Sunday, July 26, 2026
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डॉ साधना बलवटे का व्यंग्य-नैन छिन्दन्ति

नैनं छिंदति शस्त्राणि……….
यमराज बहुत दिनों के बाद यमलोक का राउंड लेने के लिए निकले थे। वैसे तो चित्रगुप्त का हिसाब किताब एकदम ठीक रहता है। किंतु कुछ उड़ती उड़ती शिकायतों के कारण उन्हें औचक दौरा करना पड़ा था।

चित्रगुप्त अपनी लाल चौपड़ी लेकर उपस्थित थे। आवक-जावक का पूरा लेखा-जोखा एकदम चोखा था। आगे के  कक्ष में बड़े-बड़े कढ़ाहों में तेल उबल रहा था। किन्तु आश्चर्य! उसमें पड़ी आत्माएँ चीख नहीं रही थी। यमराज को संदेह हुआ तेल बराबर गरम है, कि नहीं उन्होंने उंगली डालकर देखा तो उनकी चीख निकल गई और उंगली तेल में ही पिघल गई किंतु तसल्ली हो गई बायलर बराबर काम कर रहा था।

चित्रगुप्त बोले , महाराज आपका कितनी बार आना जाना पृथ्वी पर हुआ है,फिर भी इतनी सी बात नहीं सीखी कि इस तरह के काम अपने अधीनस्थों से कराए जाते हैं चित्रगुप्त की बात सुनकर साथ में चल रहे यमदूत सिहर गए।

अगला कक्ष  कीलों वाले बिस्तरों का था। आत्माएँ कीलों की शय्या पर बड़े मजे से  लेटी थी मानो फूलों पर लेटी हो। घोर सन्नाटा न आह न उह। यमराज ने कीलें चेक करने की गलती नहीं की। यमराज ने गौर किया पूरे यमलोक की लगभग यही दशा है। कोड़े मारने वाले हांफ रहे थे आत्मायें थी कि टस से मस नहीं हो रही थी।स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने तुरंत जाॅंच बिठाई और सभी जिम्मेदारों को तलब किया।

चित्रगुप्त जी आपके रहते हुए यमलोक में ये क्या चल रहा है।

महाराज मेरा काम तो कर्मों का लेखाजोखा और आवक-जावक  देखना है। ये काम तो क्वालिटी कंट्रोल डिपार्टमेंट का है  चित्रगुप्त ने पल्ला झाड़ते हुए कहा।

अपने पे ढोल देने के कारण क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर ने चित्रगुप्त की ओर खा जाने की नज़रों से देखा और कहा महाराज इस तरह के प्रोडक्ट्स पहले भी इक्का दुक्का आते रहे हैं और हम उसे डिफेक्टिव पीस का लेबल लगा कर रिपेयरिंग में डाल देते थे। किन्तु जब पूरे के पूरे लाट ही ऐसे आने लगे तो हमने समझा ब्रम्हा जी ने उत्पाद के मानक और गुणवत्ता बदल दिये होंगे।

तो तुमने हमे बताना भी जरूरी नहीं, समझा। यमराज नाराज हुए।

मृत्यु लोक होता तो बैठक जानकारी आने तक स्थगित कर दी जाती। किन्तु वायु की गति से दूत ब्रह्मा जी के पास भेजा गया और तुरंत जानकारी आयी कि ।कोई बदलाव नहीं किया गया है। हाँ कुछ आत्माओं की अर्जियाँ आई थी कि उनके शरीर में एक अतिरिक्त हाथ लगा दिया जाये क्योंकि एक हाथ मोबाइल में एंगेज होने के कारण एक हाथ से काम करने में बड़ी दिक्कत होती है।  किन्तु फिलहाल वो भी नहीं किया गया।

कहीं तुम लोग टारगेट पूरा करने के चक्कर में  किसी योग संस्थान में शवासन कर रहे लोगों को तो नहीं उठा लाये। यमराज ने दूतों को धमकाया।

दूत प्रमुख नाराज स्वर में बोला महाराज जिसके नाम की पर्ची आप फाड़ते हो उस को ही तो ला सकते हैं ना। इत्ते बरस हो गये आत्माएँ लाते लाते,  प्रमोशन, अप्रेजल तो दूर एक दिन बाद तो छोड़ो एक घंटे बाद लाने वाली आत्मा को भी साथ के साथ लाने का अधिकार नहीं है। बार बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। घड़ी दो घड़ी को लेट हो जायें तो चित्रगुप्त जी दानापानी ले कर चढ़ जाते हैं। किसी के नाम की पर्ची हम क्या फाड़ेगें , अपने मन से! दूत  भरा बैठा था।

प्रमोशन का बजट होता तो मैं ही भैसे की जगह उड़न तश्तरी नहीं ले लेता। भैसे पर बैठे बैठे पुट्ठे सूज जाते हैं। यमराज मन ही मन बड़बड़ाये।

तभी एक दूत जो आजकल ओवर टाइम कर रहा था बोला महाराज मैं कुछ कहना चाहता हूँ।

कहो, यमराज ने भेदक दृष्टि से उसे देखा।

महाराज आपके दिये समय पर हम प्राणी के घर पहूँच जाते हैं, वो समय पर मर भी जाता है किन्तु……

किन्तु क्या यमराज अधीर हो उठे।

किन्तु आत्मा बाहर आती ही नही। शरीर में घुस के देखो तो कोने में सोई पड़ी मिलती है। कभी कभी तो पूरे शरीर का चक्कर मार कर खंगाल लो पर आत्मा मिलती ही नहीं।

क्या मतलब मिलती ही नहीं। फिर कहाँ से लाये हो ये सारी? यमराज ने आश्चर्य से पूछा।

क्या बतायें महाराज कहाँ कहाँ  पड़ी मिलती है।शरीर में नहीं मिलती तो घर के स्टोर रूम में बेकार चीजों के साथ पड़ी मिलती है,तो कभी कालेबाजार के गोदामों में बोरियों के नीचे दबी रहती है, कभी कालेधन के अंदर तिजोरी ब़ंद पड़ी मिलती है, कभी सरकारी दफ्तरों की फाईलो के नीचे दबी रहती है तो कभी नेताओं की बड़ी बड़ी सफेद जेबों में तो कभी पैरो के नीचे दुबकी रहती है,कभी अफसरों की कुर्सी के पीछे,तो कभी बाबुओं, की टेबल के नीचें, कभी डॉक्टरों के भूले हुए उसूलों में, न जाने कहाँ कहाँ दबी कुचली, मैली कुचैली मरी पड़ी रहती है।
महाराज पृथ्वीलोक का प्राणी बड़ा चतुर है। जो चीज उसके काम मे विघ्न डाले उसे वो मार देता है या निकाल फैंकता है।इसलिए वो आत्मा को …समझ गए ना।
पर एक बात बताओ दूत जब आत्मायें शरीर में रहती ही नहीं तो शरीर चलते कैसे हैं।
महाराज मनुष्य बड़ा जुगाड़ू है। उसने स्वार्थ नाम की बैटरी बना रखी है सारे शरीर उसी से चलते हैं।
किन्तु ये संभव ही नहीं। क्या तुम नहीं जानते नैनं छिंदती शस्त्राणि नैनं दहति पावक…..आत्मा मर नहीं सकती।
महाराज  मानव ने कईं नये शस्त्रों अविष्कार किया है जो परमाणु बम से भी अधिक खतरनाक हैं।। धोखाधड़ी, लालच, भ्रष्टाचार, स्वार्थ जैसे-  ऐसे ऐसे शस्त्र हैं उसके पास जिनसे वो पूरी दुनिया की आत्माओं को मार सकता है।
मृत्युलोक अब वास्तव में मृत्युलोक है। महाराज।

डॉ साधना बलवटे
ई-2/343 अरेरा कॉलोनी, भोपाल 462016
मोबाइल- 9993707571

 

 

 

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