होमग़ज़ल एवं गीतसपना सक्सेना की ग़ज़ल ग़ज़ल एवं गीत सपना सक्सेना की ग़ज़ल By सपना सक्सेना August 29, 2021 0 139 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp हर सुबह बदलता है हर शाम बदलता है मौसम की तरह पल पल इंसान बदलता है कैसा यकीं उसका जो खुद को नहीं हासिल कपड़ों की तरह देखो ईमान बदलता है कहता है जिसे अपनी जागीर नहीं तेरी ये वक्त है होकर मेहरबान बदलता है उलझा है दीवाना अपने ही सायों में कभी राह कभी मंजिल नादान बदलता है जो साथ नहीं कोई तो ग़म न करो इसका गिर गिर कर उठना ही पहचान बदलता है Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखबालकृष्ण गुप्ता ‘गुरु’ की तीन लघुकथाएँअगला लेखसंपादकीय – हींग लगे न फिटकरी…! सपना सक्सेनासम्पर्क - [email protected] RELATED ARTICLES ग़ज़ल एवं गीत मनीष बादल की ग़ज़लें March 8, 2026 ग़ज़ल एवं गीत किरण यादव की तीन ग़ज़लें March 8, 2026 ग़ज़ल एवं गीत सोनिया अक्स सोनम की ग़ज़लें February 22, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest नैवेद्य पुरोहित की कलम से – शिवना साहित्य समागम 2026 सीहोर से लौटकर March 8, 2026 छाया सक्सेना प्रभु की कलम से – पुस्तक समीक्षा : भारती की काव्यमाला March 8, 2026 आचार्य अभिनव योगी का लेख – वन्दे मातरम् की 150 वर्षीय यात्रा March 8, 2026 डॉ. अनुराधा पांडेय की कविता March 8, 2026 और अधिक लोड करें