हम गुटबाजी से दूर रहते हैं… मठ बनाने वाले हमें सख्त नापसंद हैं | हम ग्रुप बनाते हैं, हम लोग एक दूसरे को चढ़ाते हैं, किसी छठे को हम टिकने भी नहीं देते पर हम गुटबाजी से दूर रहते हैं|
हम आपस में बातें करते हैं, अपनी तारीफों के पुल बांधते हैं, कोई और अपनी तारीफ़ सुनना चाहे तो हम मिलकर जलील करने की हद तक उसे नीचा दिखा डालते हैं | पर गुटबाजी के हम सख्त विरोधी हैं|
हम सब एक दूसरे की तारीफों के कितने भी पुल बाँध लें, एक दूसरे को कितना भी प्रमोट कर लें, एक दूसरे के खिलाफ एक शब्द भी ना सुनें| पर हमें गुटबाजी पसंद नहीं..|

