होमग़ज़ल एवं गीतआशा शैली की ग़ज़ल - साथ तू था न तेरा साया था ग़ज़ल एवं गीत आशा शैली की ग़ज़ल – साथ तू था न तेरा साया था By आशा शैली February 5, 2023 1 189 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp जिससे दामन बहुत बचाया था साथ उस ग़म ने ही निभाया था राज़ वह क्या करोगे तुम सुनकर दिल ने जो बारहा छुपाया था जिन्दगी इक भरम में गुज़री है साथ तू था न तेरा साया था मैं इबादत से बहल जाती हूँ यह नियम उम्र भर निभाया था सर को सजदे में उसके झुकने दे जिसके दर पे सुकून पाया था जीत पाये न हार ही पाये दांव यह किस तरह लगाया था उस पे फिर से यकीन क्यों शैली जिस से कल भी फरेब खाया था Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखसंपादकीय – बी.बी.सी. की चीनी कड़वी हो गईअगला लेखस्वर्ण ज्योति की कविता – ज़िंदगी…! आशा शैलीसंपर्क - [email protected] RELATED ARTICLES ग़ज़ल एवं गीत सोनिया अक्स सोनम की ग़ज़लें February 22, 2026 ग़ज़ल एवं गीत सुरेश कुमार ‘सौरभ’ अकवि की ग़ज़ल January 24, 2026 ग़ज़ल एवं गीत अमरेंद्र कुमार की ग़ज़लें December 13, 2025 1 टिप्पणी मेरी ग़ज़ल को स्थान देने के लिए आभार जवाब दें कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest संपादकीय – पैसे निकालने की जादुई मशीन February 28, 2026 नरेंद्र कौर छाबड़ा की कविता – नदी की व्यथा February 22, 2026 रेखा श्रीवास्तव का लेख – वर्चुअल ऑटिज्म ! February 22, 2026 प्रो. प्रवीण कुमार अंशुमान का लेख – घातक सिद्ध हो सकती है जाति आधारित ध्रुवीकरण के बीच संवाद-शून्यता February 22, 2026 और अधिक लोड करें
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