कश्मीर में बहुत सी पुरानी इमारतें हैं कुछ ऐसी इमारतें हैं जिनकी स्थिति अच्छी है और कुछ ऐसी इमारतें हैं जिनकी स्थिति गड़बड़ा गई है।
कुछ तो ऐसी है जिनकी हालत खराब है और कुछ ऐसी है कि जो जमीन में धस चुकी है। कुछ की मरम्मत हो चुकी है। कुछ इमारतें बहुत ही मजबूत है जो अब तक टिकी हुई है।
इन इमारत को देखकर अंदाजा लगाया जाता है कि कश्मीर के कारीगर कितने गुणी थे। इन इमारतों को बनाने के लिए जो भी साजो- समान की जरूरत होती है वह कश्मीर में ही मिलता है।
कश्मीर के कारीगर दूसरे मुल्कों में भी मशहूर है। इस बात को भी झूठला नहीं सकते कि इन इमारत की शोभा बढ़ाने के लिए बाहर से भी कारीगर बुलाए जाते हैं। दूसरे मुल्कों से आए कारीगरों ने भी कश्मीर के कारीगरों के हुनर को मना है।
पुराने जमाने के खंडहरो को “असारे कालिमा “कहा जाता है! इन इमारत की देखभाल के लिए राज्य सरकार ने एक सरकारी महकमा बन के रखा है जो इनका ख्याल रखता है।
यह “महकमा “कश्मीर राज्य में पाए जाने वाले बागों ओर इमारतों , खंडहरों , जियारतों की देखभाल करता है।


पुरानी इमारत अपने वक़्त को बया कर जाती है एक कहानी बता देती है
जी मोनिका जी
मुक्ति जी! आपके माध्यम से कश्मीर को काफी कुछ जान गये। वहाँ के कारीगर और उनकी कारीगरी अद्भुत और अनोखी है। लोग दिखाई देने वाले सौंदर्य पर नजर रखते हैं, उसकी प्रशंसा भी करते हैं लेकिन उस सौंदर्य का निर्माण जिन हाथों से, जिस कौशल से हुआ है उन्हें कोई नहीं पूछता! निश्चित रूप से कश्मीर भारत का स्वर्ग है! इस लेग के माध्यम से कश्मीर दर्शन के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई।
बहुत बहुत आभार जी, इमारतें बहुत कुछ बयां करती हैं।
बहुत सुंदर जानकारी देता आलेख मुक्ति जी।जो.हमारी धरती का.स्वर्ग कहा जाता था और जहां प्रकृति के.सुंदर नजारे.मनमोहक होते थे।बाद में आतंकवाद की.वजह से हमने लंबे समय तक वहां पर्यटन के.विषय में सोचा भी नहीं.लेकिन उस काश्मीर को.देखने समझने की ललक अब भी बाकी है।आपके.माध्यम से बहुत कुछ जाना,वहां की.संस्कृति, कला,कारीगरी और इमारतों के.विषय में।जानकर बहुत अच्छा लगा।सारगर्भित, सार्थक आलेख के.लिए बहुत बहुत बधाई।
बहुत बहुत आभार जी बिल्कुल