Sunday, July 26, 2026
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आलोक शुक्ला का कहानी संग्रह ‘इस दीवार पर कोई खिड़की नहीं’ लोकार्पित

  • आलोक शुक्ला

नई दिल्ली, वरिष्ठ रंगकर्मी, लेखक, निर्देशक एवं पत्रकार आलोक शुक्ला के नवीन कहानी संग्रह “इस दीवार पर कोई खिड़की नहीं” का लोकार्पण रविवार को गाज़ियाबाद स्थित घरौंदा बाल आश्रम में गरिमामय समारोह के बीच सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, रंगमंच, शिक्षा एवं समाजसेवा से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. महेन्द्र भीष्म, मुख्य रजिस्ट्रार, लखनऊ उच्च न्यायालय रहे। इस अवसर पर आई.टी. विशेषज्ञ एवं आध्यात्मिक पथ प्रदर्शक श्री अनिल उपाध्याय, वरिष्ठ चिकित्सक एवं रेखाचित्र विशेषज्ञ डॉ. रत्नाकर लाल, वरिष्ठ शिक्षाविद्, लेखिका एवं कवयित्री सुश्री सुमित्रा शर्मा, रंगकर्मी एवं बाल परामर्शदाता सुश्री निरुपमा बडेरा, संगीतज्ञ, प्रोफेसर (आर.एन.एस.डी.) एवं रंगकर्मी डॉ. रत्ना पनिकर, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार श्री सुभाष अखिल, परामर्शदाता एवं कार्यक्रम निदेशक, सामुदायिक फाउंडेशन सुश्री सीमा कुमार, किन्नर विभाग विशेषज्ञ डॉ. भारती (शिमला, हिमाचल प्रदेश), लेखक एवं रंगकर्मी प्रताप सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मंच संचालन रंगकर्मी टेकचन्द ने किया।

इंडिया नेटबुक्स प्राइवेट लिमिटेड से प्रकाशित इस कहानी संग्रह में 22 कहानियाँ संकलित हैं। संग्रह की कहानियाँ समकालीन समाज, मानवीय रिश्तों, संवेदनाओं और बदलते सामाजिक परिवेश के विविध आयामों को अभिव्यक्त करती हैं। यह पुस्तक अमेज़न, फ्लिपकार्ट तथा प्रकाशक की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आलोक शुक्ला ने रंगमंच और साहित्य दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनकी कहानियाँ सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती हैं तथा पाठकों को गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित करती हैं।

उल्लेखनीय है कि “इस दीवार पर कोई खिड़की नहीं” आलोक शुक्ला की आठवीं प्रकाशित कृति है। इससे पूर्व उनके नाट्य संग्रह “ख्वाबों के सात रंग”, “पंचरंग”, “अजीब दास्तां और एक अन्य नाटक”, संस्मरणात्मक पुस्तक “एक रंगकर्मी की यात्रा”, काव्य संग्रह “अफ़सोस की ख़बर”, शोधग्रंथ “बघेलखण्ड के लोकनाट्य छाहुर की शोधयात्रा” तथा पूर्णकालिक नाटक “आज़ादी के सिंदूरी रंग” प्रकाशित होकर साहित्य और रंगमंच जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।

समारोह के अंत में अतिथियों ने आलोक शुक्ला को नई पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएँ दीं और उनके साहित्यिक अवदान की सराहना की।

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