'कोई खुशबू उदास करती है' 3
कहते हैं जब कोई व्यक्ति लेखन में जुटता है तो उसका उदात्त स्वरुप उसकी अभिव्यक्ति में मिलता है। ऐसे ही उदात्त व्यक्तित्व की झलक प्रतिष्ठित  लेखिका   आदरणीय नीलिमा शर्मा के कहानी संग्रह ‘ कोई खुशबू उदास  करती  है  ‘ में मिलती है जहां भाव पक्ष की प्रबलता है, मानवीय सम्वेदना को उभारते हुए समकालीन समाज के कटु यथार्थ को भी चित्रित किया गया है। 
सर्वप्रथम कहानी संग्रह का शीर्षक ‘कोई खुशबू उदास करती है ‘   पाठक  को आकर्षित किए बिना नहीं रहता । संग्रह की य़ह शीर्षक कहानी भी पाठकों को प्रेम के विछोह की खुशबू में सराबोर कर देती है पर वह प्रेम की खुशबू भी इतनी भीनी थी कि नायिका  को उसका भान बहुत समय बीत जाने के बाद होता है और उसके बाद जीवन भर का विरह…. निश्चय ही ऐसी खुशबू उदास करती है। 
‘टुकड़ा- टुकड़ा जिंदगी ‘ कहानी वर्तमान समय की कहानी है जिसमें लॉक डाउन जैसी यंत्रणा सबने भोगी किन्तु जिंदगी को जीना नहीं भूले भले ही टुकड़ों में सही ।इस भाव को कहानी में घर मे काम करने वालों सहायिका नसरीन के माध्यम से कथानक के ताने- बाने में बखूबी पिरोया गया है। 
‘कोई रिश्ता न होगा तब..’ समाज का वह विद्रूप आईना दिखाती है जहां आज भी लड़के और ल़डकियों में भेद किया जाता है और गौरतलब य़ह है कि ऐसा शिक्षित परिवारों में भी होता है। 
संग्रह की कहानी ‘उत्सव ‘ जिसके शीर्षक से प्रतीत होता है कि कहानी किसी सौम्य ,हल्के-फुल्के विषय पर लिखी होगी, पर कहानी का विषय चौंकाने वाला है जहाँ मृत्यु का उत्सव मनाते हुए बाल यौन शोषण जैसे गंभीर प्रश्न को उठाया गया है। 
‘अंतिम यात्रा और अंतर्यात्रा ‘ कहानी एक बहुत ही सुन्दर कहानी है जिसमें एक पति  अपनी  मरणासन्न पत्नी जिसके साथ साठ वर्ष बिताए, के साथ बीते पलों को याद करते हुए कहीं प्रेमिल होता है, कहीं स्वयं पर नाराज होता है, विभिन्न मनोदशाओं से गुजरते अपने मन की यात्रा करता है।यहां एक स्त्री लेखक के  द्वारा पुरुष मानसिकता की पकड बहुत पैनी दिखाई पड़ती है। 
‘ मन का कोना ‘ कहानी आत्मकथात्मक शैली में लिखी गयी गर्भस्थ कन्या शिशु की कहानी है जो अपने घर में ही अपनी स्वीकार्यता पर सशंकित है। समाज मे होते आ रहे स्त्री- पुरुष भेद को इस कहानी में इस तरह से पिरोया है कि कहानी कहीं भी बोझिल नहीं होती। 
संग्रह की सभी कहानियाँ विषय- वस्तु और प्रस्तुति में अनूठी हैं, चाहे वो ‘मायका ‘ हो या ‘ लम्हो ने खता की ‘ हो या ‘आखिर तुम हो कौन ‘ हो और कहानी ‘इत्ती सी खुशी ‘
वास्तव में मन को गुदगुदा कर अपार खुशियां दे जाती है। 
इस संग्रह की कहानियों में देश, काल,वातावरण, पात्रानुकूल भाषा का यथोचित प्रयोग हुआ है चाहे वो पंजाबी संस्कृति का चित्रण हो या फिर मुस्लिम संस्कृति की छटा  हो जैसे ‘उधार प्रेम की कैंची ‘ कहानी या आधुनिक परिवेश की बात हो। 
कहानी संग्रह में प्रयुक्त हुईं कई उक्तियों कहानी को प्रवाह देती हैं साथ ही मन- मस्तिष्क को सोचने के लिए विवश भी कर देतीं हैं जैसे “..देखना अगर परिस्थितियां ऐसी ही रहीं तो रक्त बीज की तरह हर तरफ पुरुष ही पुरुष होंगे और सिर्फ गिनती की लड़कियां तब…” ,”य़ह जिंदगी मेरी हैं और मैं बस अपने साथ जिऊंगी हमेशा- हमेशा के लिए…” ।
समग्रतः नीलिमा दी का य़ह कहानी संग्रह जीवन के विविध रगों और खुशबू को समेटे हैं जिसमें प्रेम के विविध रूप है तो वही समाज का कटु यथार्थ भी है और वही मानव मन की विभिन्न संवेदना का गहन संस्पर्श है। 
आप सब य़ह कहानी संग्रह जरूर पढ़े। य़ह संग्रह आपको थोड़ा भी उदास नहीं करेगा।
पुस्तक – कोई खुशबू उदास करती है 
लेखिका – नीलिमा शर्मा
समीक्षक – डॉ जया आनंद 

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