वर्मा जी का बूढ़ा माली हरिया आज अपने मालिक वर्मा जी के  नन्हे पोते चुनमुन के लिये एक सुंदर सफेद आसमानी रंग का बड़ा सा पारदर्शी गुब्बारा लेकर आया था।
गेट पर ही मालिक अपने पोते चुन्नू के साथ बगीचे में  तितलियाँ पकड़ते हुए मिल गए थे।
‘हैप्पी बड्डे’ कहते हुए जैसे ही चुन्नू की ओर उसने गुब्बारा बढ़ाया वैसे ही दौड़कर नन्हे मियां ने माली बाबा के हाथ से गुब्बारा ले लिया। बालक के ताली बजाने का उपक्रम करते ही, खुशी जाहिर करने के चक्कर में,  गुब्बारा उड़कर बाहर गली में दूर तलक पहुंच गया था।सब्जी वाले रामू ने झट से गुब्बारा कैच करते हुए एहतियात से वापस चुनमुन के पापा को आकर थमाया और कुछ सोचकर बोला-
-साहब जी!आज बंगले पर बहुत सुंदर रंग-बिरंगे गुब्बारे सजाए हैं।।का छुटके बाबू का जनमदिन  है आज?
 -हाँ भई!हमारे इस बेटू को गुब्बारे बेहद पसंद हैं।बस इसका मन बहलाने को ही ये सब पिछले साल के पैकेट्स में रखे हुए गुब्बारे फुलाकर सजा दिये हैं।
अब कोरोना के चलते किसी को बुला भी तो नहीं सकते।शैशव से ही इसे उड़ती हुई चीजें बड़ी पसंद हैं।
– आसमान में उड़ता हुआ जहाज आएगा और बाबू के मम्मी पापा को लंदन से जल्दी ले आएगा।
-माली बाबा गुब्बारे को चुनमुन के चेहरे पर रखकर धागे को पकड़े, बार-बार उड़ाते हुए कहे जा रहे थे।
पिछले महीने अपने साथ ही लेकर चले आए थे इकलौते पोते को दादा दादी।चिकित्सक बेटे-बहू भी आश्वस्त हो गए थे।आठ दिन बाद ही दिल्ली आने की टिकट भी बुक करा ली थीं उन्होंने।
जब कभी सोते समय याद आते ही चुनमुन मम्मी पापा  के बारे में दादू दादी से बड़ी  मासूमियत से  पूछता,तो उनका एक ही जवाब होता-
-वो देखो।। कल उड़कर प्लेन आएगा और उन्हें घर ले आएगा।
-माॅम!डैड!क्या हो गया ये सब?हम तो विदेश में,खूब मेहनत करके ‘दुनिया मुट्ठी में’ करने की चाहत लेकर आए थे,लेकिन अब तो दुनिया ही हथेलियों से फिसल रही है,
जाने कब फूट जाए इस नाजुक बैलून की तरह।
हमारी दुनिया तो आप तीनों ही हैं।काश!कोई बैलून हमें उड़ाकर आपके पास ले आए।
देर रात में टैबलेट पर वीडियो पर बातें होने लगी थीं।
-कहाँ है चुनमुन?बुलाइये तो मम्मा।।
-तुमने लेट कर दिया,इत्ती देर तक नहीं जागता है वो।
दादी उन्मन सी होकर बोलीं।
-दोनों हाथों से बैलून थामे, बैड पर सोए नन्हे चुनमुन पर कैमरा घुमाते हुए चुनमुन के दादू फफक पड़े और उनकी आंखों से चश्मे के भीतर से ही पारदर्शी बैलून-नुमा मोटे मोटे आंसू टपक पड़े।
शायद नन्हा चुनमुन भी मीठे सपनों में दुनिया मुट्ठी में  लेकर आश्वस्त था।

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