कुलदीप दहिया “मरजाणा दीप” की ग़ज़ल – वही सोने की चिड़िया वाला मेरा हिंदुस्तान कर दे
ए भारत माँ फिर से एक एहसान कर दे
मुझे चुभती हैं नस्तर सी ये ख़ार की नस्लें
कर कोख़ से पैदा फिर राजगुरु,सुखदेव,भगतसिंह
बहुत सह चुके अब अखरते हैं दिल को दगाबाज़ ये
खरपतवार नफ़रतों की ना ये फिर से पनप जाये
कल-2 करते झरने,नदियाँ महके पीले सरसों के फूल
जलते रहें “दीप” खुशियों के सदाआँगन में यूँ ही
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