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अर्चना चतुर्वेदी की चुटकी – मोबाईल बनाम चुगलखोर चाची

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चुगली यानी वो कला जो सदियों से चली आ रही है | मानवजाति  के विस्तार के साथ ही ये कला विकसित होती गयी ..महाभारत काल में शकुनी तो रामायण काल में मंथरा ने चुगली के विकास में अहम भूमिका निभाई | उसके बाद कभी  नाई तो कभी मुहल्ले की किसी चाची या भाभी  ने इस कला को बचाए रखने में पूरा योगदान दिया | युग बदला तकनीकी बदली ..और तरीके बदले ..  आज घर घर  ..हर कान के पास यही है ..और यही है आजकी चुगलखोर चाची …यही है हरिराम नाई ..यही है वो कबूतर .जो आपके संदेशे एक जगह से दूसरी जगह नहीं बल्कि अनेक जगह पहुँचा देता है |
आज के फ़ास्ट फूड युग में इसने ही दुनिया मुट्ठी में ला दी ..इसकी आँख कान,मुहँ सब खुले रहते हैं ..इधर लड़की की सास ने कुछ कहा उधर तुरंत खबर उसके मायके ..इधर पति जी से लड़ाई हुई उधर वीडियो वायरल ..ये तो इत्ता स्मार्टली काम करता है कि शक की गुन्जाईस तक नहीं छोड़ता|  ..ससुराल का मायके का ,ऑफिस का ,साहित्य का कोई भी वाट्स ग्रुप हो इस चुगलखोर चाची के असिस्टेंट स्लीपर सेल्स की तरह मौजूद रहते हैं ..इधर किसी ने कुछ बोला उधर उनके स्क्रीन शॉट का प्रसाद बंटा |

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स्क्रीन शॉट इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला और एकदम सॉलिड हथियार है | फेसबुक के इन्बोक्स से बाहर आकर कब किसी इज्जत का जनाजा निकाल दे ..मासूम चेहरे के पीछे छिपी  रोमेंटिक छवि को कब  दुनिया को दिखा दे पता नहीं चलता |
चुगलखोर चाची से तो लोग बच भी जाएँ पर आज के स्मार्ट फोन रूपी चुगलखोर से बचना नामुमकिन है ..क्योंकि हर हाथ में ये विराजमान है | कौन आपकी विडियो रिकार्ड करके फैलाएगा ..कौन आपकी रिकार्डिंग करके आपके दुश्मन को भेजेगा ? कौन आपके स्क्रीन शॉट लेकर अख़बार के संपादक को भेजेगा पता ही नहीं लगेगा .. 
ये सिर्फ  स्मार्ट फोन नही है ये तो  चुगलियाँ करके झगड़ा करवाने में माहिर है | चुगलखोर चाची सिर्फ कनबतियां करती थी ..ये तो फोटो और वीडियो सहित रसबतियाँ कर डालता है ..किसका चक्कर किसके साथ है ? कौन कौन कब कब किससे मिलता है ?
कौन रिश्वत खाता है हर एक पर इसकी पैनी नजर रहती है ..चुगलखोर चाची को आते देख लोग सावधान हो जाते थे और ये स्मार्ट चुगलखोर मुट्ठी में बंद सावधान होने का मौक़ा भी नहीं देता इधर बन्दा चूका या जरा सी जुबान फिसली और उधर सबूत सहित बातें वहां पहुँचती हैं जहाँ कतई नहीं पहुंचनी चाहिए थी |
वो जमाने गए जब एक मुहल्ले में एक चुगलखोर चाची थी आज हर घर ,हर गली हर हाथ में ये अपनी जगह बना चुकी है ..कब कौन किस तरह इस भूमिका को निभा जाये नहीं पता.. इसलिए भाई तोल,मोल के बोलो  ..फूंक फूंक कर कदम रखो वरना सावधानी हटी और चुगली बंटी |

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