“गीत गजल और कविताओं में से प्रेम गायब है” बहुत बड़े गीत गजल लेखक ने भरी सभा में ये बात कही जहाँ एक व्यंग्यकार जी भी बैठे हुए थे | अब आप लोगों को तो पता ही होगा कि व्यंग्यकार वो प्राणी है जो हर बात की बाल की खाल निकालता है, और निहायत ही उलटी खोपड़ी होता है | सो व्यंग्यकार निकल पड़ा ये खोजने कि प्रेम कविताओं में नहीं है तो आखिर है कहाँ ? कहीं से खबर मिली कि  प्रेम आजकल राजनीति में घुस चुका है और एन डी तिवारी और दिग्विजय सिहं जैसे नेताओ के सर पर सवारी कर रहा है | 

अर्चना चतुर्वेदी की चुटकी - प्रेम आखिर है कहाँ ? 3

किसी ने कहा बुद्धाजयंती या लोधी गार्डन में देखो शायद वहाँ हो | व्यंग्यकार बिना आँखों देखी के मानते नहीं सो दोनों जगह गए और वहाँ जो माहोल देखा उसे देखकर एक पल को तो यही लगा कि सारी दुनिया का प्रेम यदि कही है, तो यही है, यही है, यहीं हैं | चारों तरफ प्रेमी जोड़े प्रेम करने में मगन दिखे | व्यंग्यकार जी प्रेम की खोज में मेट्रो स्टेशन पर आ गए, वहाँ भी कुछ जोड़े आलिंगन बद्ध दिखे, एक बार तो उन्हें लगा कि हो न हो प्रेम यहीं हो पर फिर संभल गए कहीं लेने के देने ना पड़ जाये | मेट्रो के अंदर भी प्रेम दिखा फिर रेस्टोरेंट में कुछ खाने गए तो तो वहाँ भी प्रेम बेचारे लेखक जी परेशान कि चहुंओर प्रेम बिखरा है पर कविता में क्यों नहीं है | रिसर्च और सघन करनी होगी गूगल भी खंगाला कोलेज केन्टीन से लेकर पिक्चर हाल तक गए |
अंत में जो निष्कर्ष निकला वो ये था “ कि पुराने गजल कारों और लेखकों को लड़किया देखने तक को नसीब नहीं थी छूना और बात करना तो दूर की बात थी | वो जो गजल और कविताओं में प्रेम था, वो दरअसल उनकी फेंटेसी थी, कल्पनाएँ थी | वो बेचारे काल्पनिक प्रेम करते थे, नायिका तो ढीले ढाले बुर्के या परदे में होती उनकी आँखे कभी कभार दिख जाती सो आँखों को छोड़ (जुल्फें,लव यानि होंठ सुराहीदार गर्दन,पतली कमर) सब की सब कोरी कल्पना थी और कुछ नहीं |
अब आज के समय की बात करें जहाँ की नायिकाएं पूरी दिखती भी हैं,बातें भी करती हैं और प्रेम भी तो कोई कवि कविता लिखने में क्यों वक्त जाया करेगा ? भाई वो तो साक्षात् जीता जाता प्रेम करेगा ना | पुराने कवि,गीतकार और शायरों ने थ्योरी पर काम किया और आज के प्रेक्टिकल में विश्वास रखते हैं |अजी आजकल तो एक नया धमाल मचा है कुछ लोगों ने प्रेमी प्रेमिका को पार्को में मुहब्बत के गीत गाने से रोका तो वो शहर की सड़कों पर शुरू हो गए किस ऑफ लव के नाम पर |आखिरकार कार व्यंग्यकार की खोज पूरी हो ही गयी अब वो समझ चुके हैं कि प्रेम कविताओं ,गीत गजल से गायब होकर चहुओर अठखेलियाँ कर रहा है |

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