मन नहीं लगता …कभी कभी किधर भागता है …किसे ढूंढता है …पता नहीं। क्यों ऐसा लगता है कोई पुकार रहा है जो बस सुनाई नहीं देता… कोई है जो इंतज़ार करता है बस दिखाई नहीं देता ..धुँध सी है जो छँट नहीं रही ।चारों तरफ़ बारिश व ठंडी हवाएँ है ।दिल किसी को याद कर रहा है पर नाम याद नहीं आ रहा …या फिर दिल सब समझ रहा है बस मानना नहीं चाह रहा …या हो सकता है सब धुँध ही हो वास्तविकता से परे ।बस वो ही समझ नहीं पा रही ।सब सोचते हुए लड़की झुंझलाते हुए उठी….सुबह से कैसा मौसम हो रहा है ठंड की बारिश वैसे भी बुरी लगती है ।नानी दादी के मुँह से सुना था …पुस के ठंड की बारिश हड्डियों में घुस जाती है पर लगता है ये बारिश तो मुई मेरे दिल में घुसे चले जा रही है ।
सोचते सोचते लड़की ने सोचा चलो अदरक की चाय पी के ही जी हल्का किया जाए।पर चाय पीने जो ही बैठी तो लगा चाय की ख़ुशबू ने यादों की कोठरी के दरवाज़े खोल दिए ।इस करोना ने कितने घर बर्बाद कर दिए और पता नहीं कितने और करेगा ..सोचते सोचते अनायास ही दो आँसू आँखों से लुढ़क गए।
चाहकर भी हम अपनों को और अपनों की यादों को कोठरी में बंद नहीं कर सकते ।धीरे धीरे ये यादें आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी की हमसफ़र बन जाती है ।जब तब आपको अकेला देखती है बाहें फैला आपको अपनी आग़ोश में भर लेती है ।जितना बचने की कोशिश करो उतना भँवर में डूबते जाते हो ।
कहने को वो मेरा कुछ भी नहीं और मानो तो सब कुछ ।हाँ ..पर मेरा प्रेम तो नास्तिक ही रहा ना नाम ..ना पहचान ..ना ही कोई रिश्ता ।हाँ ..बस मैंने दिल की गहराइयों से प्रेम किया कोई दिखावा नहीं किया..कोई व्रत भी नहीं ..कोई आडम्बर भी नहीं ।शायद इसीलिए मेरा प्रेम नास्तिक ही रहा और नास्तिक प्रेम को खोने की कमी वास्तविकता से कहीं अधिक होती है ।जिसे आप दिखा नहीं सकते ।सोचते सोचते लड़की की चाय आँखों के पानी से ठंडी और नमकीन हो चुकी थी जिसे वो चाह कर भी मुँह को ना लगा पाई।