1.
सफ़र में छोड़कर हमको न यूँ तो हमसफ़र जाएँ,
अधूरी ज़िंदगी कैसे कटेगी, हम किधर जाएँ।
न यूँ भी रूठ के मुँह मोड़ के हमसे उधर जाएँ
कहीं तन्हाई के साये न फिर दिल पे उतर जाएँ।
है थमती जा रहीं साँसें, न यूँ हो बेख़बर जाएँ,
मुहब्बत दे रही आवाज़, कुछ तो सोचकर जाएँ।
ख़ुदा का वास्ता हम दे रहे हैं, अब ठहर जाएँ,
निगाहें राह तकती हैं, सनम! ना इस क़दर जाएँ।
दुआ है, माँगती ये “हीर” अब दिन रात तुझसे रब,
मेरे अशआर उनके दिल की धड़कन बन उतर जाएँ।
2.
कभी रोते अकेले में कभी हम मुस्कुराते हैं
तुम्हारे प्रेम की बातें कहाँ हम भूल पाए हैं?
पता चलता नहीं चेहरों से अब तो राज़ चेहरों का
यहाँ चेहरों पे चेहरे सब लगाए यार फिरते हैं ।
बता दे ए ख़ुदा!, ये दिल सदा क्यों काँच के बनते
जो आख़िर टूटकर हमको यूँ बरसों तक रुलाते हैं ।
मिले थे हम कभी जिनकी सुहानी छाँव के नीचे
शजर वो आज तक अपनी जगह वैसे ही ठहरे हैं ।
भला उनकी मुहब्बत को मुहब्बत क्या समझते, जो
मुहब्बत में दिलों के साथ धोखा रोज़ करते हैं।
ख़ुशी के चंद पल हैं साथ जो तेरे गुज़ारे थे
ग़मों की क्या करूँ गिनती वो कितनी बार आए हैं ।
मुहब्बत ‘हीर’ दुनिया की इबादत पाक है इतनी
जो इसको जान लें दिल से वही तो रब को पाते हैं ।
3.
नहीं कुछ सोचने देती ज़िहानत छीन लेती है
दिलों का चैन पल भर में, मुहब्बत छीन लेती है।
भला था बचपना, चिंता नहीं थी फ़िक्र भी कोई
जवानी तो सभी मस्ती शरारत छीन लेती है ।
नहीं तुम खेलना ये खेल अपने ही कभी घर में
सभी कुछ तेरा तुझसे ये सियासत छीन लेती है ।
नहीं करना अनादर, जो बनी घर की तेरे लक्ष्मी
अगर रूठी कहीं तुझसे,तो बरकत छीन लेती है ।
दरारें दिल में डाले ये, सदा नफ़रत है फैलाती
सभी रिश्ते मुहब्बत के, अदावत छीन लेती है ।
उसी में तुम सकूँ रखना मिले मेहनत से जो तुमको
बहुत लालच भी दौलत की, ये दौलत छीन लेती है।
लिखा तक़दीर में जो ‘हीर,’ तेरे है नहीं उसने
भले तू लाख कोशिश कर,वो क़िस्मत छीन लेती है ।
- हरकीरत हीर
गुवाहाटी (असम)
मो. +91 8638761826
