इश्क़ बदनाम हुआ अपनी ही नादानी से
आप क्यों देख रहे हैं मुझे हैरानी से
बुझ गई आग मेरे दिल की मेरे अश्कों से
प्यास बुझ जाती इस बहते हुए पानी से
प्यार के नाम पे बे मोल ही बिक जाऊंगी
तुम मुझे जीत नहीं पाओगे मन मानी से
ख़्वाहिशें पाल रहे हैं सभी दुनिया भर की
और दुनिया कभी मिलती नहीं आसानी से
सींचना होता है खुद अपने लहू से गुलशन
मांगी जाती नहीं रौनक कभी वीरानी से
हुक्म आया है करूं फिर कोई ताज़ा सजदा
ख़ाक झाड़ी भी नहीं है अभी पेशानी से
हर कोई शख़्स यहां ख़ुद में मग्न है रूबी
हाल क्यों पूछने आए कोई दीवानी से
डॉ रूबी भूषण की ग़ज़ल - इश्क़ बदनाम हुआ अपनी ही नादानी से 3
डॉ रूबी भूषण
102, शिवराज अपार्टमेंट,
ईस्ट बोरिंग कैनल रोड,
पंचमुखी हनुमान मंदिर के समीप,
पटना-800001
मोबाइल – +91-9931918723
Email – ruby4u30@gmail.com

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