Monday, August 17, 2026
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हिंदी साहित्य की शोभा बढ़ाते जाने अनजाने छंद: कवनीत कुंज

पुस्तक : कवनीत कुंज (छन्द बद्ध गीत संग्रह), कवि : डॉक्टर अर्जुन गुप्ता ‘ गुंजन’, प्रकाशक : निर्मल प्रकाशन,चरखी दादरी हरियाणा, मूल्य ₹300 /-
समीक्षा : सूर्यकांत शर्मा

हिंदी भाषा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावपूर्ण ढंग से उकेरी जा रही है। इसी क्रम में वागीश अंतरराष्ट्रीय संस्था,दुबई, यूएई के सौजन्य से यह छंदबद्ध गीत संग्रह प्रकाशित किया गया है।यह संस्था हिन्दी साहित्य,संस्कृति और भारतीयता के प्रचार प्रसार को समर्पित है।

चयन समिति के निर्णय के पश्चात ही उच्च गुणवत्ता पूर्ण रचनाओं और संग्रह का प्रकाशन होता है। पुस्तक की भूमिका में ही इस संस्था की अध्यक्ष डॉ आरती ‘लोकेश’ की भूमिका से ही पाठकों को इसकी सूचना मिल जाती है। पुस्तक के शुभकामना संदेश और कवि डॉ अर्जुन गुप्ता के दो शब्द से इस समूचे काव्य संग्रह का ब्लू प्रिंट दर्शित होने लगता है। श्रीमती शकुंतला मित्तल ने प्रभावी रूप से काव्य संग्रह का सूक्ष्म परंतु संक्षिप्त और प्रदीप्त करना वाला वर्णन किया है।

वास्तव में यह गीत संग्रह हिंदी साहित्य की शोभा बढ़ाते जाने अनजाने छंदों के अंतर्गत किया गया एक बेहद श्रमसाध्य कार्य है।हिंदी साहित्य में जहाँ छंदमुक्त कविता और ऐसी हो रचनाओं का बोलबाला है,अतः ऐसे में सरसी, दुर्मिल सवैया, कुकुभ,चौपाई,सार छन्द, राधेश्यामी,लावणी,प्रदीप, सार ललित पद छंद,दिगपाल/मृदुगति छंद,गीतिका छंद,चण्डिका छंद,मात्रा भार १६,१४, ताटंक,साधना मनोरम, शैल के शब्दानुशासन में बंधी रचनाओं का संसार कुल ५४गीतों और १२०पृष्ठों में काव्य सौष्ठव की चाँदनी फैली हुई है।यूं भी हिंदी साहित्य में गीत विधा पूर्णिमा के चंद्रमा की मानिंद है और जन जन के हृदय में कभी समाहित तो कभी निकट रही है।गीत की गेयता,भाव सघनता और संगीतात्मकता काव्य का सशक्त माध्यमौर मानवीय संवेदनाओं की जीवंत अभिव्यक्ति रहे हैं।तभी तो आम जन से लेकर अभिजात्य वर्ग तक सभी के सभी कभी न कभी बरबस अपने प्रिय गीतों को गुनगुनाते अवश्य रहे हैं।यह काव्य संग्रह यथा नाम तथा गुण की तर्ज़ पर ऐसी काव्य उपवन की अनुभूति कराता है जिसमें विविध रंगों और सुगंधों से युक्त गीत पुष्प अपनी पूरी आभा के साथ खेले हुए हैं।

यूं भी किसी कवि ने सच ही कहा है कविता हृदय की अनुभूति का संगीत है और यही उत्तर ब्रह्म वाक्य संग्रह की आरंभिक गीत में विशेष रूप से दर्शनीय है उदाहरण स्वरूप चमक चमक कर निर्झर नाच बज उठी शहनाई। ऋतु वर्णन की छटा कुछ यूं बयां हुई है,,, बहु विधि वसंत के आंगन में फागुन आकर फिर चला गया।

राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत रचनाओं में ओजस्विता और आत्म गौरव का स्वर रचना मैं भारत हूँ,भारत हूँ मैं,,में स्पष्ट सुनाई देता है,बानगी कुछ यूं है

भारत हूँ मैं,भारत हूँ मैं
नित अपना मर्म सुनाता हूँ
गौरवशाली जीवन की मैं
तुमको नित याद दिलाता हूँ।

वहीं पर्यावरण के प्रति संवेदनशील चेतावनी भी अत्यंत प्रभावशाली बन पड़ी है।

“काट रहे हो जब पेड़ों को मेघ कहां से बरसेंगे।”

यह पंक्ति आने केवल पाठकों को जागरूक करती हैं बल्कि सामाजिक दायित्व का बोध भी कराती हैं।इस कृति की सबसे चमकदार उपलब्धि छंद सौष्ठव है जो आजकल,अधिकतर काव्य संग्रहों में या तो प्रच्छन्न रूप में है या फिर नगण्य हो गया है।

यदि पाठकों को बताने और उन्हें इस काव्य संग्रह को पढ़ने हेतु उत्साहित करने की दृष्टि से देखें तो समग्र है अवनीत कुंज एक ऐसा गीत संग्रह है जो परंपरा और समकालीनता के मध्य एक सेतु सा है और पाठक को भाव,रस और विचार तीनों स्तरों पर समृद्ध करता है।

यह पुस्तक संग्रह पाठकों को निश्चित रूप से पसंद आने वाली पुस्तकों की श्रेणी में आ सकता है।

  • सूर्यकांत शर्मा
    पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रसारणकर्मी
    सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
    मानसरोवर अपार्टमेंट फ्लैट बी1 सेक्टर 5 प्लॉट नंबर 3 द्वारका नई दिल्ली 110075 मोबाइल 798 2620596
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4 टिप्पणी

  1. कवनीत कुंज पर प्रस्तुत समीक्षा यह स्पष्ट करती है कि डॉ. अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’ ने छंदबद्ध गीत परंपरा को समकालीन संवेदनाओं से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया है। आज जब मुक्तछंद का प्रभाव अधिक दिखाई देता है, ऐसे समय में विविध पारंपरिक छंदों में रचित गीतों का एक संपूर्ण संग्रह प्रकाशित होना हिंदी काव्य-जगत के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। समीक्षा में संग्रह की विषय-विविधता—प्रकृति, राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण, मानवीय संवेदना तथा सांस्कृतिक चेतना—का संतुलित परिचय दिया गया है। उद्धृत पंक्तियाँ कवि की भावाभिव्यक्ति और छंद-साधना दोनों का प्रमाण प्रस्तुत करती हैं।

    यद्यपि समीक्षा मुख्यतः प्रशंसात्मक है, फिर भी यदि इसमें कुछ रचनाओं की सीमाओं, भाषा-शिल्प की चुनौतियों अथवा तुलनात्मक साहित्यिक दृष्टि का भी संक्षिप्त उल्लेख होता, तो इसकी आलोचनात्मक निष्पक्षता और अधिक प्रभावी बन सकती थी। इसके बावजूद समीक्षक ने पुस्तक की विशेषताओं को सरल, प्रामाणिक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। समग्रतः यह समीक्षा पाठकों में कवनीत कुंज के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करती है तथा छंदबद्ध गीत-साहित्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए इस कृति को हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में स्थापित करती है।

    आचार्य प्रताप

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