हे कान्हा सबसे पहले तो हम आपको प्रणाम करते हैं..हमको पूरी आशा ही नही विश्वास भी है कि आपके घर पर सब सकुशल होंगे |
हे वंशीवाले हम बड़े ही दुखी मन से यह पत्र आपको लिख रहे हैं | क्या है कि हमारे देश में हम स्त्रियों का दुख समझने वाला कोई नहीं है | देश इस वक्त संकट में है उसे ज्यादा संकट में हम भारत की नारी हैं.. पहले हमने सोचा था कि संकट मोचन तो हनुमान जी हैं हम उन को पत्र लिखें पर क्या है कि वे तो ब्रह्मचारी हैं उनकी तो शादी ही नहीं हुई तो हम औरतों के दुख को कैसे समझ पाएंगे?
सो आपको लिख रहे आप तो तो बीवी बच्चे वाले हो, बहुत सारी पत्नियों को एक साथ हेंडल करते हो तो हम जैसी दुखिया का दर्द तो एक मिनट में हर लोगे | आप तो रहते हो बैकुंठ में और कष्ट आया है पृथ्वी पर ऐसा घोर कष्ट है कि हर कोई घर में कैद होकर रह गया है और इससे सबसे ज्यादा दुःख हम नारियों को झेलना पड़ रहा है | कैसे ? तो सुनिए.. पहले तो हमारे पति दिनभर ऑफिस चले जाते थे और बच्चे आधे दिन स्कूल फिर ट्यूशन और खेल कूद के लिए जाते थे और हम अपनी जिन्दगी बड़े ही आराम से जीते थे | कभी किट्टी पार्टी, कभी शोपिंग कभी आराम |

