दिलीप कुमार का व्यंग्य : मीटू बनाम शीटू 3
  • दिलीप कुमार

रात को दो बजे कमरे में कर्कश ध्वनि हुई तो मैं झुंझलाकर उठा।पत्नी अभी-अभी यूट्यूब देखकर सोई थी क्योंकि मेरा फोन उसके हाथ में अटका पड़ा था ।फोन उठाया तो दूसरी तरफ शादाब मियां थे ।पत्नी के मोबाइल पर शादाब की कॉल देखकर दिमाग चकरा गया।लेकिन तभी ख्याल आया कि हिरणी जैसी मेरी पत्नी अब बुलडोज़र हो चुकी है और शादाब की क्या शामत आयी है जो उसे फोन करेगा,वैसे भी ऐसी पत्नी को प्राप्त करके मैं सदगति प्राप्त होने की कगार पर हूँ।काल रिसीव होते ही शादाब मियां हाँफते हुए बोले “अमां यार लेखक महोदय,देखा तुमने गजब हो गया।कब से तुम्हें फोन कर रहा हूँ।तुम्हारा फोन नहीं लगा तो भाभी को ट्राई किया”।मैंने हँसते हुए कहा “भाभियों को ट्राई करना छोड़ दे कमबख्त,वरना तुम्हारा भी किसी दिन मीटू हो जायेगा।
वो चहकते हुए बोला”अल्लाह मुहाफ़िज़ है ,खैर मेरी छोड़ो ,ये सुनो,लवली ने भी मीटू कर दिया ।
अब अवाक होने की मेरी बारी थी-“क्या लवली ने भी “?
शादाब मियां खिलखिलाते हुए बोले “अरे खुदा के बन्दे,फोन आन करो,फेसबुक देखो।पांच मिनट में काल बैक करता हूँ ।मैं सुबह तक फोन करने का इन्तजार नहीं कर सकता।मुझे तुमसे कुछ अर्जेंट नॉन वेज बातें करनी हैं ।सो कमरे से निकल आना वरना भाभी सुन लेगी तो तत्काल तुम्हारा डोमेस्टिक वायलेंस और मीटू दोनों साथ में हो जायेगा।अब जल्दी देखो भाईजान,मुझे चैन नहीं है ।”।
मैंने फेसबुक ऑन किया ।लवली जी ने पोस्ट में मुझे भी टैग किया था।उनका अनुमान था कि बन्दा खुले जेहन का है ,वाल पर आकर मर्दों को कोसेगा और उनकी पोस्ट का वजन बढ़ जायेगा।उन्होंने एक बार मुझे बताया था कि वो अपनी पोस्ट पर मेरी आमद को ऐसे देखती हैं जैसे इमरान हाशमी अपना सर्वश्रेष्ठ अभिनय परफॉर्म कर रहे हों और हरिहरन उसका प्लेबैक गा रहे हों ।लवली जी दारू और बॉयफ्रेंड विशेषज्ञ महिला थीं।देश के उत्तरी किनारे पर बसे एक बॉर्डर के जिले में पोस्टेड थीं फिलवक्त। ये शहर बॉर्डर की तस्करी ,जलसे,तकरीर,कव्वाली,कीर्तन के लिए मशहूर था लेकिन इस शहर में अब लवली जी के लव टिप्स भी  खासे मशहूर हो रहे थे।लेकिन ये हुनर सिर्फ तफरीह के लिये मुफीद था इसके प्रैक्टिकल नतीजे बहुत कामयाब नहीं रहे थे।यहाँ लड़के-लड़कियां सोशल मीडिया पर बहुत कम संवाद करते हैं।उनके लिये बरसों से आजमाया गया नुस्खा ही कारगर है कि किसी यार दोस्त से मुंह जबानी कहलवा दो या फिर किसी और की राइटिंग में चिट्ठी लिखवाकर किसी और गैर के जरिये भिजवा दो ताकि पकड़े जाने पर लड़का या लड़की साफ तौर पर मुकर जाएं ।फेसबुक और मेसेंजर पर लफड़ा नहीं पालते कि कब कौन रायता फैला दे।लवली मैडम इस शहर के इश्क़ के दस्तूर से अनजान थीं।अड़तीस साल की उम्र में ना तो कोई उनसे प्रेम करने को तैयार था ना विवाह और उनकी जिद थी कि वो प्रेम विवाह ही करेंगी।वैसे अनौपचारिक रूप से वे प्रेम और विवाह दोनों के सुखों से अछूती नहीं रहीं थीं।परिवार वालों ने तमाम प्रयास किये लेकिन उनकी दारू,चखना और लव गुरुआइन वाली पोस्टों ने उनका घर बसने नहीं दिया।
लवली जी अपने आफिस के लोगों के साथ खाना-पीना पसन्द नहीं करती थीं क्योंकि आफिस वाले लोग उनको खिलाने से ज्यादा पिलाने पर आमादा रहते थे ताकि वो पीकर बहके तो,,,?
ढलते हुए यौवन पर जबरदस्त मेकअप उन्हें चर्चा का विषय बनाये रखता था ।उनके आफिस में बस उन्हीं के चर्चे थे और वो आफिस पैंतालीस पार के पुरुषों से भरा पड़ा था ।नगरपालिका में फिलहाल लवली जी शौचालय सत्यापन समिति के इंचार्ज पद पर शोभायमान थीं
“कुछ तो होते हैं मोहब्बत में जुनूँ के आसार
और कुछ लोग कह कहके दीवाना बना देते हैं”।
सो पहले लवली जी दिन में दो चार घूंट ही लेती थीं मगर जिस दिन शौचालय का भौतिक सत्यापन करना होता था ,उस दिन वो दो चार पैग लगाकर ही निकलती थीं।पहले अधिकांश मेहतर उनके विरोधी थे लेकिन जब से उनको पता लगा कि मैडम टल्ली होने की हद तक पीती हैं तब से उनका विरोध खत्म हो गया ।वैसे भी शराब हमेशा से भाईचारा बढ़ाने के लिये कारगर रही है ,बकौल लवली मैडम कविवर बच्चन साहब भी लिख गए हैं कि।                                  “बैर कराते मन्दिर-मस्जिद,मेल कराती मधुशाला”।
लवली मैडम जब फील्ड में होती हैं और काम मे कोई अड़चन आती है तो अपने हैंडबैग से निकालकर दो -चार घूंट मेहतरों को दे देती हैं ,जिससे तुरंत सारे विवाद निपट जाया करते हैं।सबको पीने-पिलाने के बाद लवली मैडम वैसा ही भाषण देती हैं जैसा राणा सांगा से हार रहे बाबर ने दिया था और फिर उस तकरीर के उत्साह से लबरेज होकर उनकी सेना जंग जीत गई।वो अपने भाषणों में नजीर देते हुए कहती हैं
“मेरे साथियों आप लोगों की नालियां साफ करते हैं जिससे शरीर स्वस्थ रहता है और मैं लोगों के दिमाग की चोक नालियां फेसबुक पर साफ करती हूँ, इसलिये आप समाज के जमीनी मेहतर हैं और मैं फेसबुक की जेहनी मेहतरानी हूँ, दोनों का संतुलन देश के लिये जरूरी है ।”
लवली मैडम ने विभाग के सभी युवाओं  का फेसबुक एकाउंट खुलवा दिया है ,वे सभी उनको फॉलो करते हैं ,,ईव टीजिंग वाला फॉलो नहीं फेसबुक वाला फॉलो।कुछ लड़कों के पासवर्ड भी उनके पास हैं ,अपनी ही फ़ोटो पर वो उनके एकाउंट से दस बीस लाइक और कॉमेंट कर आती हैं।लव गुरुआइन लवली जी के लव टिप्स को फॉलो करके तमाम लोगों की जिंदगी में लवली मौसम आ गए, ना जाने कितनों की नैया पार हो गयी।जो लोग महिलाओं से थर-थर काँपते थे आज उनकी दो -तीन गर्लफ्रैंड हैं।सब मस्त हैं लेकिन लवली जी परेशान हैं कि कोई उन्हें प्रेम नहीं करता ,प्रेम करना ही नहीं चाहता।हर कोई उनसे फ़्लर्ट या अफेयर ही करना चाहता है ।उनके आफिस के तोंद वाले साहब से लेकर उन्हें फेसबुक पर फॉलो करने वाले लोग भी ।
लवली जी आँहें भरकर अपनी खोई हुई कमनीयता की फ़ोटो निकलती हैं,निहारती हैं और फिर दो पैग लगाकर एक शेर गुनगुनाती रहती हैं
“ना किसी के आंख का नूर हूँ,
ना किसी के दिल का करार हूँ
जो चमन खिजां से उजड़ गया
मैं उसी की फसले बहार हूँ “।
तो गालिबन लवली मैडम के पास सब कुछ है मगर हकीकतन कुछ भी नहीं।भले ही जबरदस्त फाउंडेशन,मेकअप से उनके चेहरे के दाग धब्बे बढ़ते जा रहे हों ,लेकिन उनकी पोस्ट चमकती रहनी चाहिए, यही मकसद है उनके जीवन का।अपनी पोस्ट को चमकाने के लिये वो किम जोंग की योजनाओं से लेकर शेयर बाज़ार और दुनिया की आर्थिक नीतियों का भी अध्ययन करती हैं ।कोई बड़ा नेता अस्पताल में भर्ती हुआ नहीं कि लवली जी उसकी कुंडली निकाल लेती हैं कि उसके देहांत पर सबसे वजनदार और चमकदार पोस्ट उन्हीं की होनी चाहिये वो भी सबसे पहली ।किसी को तकलीफ हो,दुख हो ,देश में मातम हो या हादसा ,बाढ़ हो या अकाल ,वो विराट कोहली की तरह अपने लक्ष्य पर पूरा फोकस रखती हैं कि फेसबुक पोस्ट हर हाल में चमकानी है।
कहीं स्कूल बस पलट जाये औए बच्चे मर जाएं तो वो बच्चों की मौत पर सम्वेदना व्यक्त नहीं करती हैं बल्कि परिवहन मंत्री का इस्तीफा मांगते हुए समूची सरकार पर हमला बोल देती हैं ,भले ही दुर्घटना के वक्त वो परिवहन मंत्री ट्रैफिक सिस्टम की बारीकियों को समझने फ्रांस गया हो,।
इसी कारण विभाग की किरकिरी हुई और  दो चार बार लवली मैडम को कारण बताओ नोटिस भी जारी हुआ ।तब लवली मैडम ने ऐट पीएम पर उस जांच अधिकारी को कैंडल लाइट डिनर करा कर एक ब्लैक डॉग की बोतल गिफ्ट कर दी ।जाते जाते वो वो जांच अधिकारी को ये बताना नहीं भूलती थीं कि उनके तार सो कॉल्ड सेक्युलर लॉबी और खतरनाक फेमिनिस्ट लोगों से बहुत गहरे जुड़े हैं।इसीलिये उनके लिए किसी का भी मीटू कर देना या करवा देना बांये हाथ का खेल है।सो ऐसे मामले तुरंत सुलट जाते थे।
एक बार एक ही नोटिस का बार -बार रिमाइंडर आया तो जांच अधिकारी से उनका अफेयर ही हो गया ।मामला गंभीर हुआ तो उस जांच अधिकारी की पत्नी तक पहुंचा ।जांच अधिकारी की पत्नी दो युवा हो रहे पुत्रों की माता थी।उसको अपना घर टूटता दिखा तो वो आ धमकी लवली मैडम के दफ्तर ।अपना घर टूटने से बचाने के लिये उसने लवली मैडम को ऐसा तोड़ा कि देखने वालों की रूह फना हो गयी।
उस रणचंडी ने लवली मैडम के सर के बाल उखाड़ लिये और एक अंगुल तक खोपड़ी के बाल जड़ से विहीन कर दिये ।उसने लवली जी के आगे के दो दांत तोड़ डाले ,माथा फोड़ दिया और तन के कपड़े भी फाड़ डाले।शौचालय प्रभारी लवली मैडम ने किसी तरह शौचालय में छिप कर अपनी जान बचाई ।
महिला ने महिला की पिटाई की तो उस सरकारी आफिस में कोई बड़ा मुद्दा नहीं था लेकिन ये तमाशा सबने लुत्फ लेकर देखा ।
लोगबाग तमाशबीन ही बने रहे क्योंकि तमाशा एक नामचीन शिकारी का बना था ।ऐसे शिकारी कभी-कभार खुद भी शिकार हो जाया करते हैं इसे ही कहते हैं “चोर पर मोर “।लोगों ने बहुत कहा कि मुकदमा कर दो मगर क्या करतीं बेचारी लवली मैडम ।मामला कोतवाली जाता तो लवली मैडम की तमाम करतूतें बाहर आ जातीं ,सो लवली मैडम अपने हाई प्रोफाइल कनेक्शन के बावजूद मन मसोस कर रह गयीं।
जिन गलियों में फूलों की पालकी की सवारी किया करती थीं लवली मैडम ,उन्हीं गलियों में सुखी लकड़ियों की तरह उनका गुरुर तोड़ दिया गया सो उन्होंने अपना तबादला करा लिया इक शेर बुदबुदाते हुए
“इंशा जी अब उठो यहाँ से,इस शहर में दिल का लगाना क्या “
नए शहर में नए तरीके से धाक जमाई लवली मैडम ने ।भले ही वो जगह नई हो मगर फेसबुक तो सर्वत्र था सो हर जगह उनकी तूती बोलती रहती थी मगर इस शहर में आकर वो थोड़ा और सेक्युलर और थोड़ी एक्स्ट्रा फेमिनिस्ट हो गईं थीं।उन्होंने रब को शुक्रिया कहा कि उनकी पिछली पिटाई फेसबुक पर नहीं आ पायी थी वरना रामजाने क्या होता उनकी आभासी महत्वाकांक्षी योजनाओं का।
कहते हैं “चोर चोरी से जाये, मगर हेरा फेरी से ना जाये।नए वाले सेकुलरिज्म और एक्स्ट्रा फेमिनिज्म में स्थायी लुत्फ ना था,मगर लवगुरु वाला रोजगार तो सदाबहार था।लवगुरु होने के लिये लव की प्रैक्टिस भी जरूरी है सो गालिबन उन्हें लव में रहना ही पड़ा मगर जरा संभलकर।नये शहर में उन्होंने नये शौक पाले और लोगों को अपनी नई उम्र भी बताई।जिस तरह उन्हें अपनी उम्र से दस-पंद्रह साल कम दिखने का शौक था वैसे ही अपने से एक पन्द्रह साल छोटे लड़के ने लवली मैडम ने अफेयर कर लिया।अड़तीस साल की लवली जी का तेईस साल के लवेश से अफेयर हो गया जो फेसबुक के जरिये उनके सम्पर्कों में आया था ।
लवेश का एक बस एक ही काम था कि व्हाट्सअप पर बैठकर दिन भर चलताऊ शायरी नोट करना और जिम में बैठकर अपनी बॉडी बिल्डिंग वाली तस्वीरों के साथ उन्हें पोस्ट करना ।लवेश,लवली जी से दो कदम आगे था वो अपने रोजमर्रा के खर्चे भी अपनी जीवन
में आई हुई सुंदरियों से लेता था ।सब जानते-बुझते हुए भी लवली जी उस पर मर मिटीं ,वैसे भी अदीबों की जमात में लवली जी की साख खाक हो चुकी थी।सो अब लवेश से अफेयर उनके लिये किसी उपलब्धि से कम ना था।लवेश के जीवन का ही बस एक ही मकसद था कि उसकी फेसबुक वाल चमकती रहे बस ,जिसके लिये वो किसी भी कीमत तक जा सकता था।रब ने बना दी जोड़ी टाइप सीन था ,दोनों ही अपनी आभासी दुनिया की चमक बढ़ाने के लिये किसी भी हद तक जा सकते थे ।
नए शहर में लवली जी को महत्वहीन पद मिला जिससे उनकी ऊपर की कमाई बन्द हो गयी।ऊपर से उन्होंने अपने टूटे दांत,फूटे माथे और नुचे बालों की मरम्मत में लाखों रुपये खर्च करके सर्जरी करायी थी जिससे उनका हाथ खासा तंग था,फिर भी लवेश को अपने प्यार की चुंगी रुपयों के शक्ल में देती रहीं।
ना जाने कैसी हवा चली कि इसी दरम्यान लवली जी औऱ लवेश के फेसबुक फॉलोवर्स की संख्या में बहुत भारी गिरावट आ गयी।दोनों हैरान, परेशान और बेबस। इसी परेशानी में लवली जी ने कुछ अंट-शंट बक दिया और फिर वो विभागीय राजनीति का भी शिकार हो गयीं और फिर विभाग के मुखिया ने उनकी तनख्वाह भी रोक दी।तीन महीने में ही उनको दिन में तारे दिख गये।वो स्कॉच से ठर्रा पर आ गयीं।हाथ में पैसा रहा नहीं तो वो लवेश का भी खर्चा नहीं उठा पा रही थीं।दोनों की जिंदगी और फेसबुक पोस्ट्स बेरौनक हो चली थीं।इसी बीच अपने बॉस को अपने रसूख की धमकी देने के कारण और अपनी वाचालता की वजह से वो निलंबित भी हो गयीं।
सो अब लवली मैडम का पूरा ध्यान फेसबुक पर ही केंद्रित हो गया था।बिना ऊपरी कमाई वाले इस पटल पर उनका मन पहले से ही नहीं लग रहा था।उनकी ज़िंदगी बेनूर हो चली थी और फेसबुक बेरौनक।बस तभी मीटू का जलजला आया।उन्हें एक उम्मीद नजर आयी सो उन्होंने अपना मीटू लिखने का फैसला किया और किस्तों में लिखने का फैसला किया।उन्होंने अपनी बारह बरस की उम्र का मीटू लिखा लेकिन पहला अध्याय ही ।वो भी उन्हें स्कूल ले जाने वाले रिक्शावाले के साथ।
हकीकत में बचपन में जिस रिक्शा पर बैठ कर वो स्कूल जाया करती थीं उसी पर बैठे हुए वो एक दिन वो मस्तराम पत्रिका की रंगीनियां देख रही थीं ।तभी चालीस साला रिकशेवाले की नजर उन पर पड़ गयी जो उन्हें अपनी बेटी जैसा ही मानता था।उसने लवली को दो कंटाप जड़े और वो अश्लील पत्रिका फाड़ कर फेंक दी ।लवली घर लौटी तो उसके गाल सूजे थे ,मां ने सख्ती से पूछा तो लवली ने अपनी गलती छुपाते हुए कह दी कि रिकशेवाले अंकल ने उनके साथ बदतमीजी की है।
अगले दिन सच्चाई का पता लगा तो लवली की माँ ने पिटाई करके उसका दूसरा गाल भी सूजा दिया।लेकिन लवली जी को हर हाल में अपनी पोस्ट चमकानी थी सो उन्होंने अपना मनगढ़ंत मीटू लिखना शुरू कर दिया।अभी उन्होंने पहला भाग ही लिखा था,क्लाइमेक्स बाकी था कि लोग उनकी पोस्ट पर बलि-बलि गये।
मैंने भी पोस्ट पढ़ी,इतनी रात गये शादाब मियां से बात करने का मेरा कोई इरादा नहीं था,सो घर के सारे मोबाईल फोन मैंने स्विच ऑफ कर दिये।
शादाब मियां अगले पूरे हफ्ते मुझे बताते रहे कि लवली मैडम अब सुपरस्टार बन चुकी हैं,उनके पचास हजार फॉलोवर्स हो चुके हैं ।दिन भर सबके फोन-मैसेज का जवाब देते वो थक जातीं ।वो इतनी खुश हुईं कि कई हफ्तों तक ना सिर्फ लवेश को फोन करना भूल गयीं बल्कि उसका फोन उठा भी नहीं पायीं।
वैसे भी अब लवली जी के लिये ना तो लवेश के लिये समय था,ना धन,ना महत्व।चोट खाया आशिक जो भी कर जाए वो कम ही होता है ।सो लवली जी को सबक सिखाने के लिये उसने रिवर्स मी टू लिख दिया।गजब ये था कि उसने लवली जी की असली मार्कशीट और अपनी फोटोशाप वाली मार्कशीट और फ़ोटो भी पोस्ट कर दी फेसबुक पर।बकौल मार्कशीट वो उम्र में नाबालिग और फोटोशॉप वाली फ़ोटो में काफी  कम उम्र का नजर आ रहा था और पोस्ट में लवली जी बिल्कुल उसकी दूनी उम्र की महिला लग रही थीं।
लोगों ने इस रिवर्स मीटू को भी हाथों-हाथ लिया और चंद रोज में ही लवेश के फेसबुक फॉलोवर्स की संख्या सत्तर हजार के पार निकल गयी।रिवर्स मीटू फिलहाल सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड हो रहा है ।लवली जी पर लगातार हमले जारी हैं ,उन्होंने अपना फेसबुक एकाउंट डीएक्टिवेट कर दिया है और मोबाइल बंद करके कहीं अज्ञातवास पर चली गयी हैं ।आपको कहीं दिखीं क्या ?

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