ज़िंदगी में गर मिले गम गवारा कीजिए,
कभी तनहाई में भी रातें गुजारा कीजिए।

बेशक देते हैं आईने सबको पता उम्र का,
फिर भी अपने जुल्फों को संवारा कीजिए।

दुश्मनी करे जो आपका बनकर दोस्त,
ऐसे मित्रों से आप तुरंत किनारा कीजिए।

क्या पता ये नसीब कल क्या गुल  खिलाए,
गरआपको जरूरत हो हमें पुकारा कीजिये।

यूं तो हमारी औलादों पर आयी है जवानी,
हमराज मेरे अब सलीके से इशारा कीजिए।

ज़रूरत होती हमसफ़र की दुर्गम राहों पर,
जो फ़िक करे उसका साथ गवारा कीजिए।

डॉ. तारा सिंह अंशुल
विभिन्न राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मानों से नवाजी़ गयी वरिष्ठ कवयित्री , लेखिका , कथाकार , समीक्षक , आर्टिकल लेखिका। आकाशवाणी व दूरदर्शन गोरखपुर , लखनऊ एवं दिल्ली में काव्य पाठ , परिचर्चा में सहभागिता। सामाजिक मुद्दे व महिला एवं बाल विकास के मुद्दों पर वार्ता, कविताएं व कहानियां एवं आलेख, देश विदेश के विभिन्न पत्रिकाओं एवं अखबारों में निरन्तर प्रकाशित। संपर्क - tarasinghcdpo@gmail.com

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