इन दिनों हम हीन भावना का शिकार हो गए हैं। कोरोना से तो हम उबर आए पर इस हीन भावना से उबरने के आसार नहीं दिखते । जब भी फ़ेसबुक खोलते हैं जान पहचान के किसी न किसी शख्स का ये मेसेज सामने आकर हमारी खिल्ली उड़ाता महसूस होता है, “मेरा अकाउंट हैक हो गया है यदि कोई मेरे अकाउंट में आपसे कुछ रुपए मांगे तो मत दीजियेगा” ये मेसेज पढ़ते ही हम तुरंत अपने इनबॉक्स की तरफ लपकते हैं और हसरत भरी नजर डालते हैं कि आज तो किसी ने हमसे जरूर रुपयों की मांग रखी होगी और हर बार निराशा ही हाथ लगती है।
माना कि corona के आने के बाद से ही पतिदेव और बेटे की तनख्वाह आधी आ रही है और मकान की किश्त पूरी जा रही है । बढ़ती महंगाई ने हमारी जेब को मरणासन्न अवस्था में लाकर छोड़ दिया है । गैस और पेट्रोल की तो बात तक करने लायक हैसियत नहीं रह गई हमारी । थैले में रुपए लेकर थैली में सब्जी लानी पड़ रही है पर कम से कम हैकर से तो इस बेइज्जती की उम्मीद नहीं थी ।

