेटिक फैक्ट्री में जाकर हमने देखा कि कितने ही तरह के शारीरिक सज्जा के सामान वहाँ उपलब्ध हैं। जैसे कि साबुन, चेहरे पर लगाने वाला मास्क, नहाने के लिए सी सॉल्ट, हैंड वॉश इत्यादि। इस फैक्ट्री से मैंने कई वस्तुएँ अपने मित्रों और परिवार को उपहार देने के लिए खरदी। जब हम बाहर वापस आए तो मुनीर ने कहा कि आपलोग बैठिए मैं अभी पाँच मिनट में वापस आता हूँ। उसने लौटने पर जेब में से डॉलर्स निकलकर डॉ. वर्मा की ओर बढ़ाते हुए कहा कि ये आपके डॉलर्स हैं। यह सुनकर डॉ. वर्मा ने आश्चर्यचकित होकर कहा कि नहीं ये डॉलर्स मेरे नहीं हैं, मैंने तो डेबिट कार्ड से पेमेंट किया है। इसपर मुनीर ने कहा कि दुकान वाले ने मुझे कमीशन दिया है, क्योंकि मिसिज़ वर्मा ने उससे बहुत सारी चीजें खरीदी हैं। डॉ. वर्मा ने कहा कि फिर तो यह कमीशन तुम्हारा है, क्योंकि तुम ही  हमें दुकान पर लेकर आए थे। उसने समझौता करना चाहा और कहा कि ठीक है हम इस पैसे को आधा-आधा बाँट लेते हैं। उसकी ईमानदारी देखकर हमदोनों के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और हमदोनों ने एकसाथ कहा कि ये पैसे तुमने कमाए हैं, इसे तुम अपने पास ही रखो। मुनीर ने सलाम कर शुक्रिया अदा किया। 
रास्ते में माउन्ट ऑफ़ ऑलिश, सिटी ऑफ़ डेविड एवं हिब्रू भाषा अकादमी बाहर से दिखता हुआ वह बोला कि कल एक दिन और आपलोग यहाँ हैं, इसलिए इज़राइल का संग्रहालय अवश्य देखना। आगे चलकर उसने एक छोटे से ढाबे में शाकाहारी खाना नान ब्रेड के साथ करवाया और फिर हमने गर्म कॉफ़ी पी, जिसे पीकर हमारी दिनभर की थकान मिट गई। उसने शैरेटन होटल में आकर हमें बाहर उतारा और बहुत आत्मीयता के साथ डॉ. वर्मा से हाथ मिलाया फिर हमदोनों को सलाम कर जाते वक्त बोला कि शायद हम ज़िंदगी में फिर कभी नहीं मिल पाएँगे, लेकिन आपलोग हमेशा मेरी यादों में रहेंगे। 
नॉटिंघम एशियन आर्ट्स काउंसिल की निदेशक एवं काव्य रंग की अध्यक्ष. वरिष्ठ लेखिका. संपर्क - jaiverma777@yahoo.co.uk

1 टिप्पणी

  1. Wow ….
    Jai
    Awesome storey teller you are…I almost read it in
    one breath !!

    Your own personal internalisations and spiritual experiences from time to time during the journey …
    One gets glimpses of
    An intense receptivity you and dear Mahi had…

    God Power can only be experienced when we travel beyond our body

    The Creator sends all our souls to earth but only a few of us are blessed with this urge to find God..

    We become seekers, the journey of purification of our souls continues from birth to births … until
    Atma (soul) merges back in Parmatma (Almighty)

    This is the essence of our being .. ,, ..

    You both been such advanced souls were indeed
    blessed to experience and live GOD together

    I congratulate you
    Jyoti Ahuja

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