ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
जिगर मुरादाबादी जी की ये पंक्तियाँ आज के प्रेमियों के लिए लिखी गयीं हैं। जिनको मुहब्बत पाने के लिए हर कदम ऐसे रखना पड़ता है मानो कोई सैनिक युद्ध स्थल में रखता है। एक गलत कदम और माइंस फटने का खतरा। इस इश्क के मैदान में जेब और कलेजा दोनों मजबूत ना हुए तो बन्दा पहले कदम पर ही धराशायी हो सकता है फिर ये तो सात कदम हैं। सात फेरों के बिना शादी अधूरी है और इन सात क़दमों के बिना मुहबब्त अधूरी है।
चौदह फरवरी को इश्क करने वालों का सबसे बड़ा त्यौहार होता है। ये त्यौहार पूरी दुनिया में धूम धाम से मनाया जाता है। उम्र या जाति को कोई बंधन नहीं दिल जवां होने से ही काम हो जाता है। इस त्यौहार बहुत से दिलों की तमन्नाएँ पूरी होती हैं । हर बाजार और दुकान पर बस प्रेम ही प्रेम सजा होगा। ऐसा लगता है मानो दिल ही दिल बिकाऊ है । हर तरफ लाल रंग के दिल ।

