हमारे देश में त्यौहार आते ही बुद्धिजीवी और पर्यावरण प्रेमियों की संख्या में अचानक वृद्धि हो जाती है.. फेसबुक और अन्य डिजिटल प्लेटफार्म पर क्रांति का माहौल उत्पन्न हो जाता है..दिवाली पर पटाखों से प्रदूष्ण होता है ..होली पर पानी की बर्बादी, करवा चौथ औरत की गुलामी को दर्शाता है ..
इन सबमें होली तो ऐसा त्यौहार है जिसके दुश्मन हर तरफ हैं …नेता जी भी त्योहारों के समय डबल एक्टिव होते हैं .. एक पार्टी के नेता कहते हैं पानी ना बहाओ कीचड़ बन जायेगा, कीचड़ हुआ तो पब्लिक को परेशानी होगी ….नेता भी आखिर इन्सान हैं जी, उन्हें भी चिंता होती है पब्लिक की परेशानी की…..विश्वास कीजिये आप!
दूसरी पार्टी के नेता कहते हैं बहने दो पानी…..होने दो कीचड़ …कीचड़ होगी तभी तो कमल खिलेगा …कमल खिलेगा तो जनता की भलाई ही होगी|

