युवा शक्ति
सूरज जैसा तेज पुंज लेकर यह चलते
भारत के युवा होते बहुत शक्तिशाली
विभाजन का स्वप्न में भी नहीं सोचते
युवा शक्ति नहीं आलसी न बैठें खाली
सराबोर ये हैं अद्भुत इच्छा शक्ति से
खुले इनके सामने रहते अनंत विकल्प
देश भक्ति की भावना से हैं ओत-प्रोत
आगे बढ़ रहे लेके परिश्रम का संकल्प
युवाओं के लिये कुछ भी नहीं असंभव
जीवन में ये सफल होकर दिखलायेंगे
चंचल होते पर ह्रदय सदाचार से पूर्ण
सफलता पाने को हद से गुजर जायेंगे
नये भारत का निर्माण करेंगे यह युवा
नई क्रांति लाकर युवाओं में भरें जोश
विकास रथ के सारथी ये हैं कहलाते
विपरीत परिस्थिति में नहीं खोते होश
युवा शक्ति बात करती राष्ट्रीय हित की
कभी नहीं भूलते ये भारत का इतिहास
समाज में देते हैं विश्व बंधुत्व का संदेश
अंदाज़े बयां भी युवाओं का होता खास
बहुत आग है सभी युवाओं के दिलों में
मौका आने पर युवा बन जाते चिंगारी
भेदभाव और भ्रष्टाचार का करें विरोध
देशहित के लिये संघर्ष इनका है जारी
नये भारत के नव निर्माता होते यह युवा
हर युग में युवा बनता विकास की सूरत
वीरत्व की पराकाष्ठा झलकती युवाओं में
युवा शक्ति ही है अदम्य साहस की मूरत
विडंबना है कि कुछ युवा आज भटक रहे
फंस गये इंटरनेट इन्स्टाग्राम के जाल में
ड्रग्स और नशे के शिकार हो रहे हैं युवक
अज्ञानतावश फंसते जा रहे हैं जंजाल में
युवा शक्ति हमारे राष्ट्र की असली पूंजी है
मेहनत से देश का भविष्य बदल सकते हैं
युवाओं को सपने साकार करना सिखायें
सबका कर्तव्य है इनको नई दिशा दिखायें
भारतीय नारी
नारी होती सभी के जीवन की छाया
आदि काल से हर युग में ये पूजित
मां बन के प्राणी को नव अंकुर देती
नारी हमारे जीवन को कर दे ऊर्जित
नारी में संचित घर घर की मर्यादायें
इसके स्वरूप में दिखती प्रेमल माया
दुःख सुख़ हरेक पल में साथ निभाये
नारी है ममत्व का अति सुंदर साया
नारी करती है जीवन को परिभाषित
नारी जोडती सभीके दिलों का बंधन
देती है सभीको खुशियों का नजराना
पोषित करती रहती प्रेम का प्रबंधन
इसमें संघर्षों का सागर रहे समाहित
नारियों में पल्लवित आस्था विश्वास
हरेक परिवार का यही मजबूत आधार
नारी ही टूटती हुई उम्मीदों की आस
आज नारी घर बाहर दोनों हैं संभालें
नारी कभी भी नहीं होती है कमज़ोर
आज है कंधे से कंधा मिला बढ़ रही
हाथों में रख घर को चलाने की डोर
नारी शक्ति को सभी पूजनीय समझें
यही लगाती जीवन की नैया को पार
नर नारी दोनों शिवशक्ति का स्वरूप
नारी में ही निहित हौसलों का भंडार
नारी उठाती ज़िम्मेदारियों का बोझा
दुःखों को है ख़ुशी से वह बाँट लेती
नारी मानवता की इकलौती पहचान
वह जीवन बिन शिकायत काट लेती
नारियां हैं स्नेह और त्याग की मूर्ति
नारी है प्रकृति का ईश्वरीय चमत्कार
महिला दिवस को सार्थक बनायें सब
कभी न करो नारी अस्मिता पर वार
मेरी दादी
पापा मम्मी की डांट फटकारों से
हमारी दादी माँ ही तो है बचातीं
रोज-रोज़ ढेर सारे वादे करके वो
सबकी दादी मायें ही हैं निभातीं
पापा जो कुछ भी हैं कहते सुनते
वो प्यार से समझा देती दादी-माँ
चुन्नू मुन्नू डर कर हैं भाग जाते
आवाज़ लगा बुला लेती दादी माँ
चश्मा माथे पर लगा भूल जाती
जमके दादी माँ कोहराम मचातीं
बाद में याद आने पर भूल गई
कह कर हमारी दादी माँ हँसाती
गरम-गरम जलेबियाँ बनाकर वे
कभी-कभी दादी हमको खिलातीं
रोज़ सोने से पहले हम सब को
दादी धार्मिक कथायें हमें सुनातीं
जब पापा कभी-कभी डांट देते हैं
भौहें चढ़ा लेतीं हैं मेरी दादी माँ
सभीकी सिट्टी-पिट्टी गुम होती
ऐसा रोब जमाती देतीं दादी माँ
आजकल दादी चुप सी रहतीं हैं
पता नहीं ये अजीब सी है बात
शायद अकेलापन उन्हें खा रहा
उन्हें लगता कोई नहीं है साथ
माता पिता दिन में व्यस्त रहते
नौकरी से लौटते दोनों शाम को
इसीलिये समय नहीं मिल पाता
थक लेट जाते दोनों आराम को
दादी का हमको ख्याल ना आता
हम सभी काम में व्यस्त हो गये
दादी को लगता वो हो गईं अकेले
बाकी सभी अपने में मस्त हो गये
दादी को अकेला महसूस न होने दें
उनके साथ हम सब समय बितायें
दादी के साथ पल दो पल बैठ कर
उनके सूने मन में खुशियाँ लौटायें
- कृष्ण कुमार गुप्ता, पुणे,महाराष्ट्र।

उम्दा और पाठकों को विभिन्न आयामों से समृद्ध करती रचनाएं।
हार्दिक शुभकामनाएं।