होमग़ज़ल एवं गीतअलका मिश्रा की ग़ज़ल : दिल लगाता है अर्ज़ियाँ अक्सर ग़ज़ल एवं गीत अलका मिश्रा की ग़ज़ल : दिल लगाता है अर्ज़ियाँ अक्सर By Editor July 4, 2019 1 322 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp अलका मिश्रा तोड़ देती हैं बेड़ियाँ अक्सर क़ैद में रह के बेटियाँ अक्सर चीर देती हैं दिल के दामन को तंग ज़ेह्नों की बर्छियां अक्सर ख़्वाब आँखों में छोड़ कर आधे जाग जाती हैं लड़कियाँ अक्सर ज़ह्र रिश्तों में घोल देती हैं सख़्त लहजे की तल्खियां अक्सर नाम पर्ची पे उसका लिख लिख के दिल लगाता है अर्ज़ियाँ अक्सर जब भी सोचूँ मैं उसके बारे में याद आती हैं खूबियाँ अक्सर ज़िन्दगी औरतों को देती हैं घर की छोटी सी खिड़कियाँ अक्सर दिल में चुभती हैं आज भी मेरे टूटे रिश्तों की किर्चियाँ अक्सर Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखमुकेश कुमार सिन्हा की पांच कविताएँअगला लेखसंदीप तोमर का व्यंग्य – पड़ोस उवाच Editor RELATED ARTICLES ग़ज़ल एवं गीत आशुतोष कुमार की ग़ज़लें June 27, 2026 ग़ज़ल एवं गीत पद्मश्री अशोक चक्रधर की तीन ग़ज़लें June 27, 2026 ग़ज़ल एवं गीत ज्ञान प्रकाश विवेक की ग़ज़लें June 27, 2026 1 टिप्पणी बढ़िया प्रस्तुति, जवाब दें कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 आशुतोष कुमार की ग़ज़लें June 1, 2024 अपनी बात…… April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest यूरोप में गर्मी का कहर… July 4, 2026 फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसाइटी इंटरनेशनल (FISI UK) की स्वर्ण जयंती June 30, 2026 समय, समाज और प्रतिरोध का त्रिकोणीय चक्र- ‘घटती ज़िन्दगी का अहसास’ June 27, 2026 लोकप्रियता के बावजूद गंभीर नहीं हो पाया आधुनिक दकनी गद्य June 27, 2026 और अधिक लोड करें
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