सर्दी और हरियाली का आपस में ऐसा रिश्ता है जैसे सर्दी और कोहरे का या जैसे जय और वीरू का, एक के साथ दूसरे का आना तय होता है। इधर सर्दी ने दस्तक दी और उधर मंडी से लेकर थाली तक हरियाली ही हरियाली नजर आती है हर तरफ एक ही रंग देख लगता है मानो पडौसी देश का झंडा इधर ही घूमने निकल आया हो।
हरियाली की मारी भारतीय नारी हर तरफ हरियाली से घिरी नजर आती है ..सोसाइटी का पार्क हो ,या दरवाजे की खाट, आंगन का तख्त हो छत की चटाई हर जगह सिर्फ मटर छीलती, मैथी पालक तोड़ती नारी ही नजर आती है।

