चाँद से लेकर मंगल तक पहुंचने वाले देश के लोगों की सोच अभी तक कपड़ों के इर्दगिर्द घूमती है . घरों और चौपाल से लेकर नेताजी के भाषण तक चहुँ ओर पहनावे की बात होती है | इन्सान की पहचान ,इंसान की इज्जत मान सब सिर्फ उसके पहनावे से ही तय होता है |
इस देश के लोग तो इतने त्रिकालदर्शी हैं कि पहनावा देखकर बता देते हैं कि कौन संस्कारी कौन कु-संस्कारी | कमाल की बात है ना, यहाँ इन्सान से ज्यादा कपड़ों की कद्र है और कहते हैं इंसानियत नहीं बची .जींस पहनने से संस्कृति को खतरा हो जाता है और कपड़े देखकर संस्कार भी भाग जाते हैं… इनका वश चले तो संस्कारों का ड्रेसकोड बना दें |

