बारात का मतलब सिर्फ लड़की को विदा करवा कर लाना नहीं है ना ही मामा फूफा का रूठना मनाना है बल्कि हमारे यहाँ की बरातें देश की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक होती हैं | क्या कहा कैसे ? वो हम बताये देते हैं …एक बार बता दिया फिर तो आप हर बारात में खुद ही देख लेंगे |
ये एकता सिर्फ दूल्हे,घोड़ी या सजी संवरी बारात तक ही सीमित नहीं ना ही सर्दी में बिना स्वेटर शाल वाली महिलाओं तक है | असल चींजे तो इन सबसे अलग है जैसे हमारे यहाँ हर बारात में दो चार ऐसे बराती होते हैं जो बारात में सिर्फ अपनी नृत्यकला का प्रदर्शन करने ही आते हैं | ये लोग नृत्यकला में इतने पारंगत होते हैं कि भजन हो या ब्लैक एंड बाईट फिल्म का स्लो गीत सब पर एक ही स्टाइल से नाच सकते हैं | ये कुशल नर्तक हर प्रान्त,हर प्रदेश ,हर जाति हर धर्म की बारात में अपने नृत्य की छटा बिखेरते मिल जायेंगे | इनके नृत्य में इतनी विविधता इतनी कलात्मकता देखने को मिलती है कि शकीरा और माइकल जैक्शन भी इनके सामने घुटने टेक दें |

