Wednesday, May 22, 2024
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कालजयी कबीर और बंकिम चन्द्र चैटर्जी को समर्पित अंतस् की 47वीं अन्तर्राष्ट्रीय काव्य-गोष्ठी

कबिरा खड़ा बज़ार में, माँगे सबकी ख़ैर
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर……..
घुमक्कड़ी भाषा के अलमस्त कालजयी कवि कबीर और वंदे मातरम-राष्ट्रगीत के रचयिता, 26 जून को जन्मे बंकिम चन्द्र चैटर्जी को समर्पित रही अंतस् की 47 वीं काव्य-गोष्ठी| 26 जून रात्रि आठ बजे से साढ़े दस बजे तक आयोजित इस अन्तर्राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता की वरिष्ठ लेखक, कवि-गीतकार, सिने-इतिहासवेत्ता एवं फ़िल्मकार डॉ॰ राजीव श्रीवास्तव ने| अंतस् की गतिविधियों और बढ़ते साहित्यिक सरोकारों पर अपने विचार रखते हुए गोष्ठी में प्रस्तुति देने वाले प्रत्येक कवि-कवयित्री के वाचन पर प्रभावी टिप्पणी दी डॉ राजीव श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में|
गोष्ठी का वैविध्यपूर्ण संयोजन, सुघड़ सञ्चालन प्रसिद्ध कवयित्री एवं अंतस्-अध्यक्ष डॉ पूनम माटिया ने किया| बतौर मुख्य अतिथि नागदा, उज्जैन से ‘वाह भई वाह’ फ़ेम के कैलाश सोनी ‘सार्थक’ ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ की। विशिष्ट अतिथि रहे जेद्दाह, सऊदी अरब से ग़ज़लगो अनीस अहमद, अम्बाला, हरियाणा से राष्ट्रीय चेतना के कवि डॉ जय प्रकाश गुप्त और श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर से डॉ मुक्ति शर्मा|
संस्था की वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिल्ली से अंशु जैन ने पहेली विधा के माध्यम से कबीर और श्री कृष्ण भगवान में समानता बताते हुए कहा कि दोनों को ही दो माँओं ने पाला|
जिनका जन्म हुआ था धानों के प्रदेश में/ लिखा जिन्होंने अपना राष्ट्रीय गीत पूरे मनोवेश में/ नहीं की- कभी चिंता धन- वैभव और सम्मान की/ डंडे की चोट पर, उज्ज्वल किया अपना नाम विदेश में… पहेली द्वारा बंकिम चन्द्र चैटर्जी को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
ग़ाज़ियाबाद की कवयित्री सोनम यादव द्वारा अत्यंत मनहर वाणी-वंदना प्रस्तुत की…
विधात्री मुझे ऐसी,अनुपम विधा दे।/ सुरों में समायी, वो रसमय सुधा दे।
जला दे जगत में, वही ज्ञान दीपक।/ हृदय तृप्त कर दे,वो मधुमय क्षुधा दे।
इसके अतिरिक्त विभिन्न विधाओं और रसों में काव्य की रसधार बही। कवियों-कवयित्रियों ने श्रेष्ठ प्रस्तुतियाँ देकर अंतस् की 46वीं गोष्ठी को ऊंचाइयां प्रदान कीं। मंत्रमुग्थ काव्य रसिक श्रोताओं ने भरपूर आनंद की अनुभूति की|
डॉ दिनेश कुमार शर्मा के उत्साहवर्धक उद्बोधन ने अंतस् के कार्यों की सराहना कर अपना दायित्व और बेहतर तरीके से निभाने के लिए प्रेरित किया। अंत में सभी को औपचारिक धन्यवाद संस्था के कार्यकारी महासचिव देवेन्द्र प्रसाद सिंह ने ज्ञापित किया| गोष्ठी का विधिवत समापन वन्देमातरम सामूहिक गान से हुआ|
अंतस् की यह गोष्ठी फ़ेसबुक पर लाइव रही नरेश माटिया, तरंग माटिया के प्रयासों से और इस तरह कई काव्य रसिक मित्र इससे जुड़कर काव्य पाठ सुन पाए| अंतस् के यू ट्यूब चैनल – Antas.mail पर भी यह विडियो उपलब्ध है|
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2 टिप्पणी

  1. पूनम माटिया की अध्यक्षता में आयोजित अंतस् काव्य गोष्ठी की इस शृँखला ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली है। इसकी गतिविधियों को ‘पुरवाई’ में स्थान मिलना, गरिमामय उपलब्धि है।
    शुभकामनाएँ

  2. अंतस् द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठियों की अबाधित मासिक श्रृंखला में 47 वीं गोष्ठी की रिपोर्ट *पुरवाई* के माध्यम से सुदूर पाठकों तक पहुँच रही है। प्रसन्नता का विषय है। अति आभार।

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