कोरोना काल पर अंजना वर्मा के दो गीत
सहमे-सहमे बीत रहे दिन
दिखता नहीं है जो आँखों से
यह दुनिया का अंत नहीं है
सब अपने में व्याकुल हैं पर
दु:ख के बादल छँट जायेंगे,
हो गयीं दूरियाँ, घर-घर के
परवत-नदियाँ, पंछी-प्राणी,
तुम्हें गर्व था तुम कर सकते
वह रस्ता जिस पर साथ-साथ,
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