Tuesday, October 6, 2026
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डॉ. शिवनारायण की ग़ज़लें

1.

कदम-कदम पर लाखों छल
भीड़ बहुत है धीरे चल

सारे ख़त को खोलें हम
शायद कोई निकले हल

हर दिल यह क्यों सोच रहा
कैसा होगा अपना कल

होंठों पर मुस्कानें हैं
आंखें लेकिन हैं जल-थल

मुमकिन है ‘शिव’ टपक पड़े
आंखों का यह गंगाजल!

2.

वक्त को तुम करीब आने दो
अपना किस्सा उसे सुनाने दो

तुम मुझे आईना दिखा देना
पहले थोड़ा सा मुस्कुराने दो

मेरे होंठों पे चंद नग़में हैं
जी में आये तो गुनगुनाने दो

भाग आया है अपने घर से वो
राज क्या है उसे बताने दो

कितना तन्हा रहा है ‘शिव’ सोचो
घर नया अब कोई बसाने दो!

3.

रात है और चांदनी भी है
मेरे हिस्से में रोशनी भी है

ये न समझो कि सिर्फ खुशियाँ हैं
साथ में अपनी बेबसी भी है

कोई होता नहीं मुकम्मल भी
हर किसी में कोई कमी भी है

तुम मुझे मौत ही नहीं देना
मेरे हिस्से में जिंदगी भी है

‘शिव’ ने समझा है रात को इतना
तीरगी है तो रोशनी भी है!

  • ‌‌‌‌डॉ शिवनारायण
    305, अमन अपार्टमेंट
    शांति निकेतन कालोनी
    भूतनाथ रोड
    पटना–800026 (बिहार, भारत)
    मो. +91 9334333509
    ईमेल: [email protected]
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