संपादकीय : परम्परा पर इरादों की जीत 1
साभार : BCCI

अजिंक्य रहाणे और रवि शास्त्री का योगदान तो सतह पर दिखाई देता ही है। मगर इस जीत में राहुल द्रविड़ की भूमिका की तारीफ़ हर ऑस्ट्रेलियाई समाचार पत्र में हो रही है। सभी ओर एक ही माँग उठ रही है कि राहुल द्रविड़ को ऑस्ट्रेलिया का मुख्य कोच बनाया जाए। चौथे टेस्ट के सभी हीरो अण्डर-19 में खेल चुके हैं और उन सबको तैयार किया है राहुल द्रविड़ ने। एक बात साफ़ हो गयी कि यदि किसी टीम की बेंच-स्ट्रेंग्थ मज़बूत है तो टीम कभी भी कोई भी मैच जीत सकती है। इस बेंच-स्ट्रेंग्थ के लिये राहुल द्रविड़ को सलाम!

जब भारत और आस्ट्रेलिया का तीसरा टेस्ट मैच चल रहा था तो आस्ट्रेलिया के कप्तान एवं विकेटकीपर टिम पेन ने रवीचन्द्रन अश्विन को तंज़ करते हुए फ़िक्रा कसा था, “गाबा के लिये अब इन्तज़ार नहीं हो पा रहा।” इस पर अश्विन ने मुक़ाबले की चोट करते हुए जवाब दिया था, “तुम्हें इण्डिया में देखेंगे। शायद वो तुम्हारी अंतिम सीरीज़ होगी।” इस जुमलेबाज़ी के बाद टिम पेन ने ख़राब विकेटकीपिंग का प्रदर्शन करते हुए कई कैच भी छोड़े।
ब्रिस्बेन के क्रिकेट ग्राउण्ड गाबा में 1988 के बाद इस मैच तक आस्ट्रेलिया को विश्व की कोई क्रिकेट टीम हरा नहीं पाई। और चौथी पारी में 300 रन बना कर तो कोई टीम नहीं जीती। 
दरअसल भारत के दौरे पर चारों मैच ख़ासे उथल पुथल मचाते दिखाई दिये। पहले मैच में जब भारतीय टीम में सभी खिलाड़ी स्वस्थ थे भारतीय टीम दूसरी पारी में केवल 36 रन के योगदान पर सिमट गयी। यह टेस्ट मैचों में भारत का न्यूनतम स्कोर था। विराट कोहली की कप्तानी में भारत की यह सबसे बड़ी पराजय थी। 
अपने पिछले ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर भारतीय टीम ने चार मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-1 से जीत हासिल की थी। इस बार भी विराट कोहली एंड कंपनी यही सपने देख रही थी। मगर पहले टेस्ट के बाद हर किसी की ज़बान पर एक ही बात थी कि इस बार भारत का व्हाइट वॉश होने जा रहा है। 
पिछले दौरे पर भारत ने ऑस्ट्रेलिया को एडिलेड में सीरीज के पहले मैच में मात दी थी। इसके बाद पर्थ में हुए दूसरे टेस्ट में टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा था। पर्थ टेस्ट में कोहली ने शतक भी जड़ा था, मगर टीम हार गयी थी।  इसके बाद टीम इंडिया ने दमदार वापसी की और मेलबर्न टेस्ट जीतकर सीरीज़ अपने नाम कर ली थी। 
दूसरा मैच बॉक्सिंग डे मैच था यानि कि 26 दिसम्बर 2020 को खेला गया। इस बार भारतीय टीम ने शमी के स्थान पर मुहम्मद सिराज को खिलाया। यानि कि यह उनका डेब्यू मैच था। इस मैच में बूमरा और अश्विन ने घातक गेन्दबाज़ी करते हुए ऑस्ट्रेलिया को 195 रनों पर आउट कर दिखाया। कप्तान रहाणे के शतक और जडेजा के अर्धशतक के बदौलत भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 326 रन बना डाले।
यह वही टीम थी जो कि पहले मैच में 36 रनों पर सिमट गयी थी। दूसरी पारी में एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया की टीम 200 रनों में सिमट गयी। सिराज ने तीन और बूमरा, अश्विन व जडेजा ने दो दो विकटें चिटकाईं। अपनी चौथी पारी में भारत ने दो विकटों के नुक्सान पर 70 रन बना कर मैच को 8 विकटों से अपनी झोली में डाल लिया। 
अजिंक्य रहाणे ने इस मैच में कप्तानी पारी भी खेली और अपने कूल रवैये  का प्रदर्शन भी किया। कुछ कुछ धोनी की याद दिला दी। 
सिडनी के तीसरे टेस्ट में उमेश यादव भी चोटिल होने की वजह से खेल नहीं पाए। इस मैच में मुहम्मद सिराज के साथ साथ नवदीप सैनी को भी उतारा गया। अनुभवी बॉलर थे बूमरा एवं अश्विन। पहली पारी में जडेजा ने चार विकट लिये तो नवदीप सैनी और बूमरा ने दो दो विकट चिटकाए। ऑस्ट्रेलिया ने 348 रन बनाए। अब भारत की बारी थी। शुभमन गिल एवं चेतेश्वर पुजारा के अर्धशतकों की बदौलत भारत 244 रन बनाने में सफल रहा। यानि कि ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी के आधार पर 104 रनों की बढ़त।
आस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में 6 विकटों के नुक़्सान 312 रन बना कर पारी घोषित कर दी। यानि कि भारत को जीतने के लिये अपनी दूसरी पारी में 416 रन बनाने थे। रोहित शर्मा (52), चेतेश्वर पुजारा (77) और ऋषभ पन्त (97) ने मिल कर 131 ओवरों में 5 विकट पर 334 रन बना कर मैच को ड्रॉ करवा दिया। मगर इस मैच के असली हीरो रहे रामचन्द्र अश्विन और हनुमा विहारी। दोनों ने अपने शरीर पर चोटें सहते हुए 289 गेन्दों को झेला। 
चौथे मैच में भारत के पास ग्यारह खिलाड़ी तक उपलब्ध नहीं थे। अश्विन और बूमराह भी चोटिल थे। भारत के फ़्रण्टलाइन बॉलर थे – मुहम्मद सिराज, नवदीप सैनी, टी. नटराजन, शार्दुल ठाकुर, और वाशिंगटन सुन्दर। ऑस्ट्रेलिया के समाचारपत्र इसे भारत की बी-टीम कह कर मज़ाक उड़ा रहे थे। समस्या यह रही कि स्टार बैट्समैन रोहित शर्मा दोनों पारियों में चले। 
पहली पारी में अनुभवहीन बॉलिंग अटैक ने ऑस्ट्रेलिया को 369 रनों पर आउट किया। नटराजन, शार्दुल ठाकुर और वाशिंगटन सुन्दर ने तीन तीन विकटें चटकाईं। वाशिंगटन सुन्दर एवं शार्दुल ठाकुर के अर्धशतकों की बदौलत भारत अपनी पहली पारी में 336 रन बना सका। यानि कि ऑस्ट्रेलिया को 33 रनों की बढ़त मिली। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में मुहम्मद सिराज ने पाँच और शार्दुल ठाकुर ने 4 विकट चटकाए। और ऑस्ट्रेलिया कुल 294 रन बना पाया। अब दारोमदार था अंतिम दिन के खेल पर।
चेतेश्वर पुजारा ने 211 गेन्दों का सामना किया और 56 रन बनाए। वह एक दीवार की तरह खड़ा रहा और साफ़ दिखाई दे रहा था कि गेंदबाज़ उसे घायल करने का प्रयास कर रहे हैं। शुभमन गिल ने 146 गेन्दों में 91 रन का स्कोर किया। ऋषभ पन्त ने अपने जीवन के श्रेष्ठतम पारी खेलते हुए 138 गेन्दों में 89 रन बना डाले। वह अन्त तक नाबाद रहा। भारत 7 विकट पर 329 रन बना कर मैच और सीरीज़ जीत गया।
अजिंक्य रहाणे और रवि शास्त्री का योगदान तो सतह पर दिखाई देता ही है। मगर इस जीत में राहुल द्रविड़ की भूमिका की तारीफ़ हर ऑस्ट्रेलियाई समाचार पत्र में हो रही है। सभी ओर एक ही माँग उठ रही है कि राहुल द्रविड़ को ऑस्ट्रेलिया का मुख्य कोच बनाया जाए। चौथे टेस्ट के सभी हीरो अण्डर-19 में खेल चुके हैं और उन सबको तैयार किया है राहुल द्रविड़ ने। एक बात साफ़ हो गयी कि यदि किसी टीम की बेंच-स्ट्रेंग्थ मज़बूत है तो टीम कभी भी कोई भी मैच जीत सकती है। इस बेंच-स्ट्रेंग्थ के लिये राहुल द्रविड़ को सलाम!
तेजेंद्र शर्मा
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.

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