संपादकीय : बेंगलुरु दंगा और राजनीति 3

बेंगलरू दंगे को लेकर अब तक जो बातें सामने आ रही हैं इससे एक बात साफ़ हो जाती है कि यह दंगा प्रीप्लैण्ड और सुनियोजित था। 
धर्म को लेकर भारत में जितने दंगे हुए हैं शायद विश्व के किसी अन्य देश में नहीं हुए होंगे। कवि मुनव्वर राणा की पुत्री सुमैया राणा ने न्यूज़18 पर बहस करते हुए कहा, “हमें दंगों के पीछे के कारण पर ध्यान देना होगा। जो क़ौम अपने नबी के लिये जान देने को तैयार हो जाती है, उसको भड़काया क्यों गया?” यानि कि सुमैया बेंगलुरू हिंसा का समर्थन करती हैं। 
इस पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने जवाब देते हुए कहा, “कि जिस पोस्ट का हवाला दिया जा रहा है वो एक दूसरी पोस्ट के जवाब में डाले गये। दूसरी पोस्ट कन्नड़ में लिखी गयी थी और उसमें भगवती माँ और दुर्गा माँ के थे और उनमे बहुत भद्दी और गन्दी बातें लिखी गयी थीं।”
यानि कि मूल मुद्दा एक दूसरे के धर्म से जुड़ी ऐसी पोस्ट थीं जो पूरे शहर के जलने का कारण बनीं। एक मज़हब के मानने वाले ने हिन्दू देवियों पर भद्दी पोस्ट डाली और दूसरे ने जवाब में इस्लाम के वली मुहम्मद साहब पर आपत्तिजनक पोस्ट डाली। और मारा गया आम आदमी और जल गया पुलिस स्टेशन। 
इन दंगों के बारे में सबसे महत्वपूर्ण हैं वो वीडियो जिनमें कुछ नेता बाक़ायदा लाउडस्पीकर पर बयानबाज़ी करते हुए जनता को दंगा करने के लिये उकसा रहे हैं। और दूसरी है वो एफ़.आई.आर. जो स्वयं एक पुलिस अफ़सर ने दर्ज करवाई है। 
सब इंस्पेक्टर राघवेंद्र की तरफ से कराई गई एफआईआर के मुताबिक दंगाई बोल रहे थे कि हम पुलिस स्टेशन में सबको मारने और जलाने आए हैं। सब इंस्पेक्टर राघवेंद्र ने साफ साफ ये बात लिखी है कि नवीन के घर के नीचे खड़ी भीड़ के पास धारदार हथियार थे इस भीड़ में से कुछ ने पुलिस की बंदूक को भी छीनने की कोशिश की। साथ में भीड़ में से किसी ने ये भी कहा कि वो पुलिस वालों को खत्म करने के मकसद से आए हैं और अपना काम पूरा होने के बाद ही वापस जाएंगे।  
इस मामले में पुलिस मुदस्सिर अहमद नाम के एक आरोपी को भी तलाश कर रही है। मुदस्सिर अहमद नाम के इस युवक ने फेसबुक के जरिए पोस्ट करके मुस्लिमों को डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन पर जमा होने को कहा। मुदस्सिर अहमद ने लिखा कि कांग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भांजे ने हमारे नबी की शान में गुस्ताखी की है।
बेंगलुरू में जिन इलाकों में दंगा औऱ आगज़नी हुई है वो बहुत ही ज्यादा घनी आबादी वाला इलाका है। इलाके में 75 से 80 फ़ीसदी मुस्लिम आबादी रहती है। मतलब साफ है वहां घंटे भर में सैकड़ों या फिर कहें कि हजारों लोगों को जमा करना कोई मुश्किल काम नहीं है। 
डीजे हल्ली के साथ-साथ केजी हल्ली पुलिस स्टेशन में भी तीन एफ. आई. आर. दर्ज की गई है इसमें एक FIR में चौंकाने वाली बात सामने आई है यहां पर जो आरोपी नंबर 7 है उसका नाम कलीम है। कलीम….इलाके की कांग्रेस पार्षद इरशाद बेगम के पति हैं। कलीम इससे पहले कांग्रेस के पार्षद रह चुके हैं ऐसे में ये सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या यह राजनीतिक रंजिश का मसला हो सकता है? मगर काँग्रेस पार्टी का स्टेण्ड अभी तक समझ नहीं आ रहा है।
बेंगलुरू हिंसा के बाद सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का नाम सामने आ रहा है। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया ने अपनी एक वेबसाइट बना रखी है, जिसमें वो खुद को पूरे देश में फैला हुआ राजनीतिक संगठन कहती है। पार्टी के उद्देश्यों में मुस्लिमों, वंचित वर्ग और अल्पसंख्यकों के हितों का ध्यान रखने की बात की गई हैऐसा लगता है कि इस पार्टी ने दक्षिण भारत के अल्पसंख्यकों के बीच अपना प्रभाव बना लिया है।
याद रहे कि दंगों में अब तक चार लोगों की जानें गयी हैं और 43 एफ़.आई.आर. दर्ज करवाई जा चुकी हैं। 50 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। मुख्यमन्त्री येदुरप्पा एवं कर्नाटक सरकार से अपेक्षा की जाती है कि हिंसा फैलाने और आगज़नी करने वालों से सख़्ती से निपटा जाए।
तेजेंद्र शर्मा
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.

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