एक सवाल यह उठाया जा रहा है कि विमान में अतिरिक्त पायलट क्यों मौजूद थे। चूंकि मैं इक्कीस वर्षों तक एयर इंडिया में काम कर चुका हूँ, इसलिए इसका जवाब देने में अपने आपको सक्षम पाता हूँ। लगभग हर एयरलाइन अपने क्रू को अलग-अलग शहरों में तैनात करती है, ताकि वे वहाँ से आगे की उड़ान का संचालन कर सकें। इन्हें ‘सुपरन्यूमरेरी’ क्रू मेंबर कहा जाता है। एयरलाइन की बातचीत की भाषा में ये ‘सूपी क्रू’ कहलाते हैं। जानकारी के अभाव में बहुत से बेवजह के सवाल भी उठाए जाते हैं।
‘पुरवाई’ के पाठकों को याद दिलाना चाहूँगा कि मैंने 21 वर्षों तक एयर इंडिया में केबिन क्रू के रूप में कार्य किया है। ज़ाहिर है कि ‘फ्लाईदुबई’ एयरलाइन की उड़ान संख्या FZ-1073 पर 30 सितंबर 2026 को जो घटित हुआ, उसमें मेरी रुचि एक संपादक के तौर पर भी होगी और एक पूर्व केबिन क्रू सदस्य के तौर पर भी। उस उड़ान पर जो कुछ भी हुआ, वह हमारी कल्पना-शक्ति के बाहर की बात है। एक को-पायलट विमान के कमांडर पर जानलेवा हमला कर सकता है, यह कल्पना करना भी कठिन है।
उस उड़ान के दौरान सच में क्या घटित हुआ, इस सबके बारे में तो कयास ही लगाए जा रहे हैं। इसकी पुख़्ता जानकारी तो शायद अभी किसी को भी नहीं है। मगर मोटे तौर पर जो बातें सामने आ रही हैं, वे एयरलाइन उद्योग के लिए किसी ख़तरे की घंटी से कम नहीं हैं।
जिस पायलट ने हमला किया, उसे ओमान का नागरिक बताया जा रहा है, जबकि जिस कमांडर पर हमला हुआ, वह भारतीय है। भारतीय कप्तान के नाम को लेकर बहुत से अलग-अलग उच्चारण देखने को मिले हैं। कोई ‘मच्छारा’ कह रहा है तो कोई ‘माच्छरा’, तो कहीं ‘माछरा’ भी लिखा जा रहा है। मैंने गुजरात में अपने सूत्रों से संपर्क किया। वहाँ बड़ौदा से साहित्यकार रिंकु चटर्जी ने मुझे बताया कि गुजरात में हिंदुओं की एक जाति ‘माछर’ होती है। तो रिंकु जी की बात को सही मानते हुए हम आपको बताना चाहेंगे कि फ़्लाइट 1073 के कमांडर कैप्टन स्मित माछर थे, जो मूलतः मुंबई के उपनगर घाटकोपर के रहने वाले हैं।
मीडिया में यह घटना सुर्ख़ियों में है और ऐसा होना भी चाहिए। ख़बरों में कहीं कहा जा रहा है कि विमान में 150 यात्री थे तो कोई सूत्र 180 की बात कर रहा है। ‘पुरवाई’ की जानकारी के हिसाब से विमान में 174 यात्री थे। (हम दावा नहीं कर रहे कि हमारी यात्री संख्या ही ठीक है।)
पहले तो हम अपने पाठकों को बताना चाहेंगे कि किस प्रकार की घटना घटित हुई, जो दुर्घटना में परिवर्तित हो सकती थी। ‘फ़्लाईदुबई’ की फ़्लाइट 1073 ने दुबई से 03.00 बजे (यूटीसी) पर उड़ान भरी और उसके बाद चौंतीस हज़ार फ़ुट की ऊँचाई पर क्रूज़ करने लगी।
करीब 05.21 बजे (यूटीसी), फ़्लाइट तेज़ी से नीचे की ओर गिरने लगी… अचानक फिर ऊपर उठी और फिर से गिरने लगी। 05.33 बजे तक विमान लगभग 15,000 फ़ुट की ऊँचाई पर स्थिर हो गया। इस बीच विमान की ऊँचाई 15,000 फ़ुट के आसपास ऊपर-नीचे होती रही और ज़मीनी गति में भी ख़ासा परिवर्तन होता रहा।
सऊदी-जॉर्डन बॉर्डर के पास उड़ते हुए विमान ने 05.28 (यूटीसी) पर ‘स्क्वॉक 7700’ सिग्नल एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल को भेजना शुरू कर दिया। यह एक ख़ास किस्म का कोड है, जिसे अंतरराष्ट्रीय उड्डयन क्षेत्र में ‘सामान्य आपातकाल’ यानी ‘जनरल इमरजेंसी’ बताने के लिए किया जाता है।
पश्चिम की ओर मुड़ने से पहले 05.35 बजे (यूटीसी) पर फ़्लाइट ‘स्क्वॉक 7500’ में बदल गई। यह भी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तयशुदा कोड है, जिसे ‘ग़ैर-क़ानूनी दख़ल’ या ‘हाईजैक’ के लिए इस्तेमाल किया जाता है। थोड़ी देर के लिए जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में जाने के बाद फ़्लाइट 180 डिग्री मुड़ी और फिर दक्षिण-पश्चिम में तबुक (सऊदी अरब) की ओर बढ़ गई।
यह सारी जानकारी तो ब्लैक बॉक्स के माध्यम से मीडिया ने हासिल की है और यह सच्चाई भी है। इसके अलावा जो सवाल सबके ज़हन में उभर कर आ रहे हैं, उनके बारे में पुख़्ता जानकारी का फ़िलहाल अभाव है।
पूर्व पत्रकार एवं राजनयिक दीपक वोहरा ने एक टीवी चैनल पर बातचीत के दौरान बताया कि उनके एक मित्र ने उन्हें बताया है कि उनका करीबी रिश्तेदार उस फ़्लाइट पर यात्रा कर रहा था। उस यात्री के अनुसार- कॉकपिट से ‘अल्लाह-ओ-अकबर’ का नारा सुनाई दिया और उसके बाद अफ़रा-तफ़री-सी मच गई।
अभी तक की अधिकांश जानकारी इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के हवाले से ही दी जा रही है। बीबीसी, सीएनएन और भारतीय टीवी चैनल आदि सभी उन्हीं सूचनाओं के आधार पर अपनी-अपनी कहानी सुना रहे हैं।
ऐसा कहा जा रहा है कि विमान के फ़र्स्ट ऑफ़िसर (को-पायलट) हमाम अल हमामी ने विमान के कमांडर पर कॉकपिट में ही रखी ‘क्रैश ऐक्स’ से जानलेवा हमला कर दिया। को-पायलट, जो कि ओमानी मूल का बताया जा रहा है, उसके बारे में यह आरोप लगाया जा रहा है कि उसके द्वारा “प्लेन क्रैश करने की कोशिश की गई।” इस ओमानी पायलट को सऊदी अरब में गिरफ़्तार कर लिया गया था और उससे पूछताछ की जा रही थी। ताज़ा सूचना के अनुसार इस पायलट को वापस दुबई भेज दिया गया है, जहाँ उससे आगे की पूछताछ की जाएगी।
पुरवाई के पाठकों को बताना चाहूंगा कि क्रैश ऐक्स का इस्तेमान ऐसे समय में किया जाता है जब कॉकपिट का दरवाज़ा किन्हीं कारणों से जाम हो जाए तो उसे तोड़ कर खोला जा सके। एक विमान में ऐसे दो औज़ार होते हैं – एक कॉकपिट में और एक केबिन क्रू के पास।

जानलेवा हमले के शिकार हुए कैप्टन स्मित माछर को इज़राइल के प्रधानमंत्री ने ‘हीरो’ करार दिया। उनके अनुसार माछर कॉकपिट का दरवाज़ा खोलने में कामयाब हो गए, जिससे यात्री हमलावर कैप्टन पर काबू पा सके। यह तब हुआ, जब विमान तेज़ी से नीचे की ओर जा रहा था।
संयुक्त अरब अमीरात के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ़ अल-शम्सी ने गुरुवार को इस घटना की जाँच के आदेश दिए। उनके ऑफ़िस के मुताबिक, जाँच टीम “घटना की सच्चाई, उससे जुड़ी परिस्थितियों, विवरण और मक़सद का पता लगाने के लिए जानकारी और सबूत इकट्ठा करेगी। साथ ही, यह भी जाँचेगी कि क्या इसका किसी आतंकवादी गतिविधि या मक़सद से कोई संबंध है, या फिर इसके लिए पहले से कोई योजना या निर्देश दिया गया था।”
सऊदी अरब के सरकारी टीवी चैनल ‘अल-एख़बारिया’ पर दिखाए गए तबुक एयरपोर्ट के बयान के मुताबिक, जहाँ प्लेन उतरा था, अधिकारियों ने बताया कि चोट लगने के बाद प्लेन के कैप्टन और फ़र्स्ट ऑफ़िसर को अस्पताल ले जाया गया।
बाद में सऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने घायल कैप्टन की पहचान भारतीय नागरिक स्मित माछर के तौर पर की। दूतावास ने बताया कि उनका तबुक के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, साथ ही, दूतावास उनके परिवार और सऊदी अधिकारियों के संपर्क में है।
आज यानी कि 2 अक्टूबर, जबकि महात्मा गाँधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्मदिन मनाया जा रहा है, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अस्पताल में इलाज करवा रहे भारतीय मूल के कैप्टन स्मित माछर के साथ वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत की। उन्होंने खुले दिल से कैप्टन स्मित की तारीफ़ की।
एक सवाल यह उठाया जा रहा है कि विमान में अतिरिक्त पायलट क्यों मौजूद थे। क्योंकि मैं इक्कीस वर्षों तक एयर इंडिया में काम कर चुका हूँ, तो इसका जवाब देने में अपने आप को सक्षम पाता हूँ। लगभग हरेक एयरलाइन अपने क्रू को अलग-अलग शहरों में तैनात करती है, जिससे कि वे आगे की उड़ान का संचालन कर सकें। इन्हें ‘सुपरन्यूमरी’ क्रू मेंबर कहा जाता है। एयरलाइन की बातचीत की भाषा में ये ‘सूपी क्रू’ कहलाते हैं। जानकारी के अभाव में बहुत से बेकार के सवाल भी उठाए जाते हैं।
जब हम भारत के टेलीविज़न चैनलों पर भिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को बहस करते देखते हैं तो पाते हैं कि वे इस ख़तरनाक हादसे पर भी राजनीति करते दिखाई देते हैं। भारतीय मूल के पायलट की तारीफ़ करने के मामले में भी अपने-अपने वोट बैंक का ध्यान रखा जा रहा है। यहाँ तक कि कुछ एक प्रवक्ता तो इस हिंसक गतिविधि के पक्ष में बोलने से भी नहीं चूके।
जब 9/11 का हमला हुआ था, उसके बाद भी बहुत से संदेह व्यक्त किए गए थे। मेरा दिल तो यह सोचकर ही दहल जाता है कि यदि यह विमान भी हादसा-ग्रस्त हो जाता और को-पायलट अपने प्रयास में सफल हो जाता तो कितनी बड़ी त्रासदी हो सकती थी।… मगर अब समय आ गया है कि संयुक्त अरब अमीरात और फ़्लाईदुबई एयरलाइन के अधिकारी उस ओमानी पायलट की जानकारी सार्वजनिक करें।
पहले हुआ करता था कि विमान अपहरणकर्ता कॉकपिट के बाहर हुआ करते थे और पायलट विमान को बचाने का प्रयास करते थे। आज के हालात पूरी तरह बदल गए हैं। पायलट अपहरणकर्ता हैं और यात्री विमान को बचाने का काम कर रहे हैं।… माँझी जो नाव डुबोए, उसे कौन बचाए!
मुझे निजी तौर पर केवल एक हैरानी हो रही है कि विमान पंद्रह हज़ार फ़ुट से अधिक नीचे की ओर झटके से गिरा, मगर विमान में एक भी ‘ऑक्सीजन मास्क’ खुला नहीं। मेरा अपना अनुभव कहता है कि ऐसे में ‘ऑक्सीजन मास्क’ स्वयं ही खुल जाने चाहिए थे। क्या कोई एविएशन विशेषज्ञ बता सकता है कि ऐसा क्यों हुआ होगा?
(पत्रिका पोस्ट होते-होते हमें उड़ान के ओमानी को-पायलट के बारे में जानकारी उपलब्ध हो गई है। उसका नाम है हमाम अल-हमामी है और उसकी आयु है 29 वर्ष। अल-हमामी ने अपना ज्यादातर जीवन ओमान के बाहर गुजारा था। इसमें एक लंबा हिस्सा सीरिया में भी बीता था। सूत्रों के अनुसार हमाम अल-हमामी को कट्टरपंथी विचारों के लिए ओमान की नेशनल एयरलाइंस ने बैन कर दिया था।)

दुनिया एक वैश्विक गांव में बदल चुकी है। कहीं की भी घटना उसकी जानकारी पूरे विश्व में पलक झपकते फैल सकती है। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि जो बेमिसाल खोजपूर्ण आलेख आपने लिखा है, उसे पूरे विश्व में बहुत से पत्रकार अपने-अपने देश में लिख सकते थे, लेकिन इस मामले में भी भारतीय सबसे आगे निकल गया। अपने आलेख में भी घटना की तथ्य पूर्ण निष्पक्ष और न्याय संगत विवेचना की है बल्कि बहुत से ऐसे पहलुओं पर से पर्दा उठाया है जिनके बारे में शायद अपने आप को खोजी खाने वाले पत्रकार कभी जानने की कोशिश भी नहीं करेंगे।
मुझे यह महसूस करते हुए गर्व होता है कि आप मेरे मित्र हैं।
संपादकीय घटनाक्रम का आँखों देखा हाल सा प्रतीत होता है। आपने अपने अनुभवों के आधार पर जो कुछ भी विश्लेषण किया है, सटीक और स्पष्ट रूप से जानकारी दे रहा है। मेरी एक पोस्ट में मैंने भी यह प्रश्न उठाया था कि हमलावर का नाम क्यों नहीं बताया जा रहा है। खैर अब तो नान पता चल ही गया है। आपने हमेशा की तरह शोध के साथ लिखा है। बहुत बहुत बधाई
अनीता जी आपकी जागरूकता और सदाशयता को मेरा भारत से प्रणाम।
यह संपादकीय 30 सितंबर 2026 की Flydubai FZ-1073 घटना पर आधारित है। तेजेन्द्र शर्मा ने अपने 21 वर्षों के एयर इंडिया केबिन-क्रू अनुभव के आधार पर घटना के तकनीकी और सुरक्षा पक्ष समझाए हैं। लेख में बताया गया है कि उड़ान के दौरान आपातकालीन संकेत दिए गए और कथित रूप से सह-पायलट ने कमांडर पर हमला किया, जिसके बाद विमान को सुरक्षित उतारा गया। लेखक अतिरिक्त ‘सुपरन्यूमरेरी’ क्रू की मौजूदगी और ऑक्सीजन मास्क जैसे सवालों पर भी चर्चा करते हैं। साथ ही वे अपुष्ट सूचनाओं और मीडिया अटकलों के बीच आधिकारिक जाँच की आवश्यकता पर जोर देते हैं। अंतिम प्रश्न यही है—जब खतरा भीतर से हो, तो विमान की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
डा विजय दीक्षित
आपने घटना का सही विश्लेषण किया है कि पहले जितनी भी आतंकवादी घटनाएं हुई हैं, आतंकवादी कोकपिट से बाहर होते थे। यह अपने किस्म की पहली घटना है जब को-पायलट ही आतंकवादी था और उसने पायलट पर जबरदस्त हमला किया। पायलट स्मित ने साहस और शौर्य का प्रर्दशन करते हुए कौकपिट का दरवाजा खोल दिया। अगर ऐसा न हो पाता तो सोच कर ही कॉलेजा दहल जाता है। स्मित ने प्रधानमंत्री मोदी जी को बताया कि वह संकट की उस गहन घड़ी में
हनुमान चालीसा पड़ रहा था। शायद इतनी भयानक घटना के बावजूद केपटन स्मित की सूझबूझ से एक भयानक हादसा होते होते बच गया।
इस समय सोशल मीडिया, टीवी चेनल और समाचार-पत्र इसी समाचार के बारे में ही लिख कह रहें हैं। भारत में अधिकांश लोग केपटेन स्मित के शोर्य की प्रसंशा कर रहे हैं। आप ने इसी घटना को अपने संपादकीय का विषय बनाया, आपके अपने अनुभव को भी सबके साथ शेयर किया। आपको साधुवाद।
वैसे आतंकवाद की समस्या पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है। भारत आतंकवादी समस्या का भुक्तभोगी है। वैसे अमेरिका भी तो इस समस्या को 9/11वाले बहुत बड़े हादसे से गुजर चुका है। प्रधानमंत्री मोदी हर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस समस्या को उठा कर पूरे विश्व का इस ओर ध्यान दिलाते रहते हैं। पूरे विश्व के देशों को इस। समस्या के समाधान करने का प्रयास करना चाहिए।
जितेन्द्र भाई: अभी हाल ही में हुई घटना के बारे में जो बातें आप ने बताई हैं उसके लिए बहुत बहुत साधुवाद। बहुत सी जानकारी के लिए यहाँ आपके एयर इञ्डिया के अनुभव बहुत काम आए। क्योंकि अभी पूरी मामले की जाँच हो रही है इसलिए असलीयत क्या है उस में शायद कुछ समय लगे। यहाँ आप से मेरा यह सवाल है कि किस फ्लाइट पर कौन कौन सा क्रू होगा इसका फैसला कौन करता है और क्रू के फाइनल करने से पहले यह नहीं देखा जाता है की क्रू का background क्या है। यह जानते हुए भी कि इस ओमानी को-पायलेट को कट्टरपंथी विचार होने के कारण सीरिया ने निकाल दिया था, दुबई ने अपने स्टाफ़ में क्यों लिया और फ़िर उसको इज़राइल जाने वाली फ़्लाइट पर क्यों भेजा? मैं ने तो एक जगह ख़बरों में पढ़ रहा था जहाँ पर इस उड़ान पर इसे भेजने को भी शक की निगाह से देखा जारहा है और साज़िश का नाम दिया जारहा है। और इस साज़िश की वजह अरब देशौं कई और इज़राइल की शत्रुता हो सकती है। सच क्या वो तो बहुत जल्दी सामने आजाएगा।
Very informative editorial sir. जो इस क्षेत्र से जुड़े हैं केवल वही इतनी बारीकी से तकनीकी जानकारी दे सकते हैं वरना हम तो उन्हीं को सच समझ लेते हैं जो सोशल मीडिया के ख़बरों में तैर रहे हैं l आपके इस पोस्ट ने नए सिरे से सोचने की भूख बढ़ा दी l सवाल तो genuine है कि विमान में अतिरिक्त पायलट क्यों थे?
हमेशा की तरह बहुत ही तार्किक संपादकीय sir. साधुवाद आपको l