“गीत गजल और कविताओं में से प्रेम गायब है” बहुत बड़े गीत गजल लेखक ने भरी सभा में ये बात कही जहाँ एक व्यंग्यकार जी भी बैठे हुए थे | अब आप लोगों को तो पता ही होगा कि व्यंग्यकार वो प्राणी है जो हर बात की बाल की खाल निकालता है, और निहायत ही उलटी खोपड़ी होता है | सो व्यंग्यकार निकल पड़ा ये खोजने कि प्रेम कविताओं में नहीं है तो आखिर है कहाँ ? कहीं से खबर मिली कि प्रेम आजकल राजनीति में घुस चुका है और एन डी तिवारी और दिग्विजय सिहं जैसे नेताओ के सर पर सवारी कर रहा है |

