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अर्चना चतुर्वेदी की चुटकी : प्रेम का वायरस

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ये प्रेम ही है जो  जाति धर्म किसी दीवार को नहीं मानता जो लोग प्रेम में होते हैं वे किसी संत से कम नहीं होते । भगवान के प्रेम में  डूबा भक्त और प्रेम में डूबे प्रेमी जोड़े की हालत एक जैसी होती है जब वे समाधि मैं लीन हों तो बाहर की भीड़ ,शोर ,भागदौड़ कोई भी उनकी समाधि भंग नहीं कर सकता | शहर के मेट्रो स्टेशन और मेट्रो इन जोड़ों का तीर्थ स्थल है |
दिल्ली में मेट्रो शुरू होते ही बहुत से मुरझाये चेहरों पर चमक आ गयी ..सिर्फ दिल्ली ही नहीं गाजियाबाद ..नोइडा तक ख़ुशी की लहर आ गई | ना ना जॉब पर जाने वालों में नहीं ये लहर तो मुहब्बत करने वालों के दिल में हिलोरें मार रही है | 
लॉकड़ाउन से पहले तक हर मेट्रो स्टेशन इन भक्तों से गुलजार रहा करते थे और फिर जैसे फिल्मों में विलेन की एंट्री होती है और वो प्रेम का दुश्मन बन जाता है ठीक वैसे ही कोविड की एंट्री हुई और बेचारे प्रेम करने वाले दर्द में डूब गए |
कहने प्रेम भगवान का दिया सबसे खूबसूरत अहसास है पर किसी वायरस से कम नहीं एक बार किसी को ये वायरस छू भर जाये तो उसकी नींद भूख सब खत्म हो जाती है ..इस लाइलाज वायरस का इलाज तो बड़े से बड़े देश में नहीं है ..

अर्चना चतुर्वेदी की चुटकी : प्रेम का वायरस 3

ये प्रेम ही है जो  जाति धर्म किसी दीवार को नहीं मानता जो लोग प्रेम में होते हैं वे किसी संत से कम नहीं होते । भगवान के प्रेम में  डूबा भक्त और प्रेम में डूबे प्रेमी जोड़े की हालत एक जैसी होती है जब वे समाधि मैं लीन हों तो बाहर की भीड़ ,शोर ,भागदौड़ कोई भी उनकी समाधि भंग नहीं कर सकता | शहर के मेट्रो स्टेशन और मेट्रो इन जोड़ों का तीर्थ स्थल है |
स्टेशन का सबसे वीरान कौना इन्ही जोड़ों की वजह से गुलजार राहत था । बिजली के खंभे के सहारे एक दूसरे की आँखों में खोए जोड़े अक्सर दिख जाते । कभी कोई अधेड़ मर्द और जवान लड़की हाथ पकड़े दीवार की तरफ मुहँ किए दिखते तो अनेक लोगों के मन में कई सवाल एकसाथ उठते पर प्यार में  उम्र की सीमा नहीं होती । ये सोच झटक दिए जाते वे सारे सवाल । मेट्रो के अंदर भी कभी सीट पर तो कभी नीचे फर्श पर अपनी ही दुनिया में  खोए उन जोड़ों को देख कुछ चेहरों पर मुस्कान तो कुछ पर गुस्सा साफ नजर आता ।
कई लोग तो धीरे धीरे बड़बड़ाते सुने जा सकते हैं “ कमबख्तों को शर्म  नहीं है, इनके माँ बाप ने संस्कार नहीं दिए इन्हे” आदि पर इन सबका असर उनकी क्रिया कलापों पर नहीं पड़ना था सो नहीं पड़ा। लोग भले ही भुनभुनाएं पर इंतजार उन्हे भी रहता है उन जोड़ों का जो वर्षों से उनके सफ़र के साथी होते हैं बिना नागा ।। जिस दिन ना दिखें सबकी आखें उन्ही को तलाशती हैं |
ऐसे ही काई सालो से हम मेट्रो का सफ़र और प्रेमियों के दर्शन कर रहे थे ..हर उम्र के जोड़े दीखते थे ..कभी रिक्शे में सवार हो आते तो कभी दूसरी मेट्रो से ..फिर एक कोना तलाश अपनी दुनिया में खो जाते ..हम भी उन्हें देख कर खुश होते ..और फिर आया वायरस जिसने सबकी दुनिया पर ब्रेक लगा दिया ..बेचारे उन प्रेमियों का क्या होगा ये सोचकर हम भी चिंतित थे| 
इन प्रेम करने वाली तड़पती आत्माओं की  छ महीने से सूखे की मार झेलती फसल जैसी हालत थी | कोरोना की वजह से यदि सबसे ज्यादा कष्ट किसी को पहुंचा तो वो प्यार करने वाले ..हाथों हाथ डाले घूमने वाले मुहब्बत के सच्चे सिपाही | घर में पहरों के बीच मेसेज के सिवा कोई सहारा ना बचा था ..कभी वीडियो काल का मौका खोज भी लिया तो पकड़े जाने के डर में ही हलक सूखता रहा अंदर से आवाज निकल रही थी कोरोना तेरो नाश जाए |
बेचारे प्रेम करने वालों के शरीर भले ही घर में पड़े थे आत्मा तो कबकी निकल कर भ्रमण करने को आतुर थी .. कोरोना तो काढ़ा और गर्म पानी से तृप्त कर भगाने का रास्ता है पर प्रेमी /प्रेमिका के दीदार को तरसती इन अंखियो को तो दर्शन के बाद ही चैन मिलेगा तभी तो ह्रदय से “ अंखिया हरी दर्शन की प्यासी” जैसे बोल निकल रहे थे | सबसे ज्यादा शिद्दत से यदि किसी ने भगवान से कोरोना भगाने की प्रार्थना की तो वो ये ही महान लोग हैं|
माँ/ पत्नी की एक्सरे जैसी नजरों से बचने के लिए तरह तरह के जतन किये जा रहें हैं फोन पर बात करने के लिए कभी बाथरूम तो कभी छत का सहारा ही बचा है… सबसे ज्यादा गहरे दुःख में वे जोड़े डूबे हैं जिनका मामला या तो फाइनल सेटिंग पर था या जिनकी शादी होने वाली थी और कोरोना काल के बाद पता लगा कि इनकी चाहत तो किसी और के साथ फेरे ले चुकी है ..वो बेचारे दर्द भरी आवाज में गा रहे हैं .. मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता ,अगर तूफा नहीं आता किनारा मिल गया होता” 
बस एक बार स्कूल कालेज और मॉल खुल जाएँ फिर तो देश की हर प्रेम में तड़पती आत्मा को मुक्ति का रस्ता मिल ही जायेगा | हर आत्मा से दुआ निकलेगी ..और जो वायरस गालियाँ सुनकर नहीं गया वो शायद इनकी तृप्त आत्मा की दुआ सुनकर तो पक्का चला जायेगा | यही वो आत्माएं हैं जो सच्चे दिल से दुआ कर रही हैं वेक्सीन आने के लिए ..
सरकार भी शायद इनके कष्ट को समझ चुकी है उनका ह्रदय भी इनकी तड़प देख पसीज चुका है सो जोरशोर से वैक्सीन की तैयारी में जुटी हुई है |

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