पुराने जमाने में होते थे आर्यपुत्र और आज के नए युग में होते हैं पत्नी पुत्र ..नही समझ आया न …समझाती हूँ पत्नी पुत्र वो जो बिना पत्नी के पूछे जल तक ग्रहण ना करे ..बिना पत्नी की आज्ञा कोई काम ना करे पत्नी के आगे माँ को भी तुच्छ महसूस करा दे .शादी के पहले माँ का पल्लू पकड़े घूमने वाला लड़का शादी होते ही पल्लू बदल ले तो माँ को तुच्छ टाइप फीलींग ही आएगी ..
पिछले दिनों एक विवाह में गयी वहां लड़की के भाई को देखकर यही महसूस हुआ ..उसे बहन की शादी या कामों से कोई लेना देना नहीं था वो तो अपनी डॉली के ही आगे पीछे व्यस्त था …डॉली ये पहन लू ? डोली ये खा लू ? डाली यहाँ बैठ जाऊ ? डाली में डांस कर लू ? इन हरकतों को देख सारे मेहमान हँस रहे थे ..पर उस डॉली भक्त पर कोई असर नहीं था..


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