Thursday, May 14, 2026
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मनवीन कौर पाहवा की कविताएँ

1 – धूप छाँव
खेल रही है आँख मिचौली
पगडंडी जीवन की
हो नव वर्ष तारों सा  झिलमिल
महक उठे उपवन भी
हाथ पकड़ कर खींच रही है
ख़्वाबों की किताब
तो फिर रूठ जाती है हाँसी
कलम ना आए रास
बेदर्दी स्याही ने भी तो  रेत पर
खींचे खाके
लहर ले गई सारी ख़ुशियाँ
पवन बैठती ताके
उमड़ पड़ा बादल द्रवित हो
शुष्क धरा पर बरसा
नन्ही दूब ने आँखें खोली
पवना का मन हर्षा .
रहे सुहानी धूप चमकती
और ठंडक दे छाँव
वर्षा की बूँदों से सरसे
मन आँगन और गाँव…

2 – वरक़

वरक़ों ने पहना हैं जामा
रंग बिरंगे शब्दों का
कहीं महक सुमनों की बहती
कहीं कँटीली डाल
कहीं झीने पर्दे से झांकें
कुछ स्वप्न आप्लावित राग
रुनझुन पायल पहन के आती
कल्पना और सृजना
मेहंदी ले आकृतियाँ रचती
रचनाओं के हाथ
कभी भोर में करें विभोर
कभी निशा में जागें
दृग नम और उच्छास छोड़ते
आस निरास के धागे
वरक़ वरक़ कर बन जाते तब
मनभावन  किताब
सुंदर शब्दों का पहन के जामा
पूरे होते  ख़्वाब .

मनवीन कौर पाहवा
संपर्क – 8600017018
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