होमग़ज़ल एवं गीतआशा शैली की ग़ज़ल - साथ तू था न तेरा साया था ग़ज़ल एवं गीत आशा शैली की ग़ज़ल – साथ तू था न तेरा साया था By आशा शैली February 5, 2023 1 246 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp जिससे दामन बहुत बचाया था साथ उस ग़म ने ही निभाया था राज़ वह क्या करोगे तुम सुनकर दिल ने जो बारहा छुपाया था जिन्दगी इक भरम में गुज़री है साथ तू था न तेरा साया था मैं इबादत से बहल जाती हूँ यह नियम उम्र भर निभाया था सर को सजदे में उसके झुकने दे जिसके दर पे सुकून पाया था जीत पाये न हार ही पाये दांव यह किस तरह लगाया था उस पे फिर से यकीन क्यों शैली जिस से कल भी फरेब खाया था Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखसंपादकीय – बी.बी.सी. की चीनी कड़वी हो गईअगला लेखस्वर्ण ज्योति की कविता – ज़िंदगी…! आशा शैलीसंपर्क - [email protected] RELATED ARTICLES कविता रेखा राजवंशी की दो ग़ज़लें May 2, 2026 ग़ज़ल एवं गीत बेचैन कण्डियाल की ग़ज़लें April 4, 2026 ग़ज़ल एवं गीत डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता की ग़ज़लें April 4, 2026 1 टिप्पणी मेरी ग़ज़ल को स्थान देने के लिए आभार जवाब दें कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 आशुतोष कुमार की ग़ज़लें June 1, 2024 अपनी बात…… April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest भारतीय विद्यार्थी – स्कॉटिश सांसद May 23, 2026 कवयित्री एवं लेखिका मंजु मंगल प्रभात लोढ़ा से तेजेन्द्र शर्मा की बातचीत May 16, 2026 अरूणा सब्बरवाल की तीन कविताएं May 16, 2026 मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ की सूक्ष्म, किंतु सशक्त अभिव्यक्ति May 16, 2026 और अधिक लोड करें
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