एक दिन ही क्यों ?
चौदह सितंबर हिंदी दिवस है,
हिंदी भाषा को सिंहासन पर
बैठाने का दिवस है।
एकत्रित कर हिंदी भक्तों को हमने,
समारोह आयोजित अनेक किए हमने।
आराध्या बना उसे, पूजन किया हम सबने।
ऊंचे ऊँचे नारों से जयकार किया हम सबने
गीतों भजनों से किया उसका वंदन हम सबने।
शब्दों के मंहगे गहनों से
किया उसे सुसज्जित हमने
विशेषणों के आकर्षक वसनों से
रूप निखारा और सजाया तन उसका हमने।
पुष्पमालाएं पहना सम्मान किया उसका हमने।
सिंहासन पर हो विराजमान हिंदी
लग रही अनिंद्य सुंदरी महारानी सी।
चारों ओर मानो बज रही दुंदुभी उसकी,
अन्य भाषाएँ जैसे कर रही चाकरी उसकी।
चरण प्रक्षालन कर, भाल पे तिलक लगाया,
हाथ जोड़ कर्तव्यपालन का दायित्व निभाया।
बीत गया विश्व हिंदी दिवस ।
ख़त्म हुआ मना एक दिन खेल तमाशा,
फिर भले बिसरा दें पूरा वर्ष अपनी भाषा।
कहते रहे हिंदी हमारी है मातृभाषा
और है राष्ट्रभाषा।
क्या सचमुच है यह सोच तुम्हारी ?
या बस कहते रहने की लाचारी।
कैसा छलावा है यह !
क्या पूरी निष्ठा है यह ?
या केवल एक दिखावा है यह?
विडंबना नहीं तो यह और क्या है
दोहरा आचरण नहीं तो और क्या है ।
रोज बदलती रहतीं मान्यताएं हमारी,
अवसर देख बदलती प्राथमिकता हमारी।
क्यों छोड़ समृद्ध और शक्तिशाली हिंदी भाषा
हावी रहती है हम पर सदा अंग्रेज़ी भाषा।
मत दो स्वयं को धोखा,अंतरात्मा की सुनो
निर्मल, स्वच्छ मन से हिंदी भाषा को गुनो ।
माँ सरस्वती प्रदत्त वरदान है, स्वीकार करो
हिंदी के प्रति प्रेम जगा कर नई पीढ़ी को सचेत करो ।
आदर करें अन्य भाषाओं का,पर अपनी भाषा पर गर्व करें ।
एक दिवस ही नहीं, तीन सौ पैंसठ दिन हिंदी का गुणगान करें ।
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हाइकु की भाँति तांका जापानी पद्धति का छंद है। इसमें पांच पंक्तियाँ होती है। पहली और तीसरी पंक्ति में पाँच वर्ण तथा दूसरी, चौथी व पांचवी में सात वर्ण होते हैं ।
तांका छंद
हिंदी दिवस,
मचा रहा है धूम,
फहरा रहा,
परचम विश्व में
हिंदी भाषा का झूम।
(2)
हिंदी भाषा है
मातृभाषा हमारी,
गर्व हमें है,
भाषाओं में अग्रणी,
लोकप्रिय विश्व में।
(3)
आइये हम,
संकल्प करें मिल,
संविधान में,
राजभाषा से हिंदी,
बने राष्ट्र की भाषा।
(4)
पूरे विश्व में,
शान बढ़ी हिंदी की,
जिधर देखो,
हो रहे आयोजन,
हिंदी की जय कार।
(5)
एक गुहार,
अपने ही देश में,
हिंदी भाषा का,
करें हम सत्कार,
लायें व्यवहार में।
- अन्नदा पाटनी
मैरीलैंड अमेरिका

वाह ,दिल ख़ुश हुआ ,,आपकी हिंदी भाषा पर केंद्रित रचनाओं को देखकर ,, ख़ास तौर पर हाइकु !
हिन्दी भाषा को समर्पित बहुत सुंदर रचनाएँ ॥