चुगली यानी वो कला जो सदियों से चली आ रही है | मानवजाति के विस्तार के साथ ही ये कला विकसित होती गयी ..महाभारत काल में शकुनी तो रामायण काल में मंथरा ने चुगली के विकास में अहम भूमिका निभाई | उसके बाद कभी नाई तो कभी मुहल्ले की किसी चाची या भाभी ने इस कला को बचाए रखने में पूरा योगदान दिया | युग बदला तकनीकी बदली ..और तरीके बदले .. आज घर घर ..हर कान के पास यही है ..और यही है आजकी चुगलखोर चाची …यही है हरिराम नाई ..यही है वो कबूतर .जो आपके संदेशे एक जगह से दूसरी जगह नहीं बल्कि अनेक जगह पहुँचा देता है |
आज के फ़ास्ट फूड युग में इसने ही दुनिया मुट्ठी में ला दी ..इसकी आँख कान,मुहँ सब खुले रहते हैं ..इधर लड़की की सास ने कुछ कहा उधर तुरंत खबर उसके मायके ..इधर पति जी से लड़ाई हुई उधर वीडियो वायरल ..ये तो इत्ता स्मार्टली काम करता है कि शक की गुन्जाईस तक नहीं छोड़ता| ..ससुराल का मायके का ,ऑफिस का ,साहित्य का कोई भी वाट्स ग्रुप हो इस चुगलखोर चाची के असिस्टेंट स्लीपर सेल्स की तरह मौजूद रहते हैं ..इधर किसी ने कुछ बोला उधर उनके स्क्रीन शॉट का प्रसाद बंटा |

