ये जरुरी नहीं कि प्रयोग सिर्फ वैज्ञानिक या पढ़े लिखे लोग ही करें | हमारे देश में तो हर कोई आजाद है प्रयोग करने लिए यहाँ तक कि नेता भी | यदि यूँ कहें कि हमारे नेता और सरकार ही प्रयोगवादी होने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं तो गलत नहीं होगा | उनके प्रयोगों का असर और साइड इफेक्ट सरकारी डिपार्टमेंट ,सरकारी अस्पताल और सरकारी स्कूलों पर बिना किसी दूरबीन का प्रयोग किये देखा जा सकता है |
जितनी सरकार उतने प्रयोग, यहाँ तक कि सरकारी स्कूलों की हालत तो उस चूहे जैसी हो चुकी है जिस पर दवाओ का क्या असर होगा ? ये प्रयोग किया जाता है | पर सरकार सिर्फ प्रयोग करती है | नेता जी किसी देश का भ्रमण पर गए.. वहां के स्कूलों में क्या क्या होता है.. देखा और आते ही अपनी बुद्धि अनुसार सरकारी स्कूलों पर लागू कर दिया खुद के फ्रेश आयडिया के नाम पर अब जो लागू हुआ उसका असर क्या होगा ? ये पता करने की ना तो फुरसत है ना ही …

