लगभग सेवानिवृत्त सिने-अभिनेता इमरान ख़ान को भारत सरकार की ओर से आदेश मिला है कि वे 28 अक्टूबर, 2026 तक भारत छोड़ दें। ज्ञात रहे कि 43 वर्षीय इमरान ख़ान अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पास ओ.सी.आई. कार्ड, यानी ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया का कार्ड है। मुंबई पुलिस के पास दर्ज एफ़.आई.आर. के अनुसार, आमिर ख़ान के भांजे इमरान ख़ान ने मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध आयोजित प्रदर्शन में भाग लिया।
ओ.सी.आई. कार्ड को एक तरह का आजीवन वीज़ा कहा जा सकता है। इस कार्ड के साथ बहुत-सी सुविधाएँ जुड़ी हुई हैं और साथ ही कुछ पाबंदियाँ भी लागू होती हैं। मैं ‘पुरवाई’ के पाठकों के लिए यह स्पष्ट करना चाहूँगा कि मैं और मेरे बच्चे, सभी ब्रिटिश नागरिक हैं और हमारे पास भी ओ.सी.आई. कार्ड हैं। इसलिए इमरान ख़ान का मामला हमारे लिए निजी स्तर पर भी प्रासंगिक है। एक तरह से हमें भी चौकस रहना होगा कि हम किन गतिविधियों में भाग नहीं ले सकते।
मैं नियमों का पालन करने वाला इंसान हूँ। ये नियम चाहे ब्रिटेन के हों या भारत के, नियमों के साथ ढील बरतना मुझे कभी सही नहीं लगा। फिर मेरी एयरलाइन और रेलवे की नौकरी भी भारी-भरकम नियमों से लदी रही है। इसलिए सबसे महत्त्वपूर्ण वे प्रतिबंध हैं, जो ओ.सी.आई. कार्डधारक होने के नाते हम पर लागू होते हैं। 4 मार्च, 2021 को इस मामले में कुछ नए बदलाव किए गए थे। मैं प्रवासी भारतीयों के लिए विशेष रूप से इन नियमों का उल्लेख करना चाहूँगा।
ओ.सी.आई. कार्डधारकों को निम्नलिखित गतिविधियों में शामिल होने के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है-
- अनुसंधान गतिविधियाँ।
- मिशनरी, तब्लीग, पर्वतारोहण और पत्रकारिता संबंधी गतिविधियाँ।
- भारत में स्थित किसी भी विदेशी राजनयिक मिशन या विदेशी सरकारी संस्थान में इंटर्नशिप अथवा नौकरी।
- केंद्र सरकार या किसी संबंधित प्राधिकरण द्वारा संरक्षित, प्रतिबंधित अथवा निषिद्ध क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किसी भी क्षेत्र या स्थान का दौरा।
भारत में रहने के दौरान अब ओ.सी.आई. कार्डधारकों को किसी प्रकार का पंजीकरण नहीं करवाना पड़ता, लेकिन उन्हें अपने स्थायी निवास के पते या व्यवसाय में किसी भी बदलाव की सूचना ईमेल के माध्यम से एफ.आर.आर.ओ. को देनी होती है।
ओ.सी.आई. कार्डधारक को भारत में यात्रा करने के लिए हवाई या रेल का किराया भारतीय नागरिकों के समान ही भारतीय रुपये में अदा करना होता है। राष्ट्रीय संग्रहालय या अन्य ऐतिहासिक स्थलों पर भी उन्हें टिकट के लिए भारतीय नागरिकों के बराबर ही शुल्क देना होता है।
ओ.सी.आई. कार्डधारकों को अनिवासी भारतीयों के समान कुछ सुविधाएँ प्राप्त हैं, लेकिन उन्हें राजनीतिक अधिकार नहीं मिले हैं। उदाहरण के लिए, उन्हें मतदान करने या सार्वजनिक पद धारण करने का अधिकार नहीं है। ओ.सी.आई. अधिसूचना, 2021 के लागू होने के बाद ओ.सी.आई. कार्डधारकों के अधिकारों और सुविधाओं में और कटौती हुई है। हालाँकि, ओ.सी.आई. कार्डधारक अब भी अपेक्षाकृत स्वतंत्र रूप से भारत आ-जा सकते हैं, लेकिन 2021 की अधिसूचना ने नौकरी और पढ़ाई के अवसरों के मामले में उन पर कुछ अतिरिक्त प्रतिबंध लगा दिए हैं। नए नियमों और प्रतिबंधों को लागू करने तथा ओ.सी.आई. कार्डधारकों को विदेशी नागरिकों की श्रेणी में रखने से ऐसा लगता है कि भारत दोहरी नागरिकता की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय एक कदम पीछे हट गया है।
भारत सरकार ने ओ.सी.आई. कार्डधारकों के पासपोर्ट पर लगाए जाने वाले ‘U’ वीज़ा स्टिकर की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। आव्रजन प्राधिकरण भारत में प्रवेश करते या यहाँ से बाहर जाते समय ओ.सी.आई. कार्डधारकों से ‘U’ वीज़ा स्टिकर लगे विदेशी पासपोर्ट को दिखाने पर ज़ोर नहीं देंगे। उन्हें उनके वैध विदेशी पासपोर्ट और ओ.सी.आई. पंजीकरण प्रमाणपत्र (ओ.सी.आई. बुकलेट, जिसे ओ.सी.आई. कार्ड भी कहा जाता है) के आधार पर आव्रजन संबंधी अनुमति दी जाएगी।
ऐसे मामलों में, जहाँ उम्र बढ़ने के कारण आवेदक का चेहरा ओ.सी.आई. कार्ड पर लगी तस्वीर से अलग दिखाई देने लगता है, 20 वर्ष या उससे कम आयु के कार्डधारकों को प्रत्येक नए पासपोर्ट के जारी होने पर और 50 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद एक बार अपना ओ.सी.आई. कार्ड पुनः जारी करवाना होता है।
21 से 49 वर्ष की आयु के ओ.सी.आई. कार्डधारकों के लिए प्रत्येक नए पासपोर्ट के जारी होने पर ओ.सी.आई. कार्ड को पुनः जारी करवाना वैकल्पिक है। जो आवेदक इस सुविधा का लाभ उठाना चाहते हैं, वे ओ.सी.आई. की विविध सेवाओं (मिसलेनियस सर्विसेज़)के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
ओ.सी.आई. कार्डधारकों की नागरिकता में परिवर्तन होने की स्थिति में वे अपने ओ.सी.आई. कार्ड और नई नागरिकता के वैध पासपोर्ट के आधार पर भारत में प्रवेश या यहाँ से प्रस्थान कर सकते हैं। यह नियम पाकिस्तानी और बांग्लादेशी पासपोर्टधारकों पर लागू नहीं होता। ओ.सी.आई. कार्डधारकों को विविध सेवाओं के माध्यम से अपनी नई नागरिकता का विवरण भी अद्यतन करवाना होता है।
अब हम वापस इमरान ख़ान को जारी किए गए नोटिस की ओर चलते हैं। सवाल उठता है कि आखिर किस नियम के तहत उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का आदेश दिया गया है। इस पूरे मामले की शुरुआत भाजपा के पूर्व सांसद किरीट सोमैया की शिकायत के बाद हुई थी। सोमैया ने मुंबई पुलिस और एफ.आर.आर.ओ. को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि अमेरिकी नागरिक होने के नाते इमरान ख़ान का राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होना ओ.सी.आई. नियमों और वीज़ा की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।
इमरान ख़ान ने 10 अक्टूबर को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की माँग को लेकर हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। अगस्त क्रांति मैदान के पास बैरिकेड पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया था।
इसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। इमरान ने कहा कि बाद में उन्हें मीडिया से पता चला कि इस मामले में उनका नाम एफ़.आई.आर. में दर्ज है।
उनकी कानूनी टीम ने पुलिस से इलाके के सीसीटीवी फ़ुटेज उपलब्ध कराने की माँग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे प्रदर्शन में शामिल थे या नहीं।
यही नहीं, मुंबई स्थित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफ.आर.आर.ओ.) ने शनिवार को उन्हें दूसरा नोटिस भी भेजा। इसमें पूछा गया है कि उनका ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया (ओ.सी.आई.) कार्ड क्यों न रद्द कर दिया जाए। इमरान को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
समाचार यह भी है कि इमरान के मामा और फ़िल्म अभिनेता आमिर ख़ान ने राज ठाकरे से मुलाक़ात की है। ज़ाहिर है कि यह मुलाक़ात इसी सिलसिले में हुई होगी। ठाकरे परिवार का आज भी मुंबई की राजनीति में ख़ासा दख़ल है।
इमरान ख़ान दरअसल आमिर ख़ान की चचेरी बहन नुज़हत के बेटे हैं। उनका जन्म अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य में हुआ था। जन्म से ही इमरान के पास अमेरिकी नागरिकता और पासपोर्ट है। इमरान ओ.सी.आई. कार्ड के आधार पर ही भारत में अभिनय का काम कर रहे थे।
ऐसा कहा जा रहा है कि जिस व्यक्ति के पास विदेशी नागरिकता है और साथ ही ओ.सी.आई. कार्ड भी है, उसे भारत में किसी भी राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने की अनुमति नहीं है। मुंबई पुलिस के अनुसार, इमरान ने इन नियमों का उल्लंघन किया है। मुंबई पुलिस ने इमरान ख़ान के विरुद्ध दर्ज एफ़.आई.आर. में भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 (आदेश की अवहेलना), 126(2) (गलत तरीके से रोकना), 189(2) (ग़ैरक़ानूनी जमावड़ा) और 189(3) तथा 189(5) के तहत भी आरोप लगाए हैं।
मेरी निजी राय में पुलिस ने शायद अनावश्यक सक्रियता दिखाई है। ओ.सी.आई. नियमों में यह तो स्पष्ट है कि कार्डधारक को किसी राजनीतिक दल की सदस्यता नहीं लेनी चाहिए। कार्डधारक मतदान नहीं कर सकता और न ही चुनाव लड़ सकता है। मगर यह एक नई स्थिति है, जिस पर शायद स्पष्ट रूप से कुछ नहीं लिखा गया है।
इमरान ख़ान ने मुंबई उच्च न्यायालय में इस निर्णय के विरुद्ध अपील दायर की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने जब इमरान के वकीलों से पूछा कि क्या उन पर किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल होने का आरोप है या उनके विरुद्ध कोई दूसरा आपराधिक मामला चल रहा है, तो वकीलों ने बताया कि इस मामले में इमरान का रिकॉर्ड पूरी तरह साफ़ है। मुंबई उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को निर्धारित की है। उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
एक सवाल और… जो ओ.सी.आई. कार्डधारक ब्रिटेन में रहते हैं और उन्होंने ओवरसीज़ कांग्रेस, ओवरसीज़ भाजपा या अन्य भारतीय राजनीतिक दलों की सदस्यता ले रखी है, क्या भारत में उनके विरुद्ध भी एफ़.आई.आर. दर्ज की जा सकती है? क्या उनके ओ.सी.आई. कार्ड भी निरस्त किए जा सकते हैं?

अच्छी जानकारी दी है आपने।
मेरी बेटी और उसका परिवार आस्ट्रेलिया के नागरिक हैं और OCI कार्ड धारक भी।
इमरान खान के खबर के बाद मेरा ध्यान भी इस पर लगा हुआ था।
धन्यवाद
आपका स्वागत है रीता जी।
हम जैसे ठेठ भारतीयों के लिए तो ये एकदम नयी जानकारी है। ज्ञानवर्धक भी है।
लगभग सेवानिवृत्त अभिनेता ही सही मगर एक जाना पहचाना चेहरा है। इसीलिए उन पर कार्यवाही कर एक चेतावनी दी जा रही है कि – सावधान! आगे कोई जुर्रत न करे। अब सीजेपी, आइसा जैसे संगठनों यानि बर्रे के छत्तों से कितनों पर कार्यवाही करेंगे।
यह भी हो सकता है खुदेजा जी। चलिए इंतज़ार करते हैं।
हमारे लिए एकदम नई और विस्तृत जानकारी है। आपके हर सम्पादकीय का यही तो कमाल है, जो ज्ञान में वृद्धि होती रहती है। आभार तेजेंद्र जी।
और अंत में आपका सवाल कि ओ सी आई कार्डधारकों ने यदि किसी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता ले रखी है तो…… सत्ताधारी पार्टी की सदस्यता है तो कोई चिंता की बात नहीं।
मगर जिन्होंने विपक्षी दलों की सदस्यता ले रखी है, उनका क्या होगा।
ये ज़रूर चिंता का विषय हो सकता है।
तेजेन्द्र भाई: OCI को लेकर आपने बहुत अच्छी जानकारी दी और गहरे सवाल भी उठाए। हम दोनों ने सन 2009 में OCI ली थी। 2017 के बाद हमें भारत जाने का मौका नहीं मिला। इस मुद्दे को लेकर YouTube पर भी कुछ न कुछ नया सुनने को मिलता है और हर कोई क्लेम करता है कि उनकी जानकारी एकदम लेटैस्ट है। अस्लियत क्या है इस से सभी OCI वाले पूरी तरह से वाकिफ़ नहीं हैं।
यहाँ भारत सरकार को एक unsolicited advice है कि इस मामले को लेकर एक कमीशन नियुक्त करें और जो कुछ भी बदलाव या सुधार करना है उसे एक बार में ख़तम करें ताकि रोज़ रोज़ की इस किल्लत से उन लोगों को जिन के पास OCI है निजात मिले।
विजय भाई… आपका सुझाव वाजिब है।
कई बार मीडिया में कुछ ऐसा मुद्दा सामने आया है जो बेहद साधारण सा लगता है। यूं भी भारत में,,,सब चलता है ,,,का निष्क्रिय चलन एक ट्रेड मार्क की मानिंद भारतीय जनमानस पर चस्पा है,,जो काफी हद तक सत्य है?;?!
इस बार के संपादकीय का मुद्दा भी ठीक वैसा ही है,,सही सटीक और सारगर्भित रूप जानकारी दी गई है।यह जानकारी सम्बद्ध क्षेत्रों के अतिरिक्त युवा भारत पाठकों के लिए अनिवार्य है ताकि वे इस मुद्दे को समझ सकें कि उनका देश उनका आसमाँ अपना ही है,,,,,
सादर नमस्कार…
मेरे लिए यह एक नई जानकारी है… पर ज्ञानवर्धक है…
धन्यवाद…
हार्दिक धन्यवाद अनिमा जी।
सादर चरण स्पर्श
आपने तो संपादकीय के माध्यम से पूरी नियमावली ही स्पष्ट रूप से रख दी है
खैर नियम जो भी हो…..पर होगा वही जो पुलिस चाहती है बाद में कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए आप स्वतंत्र हैं। पर पुलिस आपको उलझा तो देगी इतना पावर तो है। पुलिस कानून से ऊपर नहीं है पर नीचे तो है ग्राउंड जीरो पर पुलिस की पॉलिसी मिलेगी यही आम नागरिक के साथ होता चला आ रहा है आजादी के पश्चात से। न्याय के लिए सीढ़ियां चढ़ना जरूरी है
सार्थक टिप्पणी के लिये स्नेहाशष शुभम।
आपने सही और अच्छी जानकारी दी और oci card पर
Court का भी रुख़ अभी clear नहीं
साधुवाद साधुवाद भ्राता श्री एक और अच्छे
लेख के लिए
धन्यवाद कपिल… मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है।
बेहतरीन जानकारी। लेकिन मामला राजनीति से निरपेक्ष होना चाहिए।
जी, यही सवाल मैंने उठाए हैं…
हमारे लिए एकदम नई और विस्तृत जानकारी है। आपके हर सम्पादकीय का यही तो कमाल है, जो ज्ञान में वृद्धि होती रहती है। आभार तेजेंद्र जी।
आपने तथ्यात्मक विश्लेषण करते हुये विषयगत जानकारी दी है। ‘ला आफ द लैंड’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। मगर इमरान का मामला जटिल है। न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा है। वैसे ऐसे नागरिकों को जिनके पास ओसीआई कार्ड है सजग रहना चाहिये और अस्पष्टता तथा मत वैभिन्य की स्थितियों में सरकार से स्पष्टीकरण/ यथावश्यक अनुमति के अनुसार बरतना चाहिये। संपादकीय का आखिरी हाईलाईटेड पैरा इस लिहाज से उल्लेखनीय है।
बिल्कुल नई जानकारी साझा करने हेतु आपका आभार सरकार देश की सुरक्षा हेतु नियम लागू करती है आपके आखिरी पंक्ति के सवालों का जवाब सरकार ही दे सकती है