होमग़ज़ल एवं गीतसपना सक्सेना की ग़ज़ल ग़ज़ल एवं गीत सपना सक्सेना की ग़ज़ल By सपना सक्सेना August 29, 2021 0 208 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp हर सुबह बदलता है हर शाम बदलता है मौसम की तरह पल पल इंसान बदलता है कैसा यकीं उसका जो खुद को नहीं हासिल कपड़ों की तरह देखो ईमान बदलता है कहता है जिसे अपनी जागीर नहीं तेरी ये वक्त है होकर मेहरबान बदलता है उलझा है दीवाना अपने ही सायों में कभी राह कभी मंजिल नादान बदलता है जो साथ नहीं कोई तो ग़म न करो इसका गिर गिर कर उठना ही पहचान बदलता है Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखबालकृष्ण गुप्ता ‘गुरु’ की तीन लघुकथाएँअगला लेखसंपादकीय – हींग लगे न फिटकरी…! सपना सक्सेनासम्पर्क - [email protected] RELATED ARTICLES ग़ज़ल एवं गीत ज्ञान प्रकाश विवेक – ग़ज़लें July 25, 2026 ग़ज़ल एवं गीत आशुतोष कुमार की ग़ज़लें June 27, 2026 ग़ज़ल एवं गीत पद्मश्री अशोक चक्रधर की तीन ग़ज़लें June 27, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 आशुतोष कुमार की ग़ज़लें June 1, 2024 अपनी बात…… April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest जितेंद्र कुमार का संस्मरण-ख़त का सफ़र July 25, 2026 प्रेमचंद्र की कहानी मंत्र का नाट्य रूपांतरण-डॉ चंद्रशेखर तिवारी July 25, 2026 जिज्ञासा सिंह की कहानी- कतर ब्योंत July 25, 2026 जीवन-संघर्षों का यह काव्यमयी रूपांतरणः मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है July 25, 2026 और अधिक लोड करें