होमग़ज़ल एवं गीतडॉ. ममता मेहता की ग़ज़ल ग़ज़ल एवं गीत डॉ. ममता मेहता की ग़ज़ल By Editor July 23, 2019 0 333 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp डॉ. ममता मेहता मन ये बियाबान नहीं है खाली है वीरान नहीं है ***** हल्की फुल्की एक दो बातें भारी कुछ सामान नहीं है ***** आये,बने हैं घर मालिक कोई भी मेहमान नही है ***** बेकल पंछी भटक रहा क्यों राहें तो अनजान नहीं है ***** सूनी बगिया बाट निहारे फूल खिले निगहबान नहीं है ***** भीतर जख्म हरे हरे हैं बाहर पर निशान नहीं है ***** गम किसका क्यों करें खोने को आसमान नहीं है Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखडॉ. तारा सिंह ‘अंशुल’ की तीन नज़्मेंअगला लेखमानवीय प्रसंग ही साहित्य की एकलौती राजनीति है – सुशोभित सक्तावत Editor RELATED ARTICLES ग़ज़ल एवं गीत आशुतोष कुमार की ग़ज़लें June 27, 2026 ग़ज़ल एवं गीत पद्मश्री अशोक चक्रधर की तीन ग़ज़लें June 27, 2026 ग़ज़ल एवं गीत ज्ञान प्रकाश विवेक की ग़ज़लें June 27, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 आशुतोष कुमार की ग़ज़लें June 1, 2024 अपनी बात…… April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest लंदन में FISI-UK का ‘सभ्यतागत भारत’ पर अमी गणात्रा का ज्ञानवर्धक व्याख्यान July 16, 2026 डॉ. पूरन सिंह की कहानी- माइंडसेट July 11, 2026 दिल्ली में ‘अजीब दास्ताँ’ का ज़बर्दस्त मंचन July 11, 2026 संगीता कुमारी की कहानी-नशे की गिरफ्त July 11, 2026 और अधिक लोड करें