कम्युनिटी हॉल में सभी लोग जमा हो चुके थे और आपस में खुसर-फुसर चल रही थी | एक सज्जन से रहा न गया तो पूछ बैठे “क्या बात है प्रेसिडेंट विमल साहब आज अचानक से सोसायटी की मीटिंग कैसे बुला ली” ? 
तभी कुनिका वहां पहुँची और लोगों में पुनः कानाफूसी होने लगी |
कुनिका आप भी स्थान ग्रहण करें विमल ने कुर्सी की तरफ इशारा किया और मीटिंग की शुरुआत करते हुए कहा “तो बात यह है कि आप सभी जानते हैं कि कुनिका इस सोसायटी में लगभग  एक वर्ष पहले किराए पर फ़्लैट में रहने आयी थी | इनके बारे में आप में से कुछ लोगों ने खूब बुरा सुना व कहा होगा, मैं ने भी सुना था लेकिन हकीकत कुछ और ही है, मैं चाहूंगा कि कुनिका स्वयं आप को इस हकीकत से वाकिफ कराएं” विमल ने कुनिका को सब के समक्ष आने का इशारा करते हुए कहा | 
एक बार तो कुनिका झिझकी, क्या करती बेचारी पिछले कुछ महीनों से सोसायटी के लोगों ने उसे ताने दे-दे  कर उस का जीना दुश्वार कर रखा था और फिर जब वह आज घर खाली कर ही रही है तो जख्मों को कुरेदने से क्या फायदा ? 
“रहने दीजिये विमल जी क्यूँ जख्मों को हरे करना” 
लेकिन जब विमल ने बार-बार आग्रह किया तो वह सब के सामने आ कर रुंधे स्वर में बोली “मैं आप सभी की गुनाहगर हूँ कि मैं ने सोसायटी का माहौल खराब किया लेकिन इस में मेरा कसूर क्या है ?” 
“कसूर पूछ रही हैं आप ? मैडम यहाँ सभ्य लोग रहते हैं, किराए पर रहने आ कर दूसरे के पतियों पर डोरे डालना क्या शोभा देता है”  एक पुरुष ने चीखते हुए जोर से हाथ हिलाते हुए कहा |
सभी ने उस पुरुष की हाँ में हाँ मिलाई और कुनिका को कोसने लगे “अरे ! डायन भी सात घर छोड़ती है, इसने तो हद ही कर दी”  
कृपया आप सभी शांत हो जाइये विमल ने हाथ जोड़ कर इशारा करते  हुए कहा |   
 “कुनिका आप आगे की बात बताएं” विमल ने कुनिका का हौसला बढाया | 
जब मैं गत वर्ष यहाँ रहने आयी तो मेरी छह वर्षीय बेटी राधिका और आकाश का बेटा रोहन एक ही स्कूल व कक्षा में पढ़ते थे और एक ही बस में स्कूल जाते थे | वहीं बस स्टॉप पर मेरी मुलाकात आकाश से हुई | वह देखने में सज्जन और नेक इंसान लगा |
धीरे-धीरे मेरी यहाँ सभी से पहचान बढ़ने लगी और उसी तरह आकाश से भी |
एक दिन इंटरकॉम आया “सुनो कुनिका, रोहन तुम्हारे घर खेलने के लिए आना चाहता है तुम्हें बुरा न लगे तो मैं उसे तुम्हारे घर भेज दूं” दूसरी तरफ आकाश था  |  
“हाँ हाँ इसमें संकोच कैसा, दोनों बच्चे दोस्त हैं, अच्छा है न साथ में खेल लेंगे वैसे भी बाहर तो बारिश पड़ रही है | ”
इस तरह बच्चों का एक दूसरे के घर आने-जाने का सिलसिला बन गया | 
“मेरी पत्नी एक धनाढ्य परिवार से और अच्छी तनख्वाह लेने वाली सॉफ्टवेर प्रोफेशनल है, इन दिनों लन्दन में  नौकरी कर रही है | बेटे रोहन के जन्म के बाद भी उस का अपने करियर पर ही ज्यादा ध्यान रहा फिर एक दिन मालूम हुआ कि उसका अपने दफ्तर के बॉस से प्रेम-प्रसंग चल रहा है , दोनों छुप-छुप कर मिलते हैं  | मैं ने कई बार उसे समझाया भी कि इस तरह के लोग इस्तेमाल कर के छोड़ देते हैं लेकिन उसे तो बड़ी पोस्ट, प्रोमोशन, पैसे का लालच अपने बॉस की तरफ खींचे जा रहा था, न घर की सुध न ही बच्चे की फ़िक्र, बस अपने बॉस के साथ डिस्को-पब में थिरकना और देर रात घर को लौटना उसे अच्छा लगता है  |  जब मैं ने ज़्यादा रोक-टोक की तो उस ने मुझ से किनारा कर लिया और कुछ ही दिनों में प्रोमोशन ले कर लन्दन चली गयी” | 
आकाश ने जब यह सब मुझे बताया तो वह बहुत ही मजबूर दिखाई दे रहा था  “क्या करूँ एक बच्चा है वर्ना कब का उसे तलाक दे देता, हमारे बीच सिर्फ दिखावे का ही तो रिश्ता है जो उसकी तरफ से तो मर्यादा की हर सीमा लांघ चुका है और अब मैं ने हालातों से समझौता कर लिया है, आखिर रोहन को एक माँ की ज़रुरत भी तो है, आज मैं उस से तलाक ले लूं तो कल यह बेचारा बिन माँ का बच्चा ही कहलायेगा न”, इतना कह आकाश ने रोहन को सीने से लगा लिया और उसकी आँखों में गहराए बादल बरस पड़े |    
“आप उदास न हों, सब ठीक हो जाएगा, कई बार हमें गलतफहमियां भी हो जाती हैं आकाश” मैं ने उसे ढाढस बंधाया |
उस रात मुझे नींद नहीं आयी, विचारों की श्रंखलायें बार-बार उतार-चढ़ाव कर अहसास कराती रहीं कि  आकाश कितना सुलझा हुआ इंसान है फिर भी इस की पत्नी ने इस के साथ कितना दुर्व्यवहार किया |
फिर एक दिन आकाश का  बेटा रोहन मेरे घर खेल रहा था और तभी आकाश आया और बोला “चलो बेटे रोहन बाहर खाने जायेंगे”  |
“कुछ ख़ास बात है आकाश आज बाहर पार्टी” ? मैं ने चुटकी लेते हुए आकाश से पूछा | 
“कहाँ पार्टी, दो दिन से कुक नहीं आ रही है, शायद उस का स्वयं का बच्चा बीमार है”
 “ओह्ह्ह तो ये बात है , तो बाहर क्यूँ जाते हैं आइये यहीं खाना खा लीजिये, मैं ने पुलाव बनाया है, ग्रीन सेंडविच बना लेती हूँ, झट से तैयार हो जायेंगे, देखिये न रोहन का भी मन है, फोर्मैलिटी मत कीजिये, अन्दर आ जाइये” 
उस दिन मेरे ज्यादा जोर देने पर आकाश ने हमारे यहाँ खाना खाया | लेकिन वह बहुत उदास दिखाई दिया तो मैं ने पूछ  लिया “क्या बात है आकाश कुछ अनमने से लग रहे हो” 
“हम्म्म्म ! आज मेरी पत्नी का लन्दन से फोन आया था तलाक लेना चाहती है” आकाश की आँखें आज फिर पनीली हो आयी थीं, उसक चेहरे पर उदासी के भाव देख मैं स्वयं भी भावुक हो उठी थी | किन्तु मुझे समझ ही न आया कि मैं उसे क्या कहूं |
“बड़ी ही चालाक है ये औरत इस की बातों का क्या भरोसा” मीटिंग में बैठी एक महिला ने कुनिका की तरफ उंगली कर  क्रुद्ध स्वर में कहा  |
“आप शांत रहें प्लीज़ विमल ने कहा, पहले आप कुनिका की पूरी दास्तान तो सुनिए बगैर सच जाने अपको किसी पर झूठी तोहमत लगाने का कोई हक़ नहीं | हाँ कुनिका आप अपनी बात जारी रखें”
उस रात भी मुझे नींद नहीं आयी मैं सोचती रही कितनी स्वार्थी होगी आकाश की पत्नी जिसे अपने पति की तो नहीं पर अपने बच्चे की फ़िक्र भी नहीं ? फिर क्या यूं ही कहते हैं कि मूल से ज्यादा प्यारा सूद होता है ? मैं तो अपनी राधिका के  नज़रों से ओझल होते ही  बेचैन हो जाती हूँ | 
मैं ने अगले दिन आकाश को इंटरकॉम पर बहुत सांत्वना दी और कहा आप  चिंता न कीजिये, समस्या है तो हल भी निकल ही आयेगा | 
धीरे-धीरे आकाश मुझे अपने मन में उठी हलचल की पल-पल की खबर देने लगा और एक दिन जब वह घर आया तो बोला “रोहन आप लोगों से बहुत हिलमिल गया है, हर वक़्त आप के घर आने की रट लगाये रहता है, न जाने मुझे आप से कहना चाहिए या नहीं लेकिन आप मुझे गलत न समझें क्या आप मेरे रोहन की माँ बनना पसंद करेंगी” ?  
मैं बिना कुछ जवाब दिए अपने बेडरूम में चली गयी और वह मुझे बगैर कुछ कहे अपने घर |
सारी रात मैं करवटें बदलती रही, अपने स्वर्गवासी पति की यादों में आंसू बहाती रही | उनके जाने के बाद कितनी मुश्किलें उठायी थीं मैं ने | ससुराल वालों ने तो उन की मौत का दोषी मुझे ही मान लिया था, मेरे विवाह के एक माह बाद ही तो उन का एक्सीडेंट हो गया और फिर वे मुझे सदा के लिए छोड़ कर चले गए | 
दो बरस माता-पिता के साथ रही और नौकरी कर ली, राधिका भी अब थोड़ी बड़ी हो गयी थी, सो भाई के विवाह पश्चात यहाँ अलग से घर ले लिया | आखिर कब तक भाई-भाभी पर बोझ बन मायके में रह सकती थी |
आकाश की परिस्थिति और अपनी गुज़री ज़िंदगी में मुझे कहीं न कहीं समानता नज़र आयी | दोनों ही कितने एकाकी थे और शायद एक दूसरे में एक सहारा खोजने लगे थे | न जाने कब  आकाश के प्रति लगाव मेरे मन में अपने डेरे जमा चुका था  | 
उस के बाद आकाश हमारे घर कभी नहीं आया, मुझे भी उसे इंटरकॉम कर घर बुलाने की हिम्मत न हुई  | लेकिन एक दिन दोनों ही बस स्टॉप पर देरी से पहुंचे तो पाया कि दोनों बच्चों की स्कूल बस छूट गयी थी |
“मैं दोनों बच्चों को स्कूल छोड़ देता हूँ” आकाश ने मुझ से कहा | 
“नहीं मम्मा तुम भी हमारे साथ आओ” राधिका ने रुंआसे स्वर में पैर पटकते हुए बोला | वैसे भी मैं ने स्वयं ही राधिका को सख्त हिदायत दी हुई थी कि किसी के भी साथ कार में अकेले न जाना सो वह तो उस दिन आकाश के साथ जाने वाली नहीं थी | मुझे मजबूरन आकाश के साथ कार में जाना पड़ा |
उस दिन बच्चों को स्कूल छोड़ लौटते वक़्त आकाश ने माफी मांगते हुए कहा “आप तो उस दिन के बाद चुप्पी ही लगा गयीं, मेरी बात को अन्यथा न लें, बस ऐसा महसूस हुआ कि शायद कहीं आप ने मेरे दिल में एक ख़ास जगह बना ली है और मैं अपने मन की बात आप से कह गया, आय एम् वेरी सॉरी फॉर देट” |
“नहीं एसा न समझें आप, सच बात तो यह है उस दिन के बाद से अब तक मैं भी इसी उधेड़बुन में रही कि आप को क्या जवाब दूं, ऐसा महसूस होता है कि  शायद हम दोनों इसीलिए मिले कि हमें एक होना ही था और हमें एक दूसरे के सहारे की ज़रुरत भी है”      
 मस्त हवा के झोंके सा झूम उठा था वह और उस ने आँखों ही आँखों में प्यार का  पैगाम दे दिया था, मुझे उस वक़्त ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे अंतस की वीणा के सुप्त तार फिर से झनझना उठे हों  |
हमारी मुलाकातें घर के सिवा बाहर भी बढ़ने लगीं, लेकिन कहते हैं न इश्क और मुश्क कब छुपाये छुपता है ?
एक दिन सोसायटी की एक महिला ने जब मुझ पर आकाश को ले कर तंज कसा तो जैसे मेरे सीने पर तो सांप ही लोट गए | 
मैं ने उस शाम आकाश को सारी स्थिति बतायी |  
“मेरी पत्नी को सोसायटी के लोगों के मार्फ़त हमारे प्यार की भनक लग गयी है, और ये सब उस की सहेलियां हैं जो तुम्हें तान देने लगी हैं, पर तुम इनकी परवाह न करना बस कुछ ही दिनों में तलाक होने ही वाला है, फिर हम विवाह बंधन में बंध जायेंगे” |    
“हाँ आकाश हम ने प्यार किया है कोई गुनाह तो नहीं और फिर तुम्हारा तलाक होते ही हमें तो एक होना ही है | 
लेकिन  जब तुम्हारी पत्नी को तुम से और रोहन से कोई वास्ता ही नहीं तो फिर वह ये सब क्यूँ कर रही है” ?
“शी इज़ वेरी पजेसिव कुनिका, मैं ने तुम्हें पहले ही बताया था न” 
ह्म्म्म |
लेकिन उस के बाद हमारे प्यार का अफसाना पूरी सोसायटी में रातरानी की महक की तरह  फ़ैल गया और मैं आकाश के भरोसे निश्चिन्त प्यार के आसमान में उन्मुक्त पतंग सी उड़ान भर रही थी, जिसकी डोर आकाश के हाथ में थी | 
तभी एक दिन सोसायटी के प्रेसिडेंट विमल जी ने मुझ से फोन पर बात की और मुझे यहाँ के माहौल को खराब करने की शिकायत की |  
मैं ने अपनी सफाई देनी चाही “विमल जी प्यार करने की सजा दे रहे हैं आप मुझे, मेरा कसूर क्या है, आकाश और मैं एक ही कश्ती पर सवार दो मुसाफिर हैं और हमारा साहिल एक है” |
 लेकिन विमल जी ने मेरी एक न सुनी और अभी एक महीने पहले मुझे घर खाली करने का नोटिस मिला” कुनिका आंसुओं में भीग चुकी थी,  वह फफक कर रो पड़ी | 
तभी विमल बोले “कुनिका को नोटिस मिलने के ठीक दो-तीन दिन बाद आकाश मेरे घर आया  और बोला “बड़ी मुसीबत हूँ विमल जी, कुछ पैसों की सख्त आवशयकता है” |
आकाश इस सोसायटी में पिछले छः वर्षों से रह रहा है, उस पर भरोसा कर मैं ने उसे बड़ी रकम दे दी, उसके बाद उस के दर्शन दुर्लभ हो गए |  अभी दो दिन पहले उस के दफ्तर से तीन लोग हमारी सोसायटी ऑफिस में आये और आकाश के बारे में छान-बीन करने लगे | 
“बात यह है विमल जी हम और आकाश एक साथ काम करते हैं और उस ने दो वर्ष पहले कुछ रुपये उधार लिए थे जो आज तक लौटा नहीं रहा है, इसलिए हमें यहाँ तक आना पड़ा, आप कैसे भी करके उसे धर दबोचिये और हमारे रुपये हमें दिलवा दीजिये”
मुझे समझते देर न लगी, मैं ने अपनी पत्नी से कहा कि वह आकाश की पत्नी रीना से लन्दन बात करे |  
सारी बात फोन पर रिकॉर्ड की हुई है आप भी सुनिए “रीना मैं क्या सुन रही हूँ तुम आकाश से तलाक  मांग रही हो” |
नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं, पर तुम उस औरत को ज़रूर निकालो सोसायटी से, मैं यहाँ नौकरी करने आयी हूँ, लेकिन मेरा ध्यान वहां भारत में ही लगा रहता है , आखिर आकाश मेरा पति है, वह चुड़ैल क्यूँ मेरे पति के पीछे पड़ी है,  और उस औरत ने मेरे बच्चे के बारे में भी नहीं सोचा, क्यूँ मेरा बसा बसाया संसार उजाड़ रही है वह” रीना का क्रोध में उत्तेजित स्वर सभी ने फोन पर सुना, वह अपने क्रोध पर काबू करने में असमर्थ थी और आग बबूला हो उठी थी,  कुनिका को काफी भला-बुरा कह रही थी |
“तो यह है आकाश की हकीकत, उस की पत्नी समझती है कि कुनिका आकाश पर डोरे डाल रही है जबकि आकाश ने कुनिका से कहा कि वह अपनी पत्नी से तलाक ले रहा है, फरेब तो आकाश कर रहा है”
हाल में बैठे सभी लोगों के चेहरे पर प्रश्नवाचक भाव थे और वे अचंभित हो एक दूसरे को ताक रहे थे | वहां फिर से खुसर-फुसर होने लगी थी | 
 हम पैसे की धोखाधड़ी को धोखा समझते हैं लेकिन प्यार में धोखा यदि इस बेचारी को मिला तो इसे सजा देना चाहते हैं, क्या किसी विधवा स्त्री को फिर से घर बसाने की इजाज़त नहीं, क्या उसे प्यार नहीं चाहिए ? वह भी तो तन व मन से प्यासी रहती है, यदि उस ने आकाश से प्यार किया तो क्या गलत किया” विमल की पत्नी ने कुनिका का हाथ थामते हुए कहा | 
 “मेरी ख़ता ये है कि मैं ने आकाश का भरोसा कर उस से प्यार किया, अपने टूटे घरौंदे को फिर से सजाना चाहा, अब आप मुझे जो चाहे सजा दीजिये” कुनिका  सुबकते हुए जमीन में गड़ी जा रही थी | 
विमल की पत्नी ने कुनिका को गले लगा लिया, सोसायटी की अन्य महिलायें सर झुकाए बैठी थीं, शायद मन ही मन अपने किये पर शर्मिन्दा थीं |
मीटिंग ख़त्म हुई सभी सर झुकाए अपने-अपने घर लौट गए |
कुनिका विमल जी एवं उनकी पत्नी के साथ अपने घर पहुँची |
“आप कुनिका का सामान अनपैक कर दीजिये, ये यहीं रहेगी इसी सोसायटी मैं” विमल ने पैकर्स-मूवर्स के सुपर्वाइज़र से कहा | 
पैकर्स कुनिका का सामान अनपैक कर रहे थे और वह तीन कप चाय बना लाई थी |
कविताएँ, आलेख, कहानी, दोहे, बाल कविताएँ एवं कहानियाँ देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित | 'जो रंग दे वो रंगरेज' कहानी-संग्रह प्रकाशित | चार साझा कहानी-संग्रहों में भी कहानियाँ शामिल | गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा एवं विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान, दिल्ली द्वारा “काका कालेलकर सम्मान वर्ष २०१६ सहित अनेक सम्मान प्राप्त । सम्प्रति - डाइरेक्टर सुपर गॅन ट्रेडर अकॅडमी प्राइवेट लिमिटेड | संपर्क - sgtarochika@gmail.com

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.