निज़ाम फतेहपुरी की ग़ज़ल
शिकवा गिला मिटाने का त्योहार आ गया।
परदेसी सारे आ गए परदेस से यहाँ।
रंगे गुलाल उड़ रहा था चारों ओर से।
ठंडाइ भांग की मिलि हमनें जो पी लिया।
मजनू पड़े हैं पीछे मुझे रंगने के लिए।
सब लोग मिल रहे गले इक दूजे से यहाँ।
खेलो निज़ाम रंग भुला कर के सारे ग़म।
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