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कामिनी गुप्ता की कविता – इक कसक सी

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इक कसक सी कहीं तो कभी रह ही जाती है,
दिल सोचता कुछ है पर कहां चल पाती है।
इक काश ….सा जीवन में जब रह जाता है,
बात बेबात वो रह रहकर फिर यूं तड़पाता है।
क्यों कभी-कभी कुछ रिश्ते अधूरे रह जाते हैं,
बीच भंवर में जब अजीज़ अपने छोड़ कर जाते हैं।
यादों को तो संग रहना होता है, वो रहती हैं बरसों तलक,
क्यों नहीं भूलती कुछ खास बातें चाहकर भी बरसों तलक।
गर चाहने से सहज ही हो जाता सब कुछ जीवन में तो,
कौन समझ पाता इस ज़िन्दगी के गहरे रंगों के महत्व को।
चलो जी लें हर वो पल जो कहीं दस्तक देता है चुपके से,
रह जाएंगे नहीं तो किस्से ही बन जीवन के किसी हिस्से के।

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