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ओटेरी सेल्वा कुमार की कविता – वो गरीबी

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कहीं भूखा
रोते हुए बच्चे की आवाज
हमारे कानों में
बज रहा है
उस शोर से
हम क्या जानते हैं?
भारत अभी भी गरीबी के घेरे में है
गरीबी व्याप्त है
बस यहीं रह रहा है
शहर सड़क कर सकते हैं
लानत है!  उन गांवों में
भी गांव पनप सकते हैं
गरीब वो लोग
बेघर लोग …
शहरों की सड़कों पर
जीवित आबादी में सब कुछ
गरीबी अभी जिंदा है
सही बात है …
गरीबी दूर करने के लिए
क्या किया जा सकता है?
यह यहाँ के बारे में प्रश्न नहीं है…

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