संपादकीय - हाऊडी मोदी का मतलब 1
विदेश नीति के मामले में नरेन्द्र मोदी की यह एक बहुत बड़ी जीत है कि एक तरफ़ पाकिस्तान से इमरान ख़ान और उसके मंत्री कश्मीर, अनुच्छेद-370 और 35ए का शोर पूरी दुनियां में मचा रहे हैं और पूरे विश्व को न्युक्लियर बम का डरावा दे रहे हैं। वहीं नरेन्द्र मोदी और भारतीय सिविल सर्विस के अधिकारी तमाम देशों को भारत के पक्ष में खड़ा करने में सफल रहे हैं।

हो सकता है कि हमारे बहुत से मित्र हाऊडी मोदी के सही अर्थ से परिचित न हो। दरअसल अमरीका के राज्य टेक्सास में हाउ डु यू डू को बोलचाल की भाषा में हाऊडी कह दिया जाता है। अब क्योंकि कार्यक्रम का आयोजन ह्यूस्टन, टेक्सास में हो रहा है इसीलिये इस कार्यक्रम का नाम भी उसी अंदाज़ में तय किया गया है।

सच तो यह हे कि अमरीका की सौ से अधिक स्थानीय संस्थाएं पिछले तीन वर्षों से भारत के प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी को वहां आने का न्यौता देती रही हैं। मगर किन्हीं कारणों से आयोजन टल रहा था। अब क्योंकि पिछले दौरे पर नरेन्द्र मोदी और डॉनल्ड ट्रम्प ने विश्व को दिखा दिया है कि उनकी मित्रता दे-ताली वाली मित्रता बन चुकी है, तो संभवतः माना गया कि नरेन्द्र मोदी की यात्रा के लिये यह समय पूरी तरह से उपयुक्त है।

लगभग एक लाख भारतीय मूल के अमरीकी नागरिकों ने इस आयोजन में शामिल होने के लिये अपना नाम रजिस्टर किया और पचास हज़ार के कैपेसिटी वाले एन.आर.जी. स्टेडियम में तीन घन्टे इस नरेन्द्र मोदी शो को किसी रॉक-स्टार के शो से कम नहीं आंका जा रहा।

दरअसल पोप के बाद नरेन्द्र मोदी पहले ऐसे नेता हैं जिनके लिये इस स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। सच तो यह है कि प्रवासी भारतीयों में आजतक के सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में उभर कर आए हैं नरेन्द्र मोदी। हर भारतवंशी को विदेश में यही लगने लगा है कि नरेन्द्र मोदी के भारत का प्रधान मन्त्री बनने के बाद अपने अपनाए हुए देश में उसका सम्मान बढ़ गया है।

इस आयोजन की एक विशेषता यह भी है कि अमरीका में बसे कश्मीरी मूल के लोग भी मोदी के स्वागत के लिये यहां पहुंच रहे हैं। 

नरेन्द्र मोदी विदेशियों में कितने लोकप्रिय हैं, उसका अन्दाज़ आप मेरे साथ घटित एक छोटी से घटना से लगा सकते हैं। मुझे केन्द्रीय हिन्दी संस्थान का पद्मभूषण मोटुरी सत्यनारायण सम्मान जब मिला तो मैंने लंदन वापिस आकर अपने मित्र एन्ड्रू से कहा कि मुझे भारत के राष्ट्रपति ने सम्मानित किया है। उसने फ़ोटो दिखाने के कहा। जब मैंने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के साथ अपनी फ़ोटो दिखाई, तो उसकी प्रतिक्रिया ख़ासी विचित्र थी, “Oh, who is he?… I thought Modi gave you the award!” यानि कि नरेन्द्र मोदी विदेशों में भारत की पहचान है।

पाकिस्तान और पाकिस्तान समर्थकों ने इस आयोजन के विरुद्ध प्रदर्शनों की तैयारी शुरू कर दी थी। मगर डॉनल्ड ट्रम्प के इस समारोह में शामिल होने के कारण अब एफ़.बी.आई. और अन्य सुरक्षा एजेंसियां प्रदर्शनकारियों की अच्छी आवभगत कर लेंगी। 

विदेश नीति के मामले में नरेन्द्र मोदी की यह एक बहुत बड़ी जीत है कि एक तरफ़ पाकिस्तान से इमरान ख़ान और उसके मंत्री कश्मीर, अनुच्छेद-370 और 35ए का शोर पूरी दुनियां में मचा रहे हैं और पूरे विश्व को न्युक्लियर बम का डरावा दे रहे हैं। वहीं नरेन्द्र मोदी और भारतीय सिविल सर्विस के अधिकारी तमाम देशों को भारत के पक्ष में खड़ा करने में सफल रहे हैं। 

जहां भारत का आम नागरिक और प्रवासी भारतीय नरेन्द्र मोदी के ह्यूस्टन शो को लेकर अति-उत्साहित हैं, वहीं भारत के विपक्षी दल अपना रूदाली का किरदार पूरी शिद्दत से निभा रहे हैं। 

इसी दौरे से जुड़ी हुई एक और बात का ज़िक्र ज़रूरी है। मेलिंडा गेट्स फ़ाउण्डेशन ने भारतीय प्रधानमन्त्री को भारत के स्वच्छता अभियान के तहत गाँव गाँव में टॉयलेट बनाने के लिये सम्मानित करने का निर्णय लिया है। केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने अपने ट्वीट में कहा है कि –  ‘‘एक और अवॉर्ड, प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व करने का एक और मौका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेहनत और उनके प्रगतिशील कदम को पूरी दुनिया में सराहा गया। मोदी अपने अगले अमेरिकी दौरे पर बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन से स्वच्छ भारत अभियान के लिए अवॉर्ड लेंगे।’’

भारत, पाकिस्तान और अमरीका से करीब एक लाख लोगों ने मेलिण्डा गेट्स फ़ाउण्डेशन को लिखा है कि अनुच्छेद-370 समाप्त करने वाले नरेन्द्र मोदी को यह सम्मान नहीं मिलना चाहिये। भारत से ऐसा लिखने वालों में काँग्रेस समर्थक संजय झा और कविता कृष्णन शामिल हैं। चलिये हमेशा की तरह पाकिस्तान समर्थक भारतीयों ने यहां भी पाकिस्तान का साथ नहीं छोड़ा।

तेजेंद्र शर्मा
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.

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