ऑफिस की दीवार में लगी घड़ी में यही कोई दोपहर के 3:00 बजे का समय होगा, प्रमोद घड़ी को देखते हुए ऑफिस के काम को जल्दी खत्म करने की सोच ही रहा था कि “तब तक टेबल पर साइलेंट मोड में रखा उसका मोबाइल फोन झनझनाने लगा। काम छोड़ मोबाइल को उठाकर ‘हेलो ‘बोल ही पाया था कि उधर से छोटा भाई बड़े ही अधीर पन से बोला “भैया अब तो पिताजी की तबीयत दिनों-दिन खराब होती चली जा रही है ऐसा लग रहा है कि वह आखरी सांसे ले रहे हैं ,उनकी आखिरी इच्छा आपको देखने की रह गई है।” इतना सुनते ही प्रमोद अंदर तक हिल गया और बोला ठीक है ऑफिस से छुट्टी मिलते ही मैं जल्दी आने की कोशिश करता हूं, तब तक पिताजी का अच्छी तरह ख्याल रखना हो सके तो उन्हें शहर के किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती कर लो, और हां! रुपए पैसे की चिंता मत करना वह सब मैं आकर संभाल लूंगा।”
मोबाइल को काटने के बाद प्रमोद ने हड़बड़ाहट में ऑफिस का काम तो खत्म कर लिया लेकिन अंदर ही अंदर उसको यही चिंता खाए जा रही थी कि “पता नहीं ऑफिस से छुट्टी मिलेगी या नहीं।” फिर भी प्रमोद ने अपने सर को छुट्टी का आवेदन देते हुए अपने पिताजी की तबीयत के बारे में बताया तो उसके सर उसको छ: दिन की छुट्टी देने के लिए तैयार हो जाते हैं।
प्रमोद ऑफिस से आने के बाद हर रोज फ्रेश होने के बाद अपने दोनों बच्चों के साथ खेलता और पत्नी निहारिका के साथ बैठकर चाय की चुस्कियां लिया करता था, लेकिन आज ऑफिस से लौटने के बाद उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया तो निहारिका ने पूछा “आज आपकी तबीयत तो ठीक है ना!”
प्रमोद अपने माथे पर हाथ रखता हुआ बोला” मेरी तबीयत को क्या हुआ? मैं तो एकदम बिल्कुल ठीक हूं।” फिर गहरी सांस लेता हुआ बोला “गांव में पिताजी की तबीयत का कुछ भरोसा नहीं रहा इसलिए हम सबको गांव बुला रहे हैं।” तभी निहारिका ने कहा “मैं गांव नहीं जाऊंगी और फिर वहां बच्चे भी बहुत परेशान हो जाते हैं, गांव की गंदी भाषा भी सीखने लगते हैं,……………. ऐसा करो आप अकेले ही गांव चले जाओ हम लोगों को क्यों परेशान करते हो।”
इतना सुनते ही प्रमोद की आंखें भर आई और अनमन होकर बोला ” ठीक है आज मेरे पिताजी की तबीयत खराब है, भगवान ना करे कल तुम्हारे पिताजी को कुछ हो जाए तो क्या तुम इसी तरह बहाना बनाकर मना कर दोगी? नीलू पिताजी की इच्छा हम सब से मिलने की हो रही है फिर दो-चार दिन की बात है वापस यहीं लौट कर आना है हमें कौन सा गांव में बसना है?” अब नीलू को कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं हुई और चुपचाप गांव जाने की तैयारी करने लगी। सुबह होते ही प्रमोद अपने गांव के लिए निकल आया।
गांव आकर उसने देखा कि पिताजी को देखने वालों का जमघट लग रहा है, कुछ रिश्तेदार उन्हें देकर वापस हो लिए है। वह तुरंत गाड़ी से उतरकर उनके पैरों में आ गिरा अब तो पिताजी ना कुछ बोल सकते हैं ,ना सुन सकते हैं, बस एकटक देखे ही जा रहे हैं उनकी ऐसी हालत देख कर ‌रोआसे कंठ से बोला” देखो पिताजी! आपके दोनों नाती और बहू आपसे मिलने के लिए आए हैं आप हैं कि कुछ बोलते ही नहीं बस एक बार भगवान के वास्ते कुछ तो बोलिए पिताजी।” प्रमोद उन्हें बार-बार हिलाता हुआ यही बोलता रहा कुछ तो बोलिए पिताजी कुछ तो………
निहारिका और दोनों बच्चों ने भी बात करने की कोशिश की लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रहे थे। इसी बीच कुछ पड़ोसियों ने कहा “मरने वाले को गाय की बछिया दिला दो तो उनके कुछ कष्ट कम हो जाते हैं ,एवं उनके हाथों से कन्या को दान पुण्य कराने से स्वर्ग की खुली खिड़की मिलती है, एवं उनकी आत्मा को भटकना नहीं पड़ेगा।”
फिर पंडित जी को बुलाकर यह सब कर्मकांड पूरा किया गया तब कहीं जाकर दूसरे दिन पिताजी ने अंतिम सांस ली। घर के अंदर महिलाओं का रोना शुरू हो गया और बाहर पुरुषों का जमघट लगने लगा इसी बीच सारे रिश्तेदारों को भी फोन लगाने की परंपरा जो चल पड़ी है कि “पिताजी अब इस दुनिया में नहीं रहे” फोन का जमाना है इसलिए उसी दिन सबको बताना आवश्यक हो जाता है। लेकिन प्रमोद का छोटा बेटा यह सब नहीं समझ पा रहा था कि घर में क्या हो रहा है? घर में इतनी भीड़ क्यों हो रही हैं? यह घटना उसके लिए एक दम नई थी। उसे समझा कर बताने वाला इस समय कोई नहीं था, वह अपनी मम्मी से कुछ पूछता तो मम्मी खुद ही रोए जा रही थी इसलिए उसने मम्मी के फोन का पूरा फायदा उठाते हुए अपना मनपसंद कार्टून देखने में व्यस्त होने की कोशिश करता तो बीच-बीच में मोबाइल से ध्यान हटा कर उन महिलाओं को भी देखने लगता जो रोने का बहाना करते हुए बुरी तरह से चिल्ला रही हैं ,कुछ महिलाएं आपस में बातें कर रही हैं, तो कुछ बीड़ी पी रही हैं, कुछ महिलाएं फोन पर बातें कर रही है जैसी उन्हें बात करने के लिए आज ही फुर्सत मिली है, कुछ औरतें अपनी बहू और रिश्तेदारों की बुराई करने में व्यस्त हैं, तो कुछ…………. इस तरह के उसने बहुत सारे नजारे देखें।
तभी उसने देखा कि “सब लोग बाबा जी को जलाने के लिए ले जा रहे हैं वह भी गा बजाकर तो उसके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा।”
अब तो उसका फोन में भी मन नहीं लग रहा था उसकी नन्ही नन्ही आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली और मम्मी की गोद में फबक -फबक कर होने लगा नीलू बेटू को शांत कराने की कोशिश करती रही ,पर वह लड़का किसी की भी नहीं सुन रहा था बस रोए ही जा रहा था। तब प्रमोद ने उसको नीलू की गोद से उठाकर शांत कराया और अपने साथ दाह संस्कार में भी ले गया। बेटू वहां दूर खड़ा सब चुपचाप देखता रहता है।
शाम को सब लोग नहा धोकर, खाना खाकर, गर्मी की वजह से सोने के लिए घर की छत पर पहुंचकर बातें करने लगते हैं तभी बेटू भी अपनी मम्मी के साथ आ कर लेट जाता है लेकिन उसको अभी नींद नहीं आ रही थी इसलिए करवट बदलते हुए मम्मी से बोला ” हम लोग अपने घर कब जाएंगे ? तभी नीलू ने उसके माथे पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा “यह भी तो अपना ही घर है अब तो बाबा की आत्मा की शांति के लिए हम लोगों को तेरह दिन तो यहां रुकना ही पड़ेगा तभी बेटू बोला “मम्मी तेरह दिन कितने होते हैं? नीलू ‘थर्टीन डे ‘ अच्छा तो हमारे बाबा थर्टीन डे बाद क्या वापस आ जाएंगे? बेटू बड़ी ही मासूमियत के साथ बोला। नीलू ने उसको अपनी बांहों में भरते हुए कहा ” नहीं बेटा ऐसा नहीं होता जो भगवान के पास चले जाते हैं वो कभी वापस नहीं आते ” बेटू नीलू से दूर गुस्सा होकर बोला “नहीं! तो फिर कल ही अपने घर चलते हैं मैं यहां बोर हो जाता हूं। नीलू को अब समझ में नहीं आ रहा था कि उस लड़के को कैसे समझाए? तभी उसने बेटू को अपनी ओर समेट हुए कहा ” अच्छे बच्चे जिद नहीं करते, तू तो मेरा राजा बेटा है, अपने मम्मा की हर बात मानता है तुझे पता है! अभी तो अपने यहां बाबाजी के लिए रोने वाले आएंगे तो उनके साथ बैठकर मुझे भी तो रोना पड़ेगा।”
मम्मा अब कौन-कौन आएगा ? बेटू प्रश्नों की बरसात सी करता हुआ बोला ” आज मैंने देखा तो कोई भी औरत नहीं रो रही थी सब बातें करने में बिजी थी और कुछ औरतें……….. तब तक बेटू की बुआ पसीना पौछते हुए , हाथ से पंखा चलाते हुए उसके बगल मैं लेटते हुए जोर से हवा करते हुए बोली ” बेटा !आजकल कोई किसी के लिए नहीं रोता ,औरतों का रोना तो मगरमच्छ के आंसू बहाने जैसा है, औरतें एक जगह चुपचाप बैठ भी तो नही सकती, और फिर जिसका मरता है वही एक दो दिन तक आंसू बहाता है ,फिर तेरह दिन तो केवल फॉर्मेलिटी पूरी करके सब लोग अपने अपने घर चले जाते हैं ।तभी बुआ ने छमाई लेते हुए कहा “वैसे भी आजकल की औलाद अपने माता-पिता के साथ कहां रहना चाहती हैं लेकिन जब ऐसी दुखद घटना पर आते हैं तो उनका दाह संस्कार एवं मृत्यु भोज बड़े ही धूमधाम से करते हैं जैसे कि उन्होंने उनकी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति दिला दी हो जीते जी तो उनसे कभी मिलने नहीं आते उनकी खबर तक नहीं लेते कि कैसे जी रहे हैं?” नीलू के जी में आया क्यों न दीदी से कह दूं “कि आप खुद शादी के दो साल बाद ही अपने सास-ससुर से अलग हो गई थी ,आपने कौन सी उनकी देखभाल की ?अब आपकी खुद की औलाद आप से अलग हो गई तो बहुत दुख होता है ,अब कहती फिरती है कि आजकल की बहु -बेटा बहुत खराब है।” नीलू ने चारों ओर फैले हुए सन्नाटे का हवाला देते हुए कहा “दीदी वैसे भी बहुत रात हो चुकी है और आप कैसी बातें लेकर बैठ गई हो बेटू अभी इन सब बातों को नहीं समझता।” मम्मी मैं तो एक गिलास दूध रोज पीता हूं, इसलिए मैं कुछ दिनों में बहुत बड़ा हो जाऊंगा अब मैं इतना भी छोटा नहीं हूं। बेटू के मुंह से ऐसी बात सुनकर बुआ और नीलू को हंसी आ जाती है। बेटू कुछ सोचता हुआ धीरे से कहता है “मम्मा आपने और पापा ने भी तो बाबा को अपने साथ नहीं रखा ना उनकी देखभाल की,अब तेरह दिन यहां रहने से क्या फायदा?”
नीलू शकपकाती हुयी बोली “नहीं बेटा ऐसी कोई बात नहीं हमने तो आपके बाबा से फोन पर बहुत बार कहा था शहर आने के लिए लेकिन आपके बाबा गांव से जुड़े होने के कारण गांव से अलग नहीं होना चाहते थे और फिर गांव में तुम्हारे चाचा चाची और उनके बच्चे भी थे उनकी देखभाल करने के लिए इसलिए तुम्हारे पापा ने जबरदस्ती उन्हें शहर आने के लिए कभी नहीं कहा, इतना कहते-कहते निहारिका की आंखों से आंसू बहने लगे।” बेटू निहारिका के आंसू पोछते हुए’सॉरी’ कहते हुए बोला ” मम्मी मैंने सुना है कि जो भगवान के पास चले जाते हैं वह ‘तारा ‘बन जाते हैं क्या यह सच है? अब क्या मेरे बाबाजी भी ‘चमकता तारा’ बन जाएंगे? नीलू ने उसका मुख चूमते हुए आसमान की ओर इशारा करते हुए कहा “आसमान में जितने भी तारे हैं सब किसी न किसी के दादा दादी नाना नानी…………. और हां! इनमें से जो एक तारा ज्यादा चमक रहा है वही आपके बाबा जी हैं अब वह आपको रोज आसमान से देखा करेंगे, बेटू की नाक खींचते हुए अब चलो सो जाओ सब लोग सो चुके हैं, नीलू भी करवट लेकर सो जाती है।
बेटू भी ठंडी ठंडी हवा के झोंको से शांत आसमान में उस ,चमकते तारे ,को देखते देखते पता ही नहीं चला कब सो गया।
सहायक प्राध्यापक हिंदी शासकीय महाविद्यालय महगांव भिंड संपर्क - girijanarwaria82@gmail.com

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