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अर्चना चतुर्वेदी की चुटकी – फैमिली प्लानिंग और विलुप्त होती होली

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हमारे देश में त्यौहार आते ही बुद्धिजीवी और पर्यावरण प्रेमियों की संख्या में अचानक वृद्धि हो जाती है.. फेसबुक और अन्य  डिजिटल प्लेटफार्म पर क्रांति का माहौल उत्पन्न हो जाता है..दिवाली पर पटाखों से प्रदूष्ण होता है ..होली पर पानी की बर्बादी, करवा चौथ औरत की गुलामी को दर्शाता है ..
इन सबमें  होली तो ऐसा त्यौहार है जिसके दुश्मन हर तरफ हैं …नेता जी भी त्योहारों के समय डबल एक्टिव होते हैं .. एक पार्टी के नेता कहते हैं पानी ना बहाओ कीचड़ बन जायेगा, कीचड़ हुआ तो पब्लिक को परेशानी होगी ….नेता भी आखिर इन्सान हैं जी, उन्हें भी चिंता होती है पब्लिक की परेशानी की…..विश्वास कीजिये आप! 
दूसरी पार्टी के नेता कहते हैं बहने दो पानी…..होने दो कीचड़ …कीचड़ होगी तभी तो कमल खिलेगा …कमल खिलेगा तो जनता की भलाई ही होगी|

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हर तरफ मानो होली के दुश्मन मच्छरों की तरह बढ़ जाते हैं और काटने भी लगते हैं… कोई केमिकल के नुकसान गिनाता है तो कोई प्रदूषण के डाक्टर कहते हैं रंगों के इस्तेमाल से स्किन ख़राब हो जाती है दूर रहो .. पर कोई  ये नहीं सोच पा रहा कि होली को सबसे बड़ा खतरा जनसंख्या नियंत्रण से है ..क्या हुआ समझ नहीं आया ? 
अरे भई होली वो त्यौहार है जिसमें हर जीजा के दिल में साली संग होली खेलने के नाम पर लड्डू इस कदर फूटते हैं कि बिना साली के वे ससुराल को ससुराल ही ना मानें| देवरों की आँखों में भाभी संग होली खेलने का सपना तो बचपन की देहलीज पार करते ही पलने लगता है…इस सपने को पूरा करने के चक्कर में तो अपने मुहल्ले से लेकर आसपास के हर मुहल्ले में बाकयदा भाभियाँ बनाई जाती है ताकि होली का भरपूर आनंद लिया जा सके…
भाभियाँ ननदोई संग होली खेलने की योजना बनाती हैं..और नव विवाहित जोड़े तो होली के बहाने प्रेम रस में डुबकियां लगाते हैं ..अब सोचो जब लाल तिकोने की डिमांड पर सब एक ही बच्चा पैदा होगा तो जीजा साली, देवर भाभी, नंदोई-सलहज  वाले रिश्ते किसके साथ होंगे ?
भाई नहीं होगा तो भाभी कहाँ से आएगी बहन नहीं होगी तो साली का अकाल पड़ जायेगा. पड़ोसियों और रिश्तेदारों से पहले ही रिश्ते सिमट  चुके हैं..अब जब एक ही  बच्चा रखेंगे तो उस बच्चे को जब भाई या बहन ही नहीं मिल रही बेचारा एकलौता पल रहा है तो  जीजा–साली, देवर-भाभी, ननद भौजाई जैसे रिश्ते का तो सवाल ही पैदा नही होता..
मुझे लगता है वक्त रहते गौरैया बचाओ और बाघ बचाओ अभियान की तरह साली बचाओ, देवर बचाओ अभियान शुरू नहीं किये गए तो होली जैसे त्यौहार का रस ही विलुप्त हो जायेगा..! 

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