1-भीगना
प्यासी धरती
पसरा डर
फैली राख
पड़ा‌ अकाल
चा…रों तरफ
फिर भी
कोई है
जो भीग रहा
दिन-रात
भीतर
भीगने से है हरियल
पल-पल।।
2-मार-सेना
बुद्ध से परास्त
मार-सेना ने
नहीं मानी हार
वह घुल गयी
हवाओं में और उतर रही
प्रबुद्धों के हृदय में
श्वास-श्वास।।
3-कविता
वह नहीं होती कोई इश्तिहार
जिन्हें फाड़ सके
उड़ा ले जा सके
मौसमी हवाऐं
वह तो है
काल के भाल पर
उत्कीर्ण दस्तावेज
सांस लेते हुए।
4-नट
देहात्म बुद्धि को त्याग
हो जाते विदेह
भावातिरेक से
हो जाते
भावातीत
दिखाते दर्पण
हो जाते बिम्ब
हे नट!
काल की ताल पर थिरक
हो जाते नटराज।।
5-जीवन में
पेड़ से बरसती
चिड़ियों की चहचहाहट में
नहा गया
मैं
फिर जीवन में आ गया
डॉ. नितेश व्यास
संस्कृत और हिन्दी दोनों भाषाओं में लिखनें वाले डॉ नितेश व्यास, वर्तमान में , जोधपुर में संस्कृत विषय के सहायक आचार्य पद पर कार्यरत हैं ।मधुमती,किस्सा कोताही,हस्ताक्षर,रचनावली आदि पत्रिकाओं एवं पोषम पा,अथाई,संवाद सरोकर,काव्यमंच आदि ब्लाग्स् पर,दैनिक नवज्योति,दैनिक युगपक्ष आदि समाचार पत्रों मे समय-समय पर कविताऐं प्रकाशित होती रही हैं।

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